BSE के नए ऑक्शन सिस्टम का असर Sensex में दिखी भारी वोलैटिलिटी
बाजार में हलचल क्लोजिंग सेशन में बदले हालात
डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। BSE के नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान सेंसेक्स में कुछ ही मिनटों में 2,200 अंकों से ज्यादा की गिरावट और फिर तेज रिकवरी दर्ज की गई। इस असामान्य हलचल ने बाजार के खिलाड़ियों और ट्रेडर्स का ध्यान खींच लिया।
कुछ मिनटों में बदला बाजार का रुख
रिपोर्ट के मुताबिक, क्लोजिंग ऑक्शन विंडो के दौरान सेंसेक्स करीब 77,200 के स्तर से गिरकर लगभग 74,983 तक पहुंच गया, यानी कुछ ही मिनटों में 2,000 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखने को मिली। इसके बाद इंडेक्स ने तेजी से वापसी की और करीब 2,000 अंकों की रिकवरी दर्ज की।
आखिर में सेंसेक्स करीब 76,934 अंक पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर से लगभग 539 अंक नीचे था।
क्या है क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS)?
BSE और अन्य बाजारों में क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके में बदलाव के तहत Closing Auction Session शुरू किया गया है। इसमें अंतिम कीमत तय करने के लिए खरीद और बिक्री के ऑर्डर को एक ऑक्शन प्रक्रिया में मिलाया जाता है, जिससे अधिकतम मात्रा में सौदे पूरे हो सकें।
इसका उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस को ज्यादा पारदर्शी बनाना है, लेकिन एक्सपायरी जैसे संवेदनशील दिनों में कम लिक्विडिटी के कारण अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
कई बड़े शेयरों में भी दिखी हलचल
सेंसेक्स की इस तेज चाल का असर इंडेक्स के बड़े शेयरों पर भी पड़ा। रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, ITC और भारती एयरटेल जैसे दिग्गज शेयरों में भी क्लोजिंग समय के आसपास तेज मूवमेंट देखने को मिला।
ट्रेडर्स में बढ़ी चिंता
इस अचानक बदलाव के बाद ट्रेडर्स ने नए क्लोजिंग सिस्टम की स्थिरता और एक्सपायरी डे पर इसके असर को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दौर में नए सिस्टम में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हो सकता है।
वहीं, बाजार नियामक सेबी की ओर से कहा गया है कि फिलहाल क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में बदलाव की कोई योजना नहीं है।
निवेशकों के लिए क्या सीख?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सपायरी डे पर ट्रेडिंग करते समय ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। अचानक आने वाली तेज चाल से बड़े मुनाफे के साथ बड़ा नुकसान भी हो सकता है।
निवेशकों को बिना जोखिम प्रबंधन के बड़े दांव लगाने से बचना चाहिए और बाजार की नई व्यवस्था को समझकर ही ट्रेडिंग करनी चाहिए।