मुंबई: भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में लगातार सातवें हफ़्ते भी गिरावट देखी गई, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और US बॉन्ड यील्ड में तेज़ी आई। इस हफ़्ते निफ़्टी में 0.88 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन ट्रेडिंग के आखिरी दिन इसमें 0.34 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह 23,140 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स 315 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 73,895 पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे हफ़्ते के दौरान इसमें 0.54 प्रतिशत की गिरावट रही।
हफ़्ते के बीच में बाज़ार पर भारी बिकवाली का दबाव रहा; गुरुवार को बेंचमार्क में 1.6 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, लेकिन शुक्रवार को 'वैल्यू बाइंग' के कारण बाज़ार में थोड़ी रिकवरी हुई।
पूरे हफ़्ते ब्रेंट क्रूड की कीमत $105 प्रति बैरल से ऊपर बनी रही, जबकि WTI क्रूड भी $90 प्रति बैरल से ऊपर रहा। ऐसा भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ग्लोबल ऑयल सप्लाई को लेकर चिंताओं के कारण हुआ।
हालांकि, हफ़्ते के आखिर में तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, जिससे ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट, इंपोर्ट बिल पर दबाव, महंगाई की उम्मीदों, रुपये और कॉर्पोरेट इनपुट लागत से जुड़ी चिंताएं कुछ कम हुईं।
जानकारों का कहना है कि ग्लोबल बॉन्ड मार्केट से दबाव बना हुआ है; इस हफ़्ते US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.10 प्रतिशत से ऊपर चली गई। उन्होंने कहा कि ऊंची यील्ड से ग्लोबल फाइनेंशियल हालात कड़े हो रहे हैं और इससे उभरते बाज़ारों (emerging markets) के एसेट्स का आकर्षण कम हो सकता है।
पिछले हफ़्तों की तुलना में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली काफ़ी बढ़ गई है और यह घरेलू इक्विटी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
इस बीच, ईरान ने अमेरिका को सात दिन का एक नया प्रस्ताव दिया है। इसमें कहा गया है कि अगर वॉशिंगटन अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा ले, तेल पर लगे प्रतिबंधों को खत्म कर दे और व्यापक युद्धविराम के लिए सहमत हो जाए, तो ईरान मौजूदा संघर्ष को खत्म करने और रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को फिर से खोलने के लिए तैयार है।
जानकारों का कहना है कि निफ़्टी के लिए 23,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट ज़ोन बना हुआ है, जबकि 23,200 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन है।
बाज़ार के जानकारों की नज़र रुपये की चाल पर भी है। डॉलर के लिए तेल से जुड़ी लगातार मांग और FII की लगातार निकासी से रुपये पर दबाव बना रह सकता है, हालांकि RBI के दखल से अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने में मदद मिली है।