मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को गिरावट का सिलसिला जारी रहा। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई। कारोबार के दौरान बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए।कारोबार की समाप्ति पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत गिरकर 22,600 पर बंद हुआ। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,123.83 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों सूचकांकों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली
शुक्रवार के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला। बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में अधिक गिरावट दर्ज की गई।निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2.21 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.94 प्रतिशत गिर गया। इस गिरावट ने संकेत दिया कि बाजार की कमजोरी केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही।जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि निफ्टी के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आई तेज गिरावट बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से दबाव
शेयर बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी रही।मध्य पूर्व में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से देश का आयात खर्च बढ़ सकता है।इसके अलावा परिवहन और औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ने तथा महंगाई पर दबाव आने की आशंका भी रहती है। इन्हीं चिंताओं के कारण निवेशकों ने शेयर बाजार में सतर्क रुख अपनाया।
वैल्युएशन को लेकर निवेशकों की बढ़ी चिंता
बाजार विशेषज्ञ विनोद नायर के अनुसार, शेयरों का ऊंचा वैल्युएशन, उधार लेकर बनाई गई कारोबारी पोजीशन में कटौती और कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है।उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अधिक कमजोरी दिखाई दे रही है।नायर ने इंडिया वीआईएक्स में बढ़ोतरी को भी चिंता का विषय बताया। इंडिया वीआईएक्स बाजार में अपेक्षित उतार-चढ़ाव का संकेतक है। इसके बढ़ने का मतलब है कि निवेशक आने वाले दिनों में अधिक अस्थिरता की आशंका जता रहे हैं।
मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
शुक्रवार को विभिन्न सेक्टरों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2.71 प्रतिशत गिर गया।टाटा स्टील के शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक और अदाणी पोर्ट्स में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में तेजी भी देखने को मिली।वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित कंपनियों में बढ़ते निवेश खर्च और मुनाफे की चिंताओं ने भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया।
महंगाई और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमतें और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत फैसलों पर निवेशकों की नजर रहेगी।ब्याज दरों में बदलाव की आशंका से वैश्विक पूंजी प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ने की संभावना है।
कंपनियों के नतीजों पर रहेगा निवेशकों का ध्यान
विनोद नायर के अनुसार, आने वाले दिनों में निवेशक व्यापक बाजार की दिशा के बजाय कंपनी और सेक्टर विशेष के प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।कंपनियों की कमाई, वित्तीय स्थिति और शेयरों का वैल्युएशन निवेश संबंधी फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन का सावधानीपूर्वक आकलन करने की सलाह दे रहे हैं।
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