मुंबई: शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में कमी और US-Iran के बीच चरणबद्ध समझौते की खबरों से भारतीय शेयर बाजार में अच्छी बढ़त देखी गई। कारोबार बंद होने पर सेंसेक्स 315 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 73,895 पर बंद हुआ। निफ्टी 77 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 23,140 पर बंद हुआ।
निफ्टी बैंक 0.26 प्रतिशत या 389 अंक बढ़कर 55,762 पर बंद हुआ।
गुरुवार को आई भारी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में संभली हुई रिकवरी दिखी, क्योंकि US-Iran के बीच चरणबद्ध समझौते की दिशा में प्रगति की खबरों से बाजार का मूड बेहतर हुआ।
दिन के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर $105.6 प्रति बैरल के करीब आ गई, जबकि पिछले दो सत्रों में इसमें 7 प्रतिशत से अधिक की बढ़त हुई थी। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $94 से नीचे कारोबार कर रहा था। ऐसा मिडिल ईस्ट से सप्लाई बहाल होने की उम्मीदों के कारण हुआ, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस पर बातचीत होने की खबरें थीं।
5 प्रतिशत से ऊपर US ट्रेजरी यील्ड और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के साथ-साथ ग्लोबल मैक्रो रिस्क बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं।
ब्रॉडर मार्केट में बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले अलग ट्रेंड दिखा; निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.23 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि NSE स्मॉलकैप 100 में 0.17 प्रतिशत की बढ़त हुई। निफ्टी नेक्स्ट 50 में 0.39 प्रतिशत की बढ़त हुई।
NSE पर IT, मीडिया, फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स को छोड़कर सभी सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी इंडेक्स में क्रमशः 0.76 प्रतिशत, 0.87 प्रतिशत और 0.70 प्रतिशत की बढ़त हुई।
इस हफ्ते रुपया उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार करता रहा; यह 95.57–95.97 की रेंज में रहा और अंत में 95.85 के आसपास लगभग सपाट बंद हुआ। कच्चे तेल और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर में मजबूती के कारण रुपये की बढ़त बनाए रखने की क्षमता सीमित रही।
जानकारों का कहना है कि यह रिकवरी रिस्क लेने की क्षमता में व्यापक सुधार के बजाय चुनिंदा 'वैल्यू बाइंग' (सस्ते शेयर खरीदने) के कारण हुई। लार्ज-कैप और कमज़ोर मिड-कैप व स्मॉल-कैप शेयरों के बीच अंतर से यह भी पता चलता है कि निवेशक सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं।
बाज़ार के जानकारों का अनुमान है कि बाज़ार में आई तेज़ी का बने रहना कच्चे तेल की कीमतों के स्थिर होने, ग्लोबल यील्ड के कम होने और विदेशी निवेशकों की तरफ़ से बिकवाली का दबाव घटने पर निर्भर करता है।