मानसून देर से आया,घरेलू खर्च पर पड़ेगा सीधा असर

Update: 2026-06-12 09:37 GMT

Vyapaar:मानसून की सुस्ती से बढ़ सकती है महंगाई, खेती और बजट पर असर

देश में मानसून की धीमी रफ्तार ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले दो हफ्तों में मध्य और उत्तर भारत के कई हिस्सों में औसत से कम बारिश होने की संभावना है। इससे न सिर्फ गर्मी बढ़ेगी, बल्कि महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण मानसूनी हवाओं की गति प्रभावित हुई है, जिससे बारिश में देरी हो रही है।

मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल पहुंचता है, लेकिन इस बार यह 4 जून को पहुंचा। अब इसके आगे बढ़ने में भी रुकावट देखी जा रही है। भारत की अर्थव्यवस्था में मानसून की बड़ी भूमिका है क्योंकि देश की लगभग 50 प्रतिशत खेती बारिश पर निर्भर करती है। धान, कपास, सोयाबीन और दालों जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई मानसून पर ही आधारित होती है।

बारिश में देरी होने से खेती का काम पीछे चल सकता है, जिससे फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। जब उत्पादन कम होगा तो बाजार में आपूर्ति घटेगी और कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ेगा, जहां दाल, चावल और सब्जियों के दाम बढ़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सप्लाई कम होने से महंगाई का दबाव बढ़ेगा, जिसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से घरेलू बजट बिगड़ सकता है। साथ ही सरकार को स्थिति संभालने के लिए कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात पर रोक भी लगानी पड़ सकती है, जिससे विदेशी व्यापार पर असर पड़ेगा।

अगर बारिश की स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले हफ्तों में कृषि उत्पादन और बाजार दोनों पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।

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