नई दिल्ली। सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में बेसिक पे और महंगाई भत्ते के साथ हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA भी महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। खासकर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए HRA की रकम उनकी पोस्टिंग वाले शहर की कैटेगरी और बेसिक पे के आधार पर तय होती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि HRA किस आधार पर मिलता है और मौजूदा व्यवस्था में X, Y और Z कैटेगरी के शहरों के लिए इसकी दर क्या है।वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के नियमों के अनुसार, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए शहरों को HRA के उद्देश्य से X, Y और Z तीन श्रेणियों में बांटा गया है। X श्रेणी में 50 लाख या उससे अधिक आबादी वाले शहर, Y श्रेणी में 5 लाख से 50 लाख तक आबादी वाले शहर और Z श्रेणी में 5 लाख से कम आबादी वाले शहर आते हैं।
अभी कितना मिलता है HRA?
सातवें वेतन आयोग के तहत शुरुआत में X, Y और Z कैटेगरी के शहरों के लिए HRA की दर क्रमशः बेसिक पे का 24 प्रतिशत, 16 प्रतिशत और 8 प्रतिशत रखी गई थी। इसके साथ ही नियम बनाया गया था कि महंगाई भत्ता यानी DA 25 प्रतिशत के स्तर को पार करने पर HRA की दर बढ़कर 27 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 9 प्रतिशत हो जाएगी।इसी व्यवस्था में आगे प्रावधान किया गया कि DA के 50 प्रतिशत को पार करने पर HRA की दर X, Y और Z श्रेणी के लिए क्रमशः 30 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत हो जाएगी। यानी HRA की दर सिर्फ शहर की कैटेगरी से नहीं, बल्कि DA के तय स्तर से भी जुड़ी हुई है।
बेसिक सैलरी पर होती है HRA की गणना
HRA को समझने का सबसे जरूरी नियम यह है कि इसकी गणना कर्मचारी की बेसिक पे के आधार पर होती है। HRA निकालने के लिए बेसिक पे में DA जोड़कर उस कुल रकम पर प्रतिशत नहीं लगाया जाता। वित्त मंत्रालय के नियमों में HRA के लिए 'पे' का अर्थ सातवें वेतन आयोग के पे मैट्रिक्स में कर्मचारी द्वारा प्राप्त वेतन से है। अन्य प्रकार के विशेष वेतन आदि इसमें शामिल नहीं किए जाते।उदाहरण के लिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे 50,000 रुपये है और उसकी पोस्टिंग X कैटेगरी वाले शहर में है। 30 प्रतिशत HRA की दर से उसे 15,000 रुपये प्रतिमाह HRA मिलेगा।अगर इसी बेसिक पे वाला कर्मचारी Y कैटेगरी के शहर में तैनात है तो 20 प्रतिशत की दर से HRA 10,000 रुपये होगा। वहीं Z कैटेगरी में 10 प्रतिशत की दर से उसे 5,000 रुपये HRA मिलेगा।इस तरह एक जैसी बेसिक सैलरी होने के बावजूद पोस्टिंग की जगह बदलने से कर्मचारियों को मिलने वाले HRA में बड़ा अंतर हो सकता है।
रहने की जगह नहीं, पोस्टिंग की जगह है अहम
HRA से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम कर्मचारी के रहने के स्थान से संबंधित है। वित्त मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार HRA की पात्रता कर्मचारी के 'प्लेस ऑफ ड्यूटी' यानी कार्यस्थल के संदर्भ में निर्धारित होती है। कर्मचारी उसी जगह रह रहा है या किसी दूसरी जगह से कार्यालय आ रहा है, केवल इसी आधार पर HRA की कैटेगरी तय नहीं होती।यानी अगर किसी कर्मचारी की पोस्टिंग HRA नियमों के तहत X कैटेगरी के शहर में है लेकिन वह आसपास के किसी दूसरे इलाके में रहता है, तो HRA के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार उसके कार्यस्थल की श्रेणी महत्वपूर्ण होगी।इसके अलावा कुछ ऐसे क्षेत्र भी हो सकते हैं जो किसी पात्र शहर की नगरपालिका सीमा से बाहर हैं। नियमों में कुछ शर्तों के तहत शहर की सीमा से 8 किलोमीटर तक स्थित केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के लिए भी उस शहर की HRA दर की व्यवस्था का प्रावधान है। इसके लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के प्रमाणपत्र जैसी शर्तें लागू होती हैं।
सरकारी आवास मिलने पर क्या होगा?
HRA का मूल उद्देश्य ऐसे कर्मचारियों को आवास खर्च में सहायता देना है जिन्हें सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए सरकारी आवास से जुड़े मामलों में HRA की पात्रता सामान्य परिस्थितियों से अलग हो सकती है। कर्मचारियों को सरकारी आवास के आवंटन, कब्जे या उससे संबंधित विभागीय नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है।वित्त मंत्रालय ने HRA से संबंधित विभिन्न निर्देशों को एक साथ लाने के लिए दिसंबर 2022 में विस्तृत कम्पेंडियम भी जारी किया था, जिसमें HRA की पात्रता, शहरों की श्रेणी, अलग-अलग परिस्थितियों में HRA के नियमन और आवश्यक प्रमाणपत्रों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
HRA और इनकम टैक्स वाला नियम अलग
कर्मचारियों को यह भी समझना चाहिए कि नौकरी में मिलने वाला HRA और इनकम टैक्स में HRA पर मिलने वाली छूट दो अलग विषय हैं। आयकर नियमों में HRA छूट की गणना के लिए अलग फॉर्मूला लागू होता है। इसमें वास्तविक HRA, किराए और सैलरी सहित निर्धारित शर्तों के आधार पर छूट तय होती है।इसलिए सैलरी स्लिप में HRA के रूप में दिखाई देने वाली पूरी रकम अपने आप टैक्स फ्री नहीं मानी जानी चाहिए। टैक्स छूट की पात्रता संबंधित आयकर नियमों के अनुसार अलग से तय होती है।
कर्मचारियों के लिए क्यों जरूरी है यह नियम जानना?
HRA हर महीने मिलने वाली सैलरी का अहम हिस्सा हो सकता है। बेसिक पे बढ़ने, पोस्टिंग बदलने या शहर की कैटेगरी बदलने से HRA की रकम पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि कर्मचारी को अपनी सैलरी स्लिप में बेसिक पे और HRA की राशि की जानकारी रखनी चाहिए।केंद्रीय कर्मचारियों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि HRA की गणना बेसिक पे और पोस्टिंग वाले शहर की निर्धारित X, Y या Z कैटेगरी के अनुसार की जाती है। DA के 50 प्रतिशत के स्तर को पार करने के बाद लागू व्यवस्था के अनुसार इन श्रेणियों के लिए दरें क्रमशः 30 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत हैं।इसलिए सरकारी कर्मचारी अपनी बेसिक पे और पोस्टिंग वाले शहर की कैटेगरी देखकर आसानी से यह समझ सकते हैं कि उनके लिए HRA की गणना किस दर से की जा रही है।
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