RBI की Repo Rate पर बड़ा अपडेट, राहत या झटका?

Update: 2026-07-28 12:47 GMT

नई दिल्ली। महंगाई के दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा पर बाजार और निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज की रिपोर्ट के अनुसार, RBI अगस्त में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में मुख्य नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में बदलाव नहीं कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती महंगाई के बावजूद केंद्रीय बैंक फिलहाल न्यूट्रल रुख बनाए रख सकता है।

बार्कलेज का मानना है कि हाल के महीनों में विदेशी पूंजी के मजबूत प्रवाह ने रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम किया है। इसके चलते RBI को तत्काल ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की जरूरत नहीं दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेश में सुधार और वित्तीय हालात में स्थिरता ने केंद्रीय बैंक को मौजूदा नीति बनाए रखने की गुंजाइश दी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए RBI द्वारा उठाए गए कदमों के बाद बैंकों ने करीब 32 अरब डॉलर जुटाए हैं। इसमें बड़ी हिस्सेदारी फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट बैंक डिपॉजिट यानी FCNR(B) के माध्यम से आई है। इसके अलावा सरकारी प्रतिभूतियों में भी 7 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। बार्कलेज के अनुसार, इस पूंजी प्रवाह ने रुपये से जुड़े संभावित जोखिमों को काफी हद तक कम किया है।

बार्कलेज ने कहा कि मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच RBI को जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम उठाने की जरूरत नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अल नीनो जैसी मौसमी चुनौतियों के कारण आर्थिक परिदृश्य में कुछ जोखिम बने हुए हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक स्थिति पर नजर रखते हुए न्यूट्रल रुख जारी रख सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में महंगाई में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन इसका असर अभी व्यापक स्तर पर नहीं फैला है। इसलिए तत्काल मौद्रिक सख्ती यानी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम है। बार्कलेज ने RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि महंगाई केंद्रीय बैंक की प्रमुख प्राथमिकता है, लेकिन फिलहाल कीमतों का दबाव नियंत्रित दायरे में है।

आने वाले समय में RBI की नजर कई महत्वपूर्ण कारकों पर रहेगी। इनमें महंगाई का रुख, मानसून की स्थिति, खरीफ फसलों का उत्पादन, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैं। बार्कलेज ने चेतावनी दी है कि अगर अगस्त में बारिश की स्थिति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ तो खरीफ फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी महंगाई के लिए चुनौती बन सकती है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात खर्च बढ़ता है और इसका असर घरेलू बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

बार्कलेज ने यह भी कहा कि पिछले सप्ताह वित्तीय हालात कुछ सख्त हुए हैं और वे जून की मौद्रिक नीति समीक्षा के समय वाले स्तरों के करीब पहुंच गए हैं। हालांकि, विदेशी पूंजी के बेहतर प्रवाह को देखते हुए केंद्रीय बैंक पर तत्काल कदम उठाने का दबाव कम हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेगा। अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है तो भविष्य में नीति में बदलाव की संभावना बन सकती है। लेकिन फिलहाल बार्कलेज की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त की बैठक में रेपो रेट को स्थिर रखने की उम्मीद अधिक है।

रेपो रेट में बदलाव नहीं होने से होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों को फिलहाल राहत मिल सकती है। वहीं, बैंकिंग और निवेश क्षेत्र भी RBI के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाली MPC बैठक में केंद्रीय बैंक का फैसला देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और बाजार की धारणा के लिए अहम माना जा रहा है।

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