मुंबई। अडानी एयरपोर्ट्स ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 (T1) के पुनर्विकास की तैयारी तेज कर दी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद टर्मिनल की सालाना यात्री क्षमता मौजूदा 1.5 करोड़ से बढ़कर 2 करोड़ हो जाएगी। यानी क्षमता में करीब 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। पुनर्विकास का पहला चरण जनवरी 2027 से शुरू करने की योजना है। इसमें टर्मिनल-1B के उत्तरी हिस्से का चरणबद्ध पुनर्विकास किया जाएगा।मुंबई एयरपोर्ट का संचालन अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड की कंपनी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) करती है। कंपनी के अनुसार, करीब 60 साल पुराने टर्मिनल की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं। इसी वजह से पुराने हिस्से को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उसका पुनर्विकास करने की योजना बनाई गई है। अप्रैल 2026 में टर्मिनल-1 पर आग लगने की घटना के बाद सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई थीं।इस परियोजना का उद्देश्य यात्रियों की बढ़ती संख्या के अनुरूप बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना, सुरक्षा में सुधार करना और भविष्य में अधिक उड़ानों के संचालन के लिए क्षमता तैयार करना है। हालांकि, निर्माण के दौरान उड़ानों और यात्रियों की आवाजाही पर पड़ने वाले असर को लेकर एयरपोर्ट संचालक और एयरलाइंस के बीच चर्चा भी जारी है।
पहले चरण में 50 लाख यात्रियों की क्षमता प्रभावित होगी
अडानी एयरपोर्ट्स के मुताबिक, पुनर्विकास के पहले चरण में सालाना लगभग 50 लाख यात्रियों को संभालने वाली क्षमता अस्थायी रूप से बंद रहेगी। यह मुंबई एयरपोर्ट से गुजरने वाले कुल करीब 5.5 करोड़ यात्रियों का लगभग 9 प्रतिशत है। कंपनी का कहना है कि इस अवधि में हवाई अड्डे के लगभग 91 प्रतिशत यात्री यातायात पर असर नहीं पड़ेगा।टर्मिनल-1 के उत्तरी हिस्से में होने वाले काम के दौरान यात्रियों और एयरलाइंस को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए चरणबद्ध तरीके से निर्माण किया जाएगा। कंपनी ने संबंधित एयरलाइंस को अस्थायी तौर पर नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से परिचालन करने का विकल्प दिया है। यह स्थानांतरण एयरलाइंस की सहमति और परिचालन संबंधी व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।
एयरलाइंस ने उठाए स्लॉट और संचालन के मुद्दे
टर्मिनल के पुनर्विकास को लेकर एयरपोर्ट संचालक और एयरलाइंस के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए हैं। एयरलाइन ऑपरेटर्स कमेटी ने उड़ानों के स्थानांतरण से संबंधित निर्णयों पर अधिक पारदर्शिता की मांग की है। एयरलाइंस ने टर्मिनल-1 और टर्मिनल-2 की वास्तविक क्षमता, उपयोग और पुनर्विकास से जुड़े परामर्श के रिकॉर्ड की जानकारी मांगी हैएयरलाइंस का कहना है कि उड़ानों के स्लॉट और पहले से तय शेड्यूल में बदलाव करने से यात्रियों की बुकिंग, कनेक्टिविटी और परिचालन प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, एयरपोर्ट संचालक का तर्क है कि पुराने टर्मिनल की सुरक्षा और आवश्यक पुनर्विकास को लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता।इस विवाद के बीच यात्रियों के लिए अहम बात यह है कि उड़ानों के समय, टर्मिनल और प्रस्थान स्थल में बदलाव होने पर उन्हें एयरलाइन से अपडेट लेना होगा। विशेष रूप से नवी मुंबई से स्थानांतरित उड़ानों के यात्रियों को टिकट पर दर्ज एयरपोर्ट की जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए।
नवी मुंबई एयरपोर्ट बनेगा वैकल्पिक विकल्प
नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शुरू होने से मुंबई महानगर क्षेत्र में विमानन सेवाओं के विस्तार के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हुआ है। अडानी एयरपोर्ट्स का कहना है कि इस नए हवाई अड्डे का इस्तेमाल टर्मिनल-1 के पुनर्विकास के दौरान कुछ परिचालन जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है।कंपनी ने नई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को आकर्षित करने के लिए नवी मुंबई एयरपोर्ट पर लैंडिंग शुल्क में 100 प्रतिशत छूट देने की पेशकश भी की है। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को उपयोगकर्ता विकास शुल्क के अंतर की भरपाई के लिए नकद वाउचर देने की योजना का उल्लेख किया गया है।
पुनर्विकास के बाद बढ़ेगी यात्री क्षमता
पुनर्विकास पूरा होने के बाद टर्मिनल-1 की सालाना क्षमता 1.5 करोड़ से बढ़कर 2 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने की उम्मीद है। कंपनी ने यह भी कहा है कि काम पूरा होने के बाद एयरलाइंस के पुराने स्लॉट बहाल किए जाएंगे और अतिरिक्त स्लॉट उपलब्ध कराने की संभावना होगी।मुंबई जैसे बड़े महानगर में बढ़ते हवाई यातायात को देखते हुए यह परियोजना महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण के दौरान यात्रियों को कितनी कम परेशानी होती है और एयरलाइंस के साथ परिचालन संबंधी मुद्दों का समाधान किस तरह निकाला जाता है। फिलहाल, जनवरी 2027 से शुरू होने वाला पहला चरण मुंबई एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव की शुरुआत होगा।
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