भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड उछाल, RBI डेटा से बाजार में उम्मीदें बढ़ीं
BUSINESS: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर बढ़ गया है। 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का फॉरेक्स रिजर्व 96.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 675.16 अरब डॉलर हो गया है। इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 7.26 अरब डॉलर की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी का मुख्य कारण फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) और गोल्ड रिजर्व में हुई वृद्धि रही। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। इससे देश को वैश्विक आर्थिक संकट, आयात खर्च और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद मिलती है।
समीक्षा अवधि के दौरान भारत के फॉरेन करेंसी एसेट्स में 93 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद यह बढ़कर 546.51 अरब डॉलर हो गया है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और जापानी येन जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राएं शामिल होती हैं। इन मुद्राओं की विनिमय दर में बदलाव का असर भी विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
इसके अलावा देश के स्वर्ण भंडार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आरबीआई के अनुसार, सप्ताह के दौरान भारत का गोल्ड रिजर्व 2.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 105.23 अरब डॉलर पहुंच गया। सोने का भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करता है और वैश्विक अस्थिरता के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत की इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से जुड़ी संपत्तियों में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, आईएमएफ में भारत की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) होल्डिंग 30 लाख डॉलर बढ़कर 18.626 अरब डॉलर हो गई। वहीं, रिजर्व ट्रेंच पोजिशन भी 70 लाख डॉलर बढ़कर 4.793 अरब डॉलर पहुंच गई।
विदेशी मुद्रा भंडार में इस बढ़ोतरी का असर आने वाले दिनों में शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है। विदेशी निवेशकों के लिए भी यह संकेत होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों से निपटने की बेहतर स्थिति में है।
हालांकि, इस साल की शुरुआत में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे आ गया था। 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में यह 728.494 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद वैश्विक तनाव और खासकर मध्य-पूर्व में बढ़ी राजनीतिक अस्थिरता के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा। रुपये को स्थिर रखने के लिए आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया और डॉलर की बिक्री की, जिससे कुछ समय के लिए विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सरकार और आरबीआई लगातार विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में नागरिकों से गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं को कम करने, ईंधन की खपत घटाने और सोने की खरीद को टालने की अपील की थी, ताकि देश की विदेशी मुद्रा स्थिति मजबूत बनी रहे।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करता रहेगा, ताकि रुपये और वित्तीय बाजार में स्थिरता बनी रहे। हालांकि, आरबीआई ने यह भी कहा है कि उसका उद्देश्य किसी निश्चित विनिमय दर को बनाए रखना नहीं, बल्कि बाजार में संतुलन और स्थिरता सुनिश्चित करना है।
कुल मिलाकर, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हुई यह वृद्धि अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। मजबूत फॉरेक्स रिजर्व से देश की आयात क्षमता बढ़ती है, रुपये को सहारा मिलता है और वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है। आने वाले दिनों में इसका असर शेयर बाजार और आर्थिक गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है।