नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और एलपीजी आयात में आई बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने देश में रसोई गैस की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पहली बार सरकारी और निजी रिफाइनरी तथा तेल-गैस उत्पादक कंपनियों के लिए अधिकतम एलपीजी उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किए हैं। यह व्यवस्था आपूर्ति संकट के समय लागू की जाएगी, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर की कमी या राशनिंग जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
मंत्रालय ने 13 अगस्त को जारी आदेश में 21 रिफाइनरी और कंपनियों की संयुक्त उत्पादन क्षमता प्रतिदिन अधिकतम 63,810 टन निर्धारित की है। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2025-26 के औसत घरेलू उत्पादन से काफी अधिक और देश की दैनिक खपत का करीब 70 प्रतिशत है। कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा 62,810 टन बताया गया है, लेकिन उपलब्ध आदेश आधारित जानकारी के अनुसार संयुक्त लक्ष्य 63,810 टन प्रतिदिन है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस योजना में सबसे बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी की पुरानी जामनगर रिफाइनरी को जरूरत पड़ने पर प्रतिदिन अधिकतम 18 हजार टन एलपीजी का उत्पादन करना होगा। नायरा एनर्जी के लिए करीब 4,480 टन प्रतिदिन का लक्ष्य तय किए जाने की जानकारी है। ओएनजीसी और गेल सहित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी उत्पादन बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की एलपीजी खपत लगभग 3.32 करोड़ टन रही, जो रोजाना करीब 91 हजार टन के बराबर है। इसमें लगभग 1.31 करोड़ टन एलपीजी का उत्पादन घरेलू स्तर पर हुआ। शेष करीब 2.13 करोड़ टन की पूर्ति आयात से की गई। इस हिसाब से भारत अपनी एलपीजी जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भर है।
भारत के एलपीजी आयात में पश्चिम एशिया की बड़ी हिस्सेदारी रही है। कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से आने वाले जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। क्षेत्रीय तनाव और इस मार्ग में व्यवधान के कारण आयात प्रभावित होने पर घरेलू बाजार में आपूर्ति संकट का खतरा पैदा हुआ। सरकार ने मार्च में कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया था। संकट के चरम समय में घरेलू उत्पादन बढ़ाकर करीब 55 हजार टन प्रतिदिन तक पहुंचाया गया था।
केंद्र सरकार अब अमेरिका और अन्य देशों से एलपीजी आयात बढ़ाकर आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने का प्रयास कर रही है। इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया पर निर्भरता कम करना है। नए उत्पादन लक्ष्यों की हर छह महीने में समीक्षा की जाएगी। नई रिफाइनरी, नए तेल और गैस क्षेत्रों तथा तकनीकी सुधार से मिलने वाली अतिरिक्त क्षमता को भी भविष्य में लक्ष्य में शामिल किया जा सकता है।
आपूर्ति प्रबंधन के तहत सिलेंडर बुकिंग की समय सीमा में भी बदलाव किया गया था। शहरी क्षेत्रों में दो बुकिंग के बीच न्यूनतम 25 दिन और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर रखा गया है। हालांकि सिलेंडर की डिलीवरी का सामान्य समय अलग विषय है और पात्र बुकिंग के बाद आपूर्ति एजेंसी के स्टॉक पर निर्भर करती है।
तेल विपणन कंपनियां ग्राहकों की ई-केवाईसी, मोबाइल नंबर अपडेट और एक ही व्यक्ति या पते पर मौजूद संदिग्ध दोहरे कनेक्शनों की जांच भी कर रही हैं। इसका उद्देश्य सब्सिडी और घरेलू सिलेंडरों का लाभ सही उपभोक्ताओं तक पहुंचाना तथा व्यावसायिक उपयोग में होने वाली गड़बड़ी रोकना है।
सरकार के नए फैसले से संकट के समय घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा सकेगा। हालांकि दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू क्षमता बढ़ाने, आयात के नए स्रोत विकसित करने और वितरण व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बनी रहेगी।