New Delhi नई दिल्ली : निजी क्षेत्र की प्रमुख जनरल इंश्योरेंस कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के शेयरों में गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनी की ओर से वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के कमजोर नतीजे जारी किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई और शेयर में बिकवाली हावी हो गई। शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर करीब 15 प्रतिशत तक गिर गया।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर गुरुवार सुबह आईसीआईसीआई लोम्बार्ड का शेयर 14.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,544 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में शेयर में कुछ सुधार देखने को मिला। दोपहर करीब 12 बजे तक कंपनी का शेयर 11.39 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,607 रुपये प्रति शेयर के आसपास कारोबार कर रहा था।
शेयर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह कंपनी के वित्त वर्ष 2027 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे माने जा रहे हैं। कंपनी ने बाजार की उम्मीदों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है। तिमाही के दौरान कंपनी के मुनाफे में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ।
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने बताया कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 46 प्रतिशत घटकर 403.17 करोड़ रुपये रह गया है। जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 747.08 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी के मुनाफे में आई इस गिरावट ने बाजार को निराश किया।
कंपनी के अनुसार, मुनाफे में गिरावट के पीछे कई कारण रहे हैं। इनमें अधिक क्लेम भुगतान और मोटर थर्ड-पार्टी पोर्टफोलियो के लिए 165 करोड़ रुपये का अतिरिक्त रिजर्व प्रोविजन शामिल है। कंपनी ने कहा कि इन वजहों से तिमाही के वित्तीय प्रदर्शन पर दबाव पड़ा।
इसके अलावा, तिमाही के दौरान कंपनी को आग से जुड़े एक बड़े नुकसान का भी सामना करना पड़ा। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने बताया कि आग की घटना से उसे करीब 63 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस नुकसान का असर कंपनी के कंबाइंड रेश्यो पर भी पड़ा और इसमें करीब एक प्रतिशत अंक का प्रभाव देखने को मिला।
इंश्योरेंस कंपनियों के प्रदर्शन को समझने के लिए कंबाइंड रेश्यो एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसमें क्लेम भुगतान और खर्च की तुलना प्रीमियम आय से की जाती है। रेश्यो बढ़ने का मतलब होता है कि कंपनी पर दावों और खर्चों का दबाव बढ़ रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा क्षेत्र में क्लेम लागत बढ़ने और कुछ बड़े नुकसान की घटनाओं का असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के मामले में भी निवेशकों ने कमजोर आय और बढ़े हुए प्रावधानों को लेकर चिंता जताई है।
हालांकि, कंपनी का कारोबार लंबे समय से मजबूत माना जाता है और बीमा क्षेत्र में इसकी अच्छी स्थिति बनी हुई है। आने वाले समय में कंपनी का प्रदर्शन क्लेम ट्रेंड, प्रीमियम वृद्धि और खर्च नियंत्रण जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।
शेयर बाजार में निवेशक अब कंपनी की आगे की रणनीति और आने वाली तिमाहियों के प्रदर्शन पर नजर रखेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर तिमाही नतीजों के कारण शेयर पर तत्काल दबाव बना रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में कंपनी की विकास क्षमता और बीमा क्षेत्र की मांग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।