नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। मंगलवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिसकी मुख्य वजह मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बताया जा रहा है। निवेशकों को आशंका है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष से दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक इलाकों से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

तेल बाजार में बढ़ती चिंता के कारण ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

ब्रेंट क्रूड और WTI में तेजी

रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को 0044 GMT पर ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 56 सेंट यानी 0.6 प्रतिशत बढ़कर 91.05 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी तेजी देखी गई। WTI की कीमत 83 सेंट यानी करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 86.59 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी ब्रेंट क्रूड में 2.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी का रुख बना हुआ है।

मध्य पूर्व तनाव का बाजार पर असर

कच्चे तेल के बाजार में मध्य पूर्व की स्थिति का बड़ा प्रभाव पड़ता है। दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देश इसी क्षेत्र में स्थित हैं। ऐसे में किसी भी तरह के सैन्य संघर्ष या राजनीतिक अस्थिरता से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ जाती है।

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। निवेशकों को डर है कि अगर संघर्ष ज्यादा बढ़ता है तो तेल उत्पादन और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

सप्लाई बाधित होने की आशंका

तेल बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तेल आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा कीमतों को तेजी से प्रभावित कर सकती है।

मध्य पूर्व से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात होता है। अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या समुद्री मार्गों पर असर पड़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और बढ़ सकती हैं।

यही वजह है कि व्यापारियों ने भविष्य की संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए खरीदारी बढ़ा दी है।

महंगाई पर पड़ सकता है असर

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल महंगा होने से पेट्रोल, डीजल, परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने की संभावना रहती है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर भी इसका असर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि होने पर घरेलू ईंधन कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, घरेलू ईंधन कीमतों में बदलाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है, जिसमें सरकार की नीतियां, टैक्स और मुद्रा विनिमय दर शामिल हैं।

निवेशकों की नजर मध्य पूर्व पर

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य पूर्व की स्थिति पर बनी हुई है।

बाजार में यह चिंता बनी हुई है कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट पैदा हो सकता है। इसके चलते कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती

तेल की कीमतों में तेजी ऐसे समय में आई है जब कई देश महंगाई और आर्थिक विकास की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

महंगा कच्चा तेल उद्योगों की लागत बढ़ा सकता है और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। खासकर परिवहन, विमानन, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ता है।

आगे कीमतों की दिशा पर निर्भर करेगा घटनाक्रम

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से मध्य पूर्व की घटनाओं पर निर्भर करेगी।

अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है तो बाजार में राहत आ सकती है, लेकिन संघर्ष बढ़ने की स्थिति में तेल की कीमतों में और तेजी की संभावना बनी रहेगी।

फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने वैश्विक बाजार की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम अब तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा कारक बन गया है और आने वाले दिनों में इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।

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