Business बिजनेस: नई दिल्ली में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का सोना आयात मई में बढ़कर 34 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3.42 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है जब सरकार और प्रधानमंत्री स्तर पर सोने की खरीदारी कम करने की अपील की गई थी और टैरिफ में भी बढ़ोतरी की गई थी।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में भारत ने कुल 9.04 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ते आयात ने आर्थिक विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सोने के बढ़ते आयात से देश के व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है और विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह (outflow) में भी वृद्धि हो सकती है। इससे आने वाले समय में रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनने की संभावना जताई जा रही है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक Ajay Srivastava ने कहा कि टैरिफ में भारी बढ़ोतरी के बावजूद सोने का लगातार उच्च आयात भारत के व्यापार संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उनके अनुसार, यह स्थिति देश के विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक स्थिरता पर दबाव डाल सकती है।

यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब रुपये की कीमत में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है और विदेशी मुद्रा भंडार भी दबाव में माना जा रहा है। इन आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने उपभोग को नियंत्रित करने के प्रयास तेज किए हैं।

इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 10 मई को देशवासियों से एक साल तक सोने की खरीद से बचने की अपील की थी। यह अपील विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से की गई थी।

हालांकि, इसके बावजूद सोने के आयात में लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि घरेलू और वैश्विक स्तर पर मांग मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि शादी-ब्याह के सीजन और निवेश के रूप में सोने की बढ़ती मांग भी इस वृद्धि का एक प्रमुख कारण हो सकती है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सोने का आयात इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले महीनों में व्यापार घाटा और बढ़ सकता है, जिससे सरकार को आयात नियंत्रण और मौद्रिक नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, सोने के बढ़ते आयात ने एक बार फिर भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति और विदेशी मुद्रा प्रबंधन को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

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