New Delhi नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में चार महीने तक चले युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भारत ने जिस तरह संभावित ईंधन संकट को संभाला, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारत की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पर बड़ा दबाव रहा, लेकिन देश ने समय रहते वैकल्पिक रणनीतियों के जरिए स्थिति को नियंत्रण में रखा।रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद ईरान ने 28 फरवरी को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और एलपीजी की सप्लाई पर बड़ा असर देखने को मिला और कीमतों में अस्थिरता बढ़ गई।
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इस स्थिति से सीधे प्रभावित हो सकता था। देश अपनी लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत और करीब 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से भारत के सामने गंभीर ऊर्जा संकट पैदा होने की आशंका थी।हालांकि, भारत ने इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में अपनी रणनीतिक भंडारण क्षमता, वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों और वैश्विक साझेदारियों के जरिए स्थिति को संतुलित बनाए रखा। सरकार और तेल कंपनियों ने समय रहते सप्लाई चेन को मजबूत किया, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की कमी नहीं होने पाई।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे संकट के दौरान भारत की ऊर्जा नीति की लचीलापन और त्वरित प्रतिक्रिया ने देश को बड़े आर्थिक झटके से बचाया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के बावजूद घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सामान्य बनी रही।इस दौरान भारत ने विभिन्न देशों से तेल आपूर्ति बढ़ाने, रणनीतिक भंडार का उपयोग करने और लॉजिस्टिक व्यवस्था को बेहतर करने जैसे कदम उठाए। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि आम जनता पर इस वैश्विक संकट का सीधा असर न पड़े।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना भारत के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ने का संकेत है। आने वाले समय में नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू उत्पादन पर फोकस बढ़ाकर इस तरह के जोखिमों को और कम किया जा सकता है।कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर मजबूत प्रबंधन दिखाते हुए संभावित ईंधन संकट को टाल दिया, जो वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।