बिजनेस : देशभर में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया तेजी से पूरी हो रही है और बड़ी संख्या में करदाताओं को रिफंड भी मिल चुका है। कई मामलों में रिटर्न दाखिल करने के 24 घंटे के भीतर ही रिफंड जारी कर दिया गया, जबकि कुछ करदाता ऐसे भी हैं जिनके खाते में अब तक रिफंड नहीं पहुंचा है। ऐसे लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर रिफंड किस कारण से अटक सकता है और इसे प्राप्त करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 4 अगस्त तक 6 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे। इनमें से 5.65 करोड़ से ज्यादा रिटर्न का सत्यापन (वेरिफिकेशन) पूरा हो चुका था, जबकि 3.63 करोड़ से अधिक रिटर्न प्रोसेस भी किए जा चुके थे। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में करदाताओं को रिफंड जारी किया जा चुका है, लेकिन जिन लोगों का रिफंड अब तक नहीं आया है, उन्हें सबसे पहले अपनी रिटर्न और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी की जांच करनी चाहिए।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर रिफंड में देरी या विफलता के पीछे कई तकनीकी और दस्तावेजी कारण हो सकते हैं। सबसे सामान्य कारण गलत बैंक खाता संख्या दर्ज होना है। यदि रिटर्न में दिया गया बैंक अकाउंट नंबर गलत है या बैंक खाते का आईएफएससी कोड गलत दर्ज किया गया है, तो रिफंड ट्रांसफर नहीं हो पाता। इसी तरह यदि बैंक खाते का नाम पैन कार्ड में दर्ज नाम से मेल नहीं खाता, तब भी भुगतान अटक सकता है।
इसके अलावा कई बार करदाता अपने बैंक खाते का पूर्व-सत्यापन (प्री-वैलिडेशन) नहीं कराते, जबकि आयकर विभाग की ओर से रिफंड जारी करने के लिए यह एक आवश्यक प्रक्रिया है। यदि बैंक खाता बंद हो चुका हो, निष्क्रिय हो, फ्रीज हो गया हो या किसी अन्य कारण से सक्रिय न हो, तब भी रिफंड सफलतापूर्वक जमा नहीं हो पाता।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि किसी करदाता का पैन निष्क्रिय है या आधार से लिंक नहीं है, तो भी रिफंड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा यदि आयकर विभाग को रिटर्न, टीडीएस विवरण या आय संबंधी जानकारी में किसी प्रकार का अंतर दिखाई देता है, तो विभाग अतिरिक्त जांच करता है। ऐसी स्थिति में रिफंड जारी होने में अधिक समय लग सकता है।
कुछ मामलों में आयकर विभाग पिछले वर्षों की बकाया टैक्स डिमांड के विरुद्ध भी रिफंड का समायोजन कर देता है। यदि किसी करदाता पर पुराने कर का बकाया है, तो रिफंड की राशि सीधे उस बकाया में समायोजित की जा सकती है। ऐसे मामलों में करदाता को इसकी जानकारी ई-फाइलिंग पोर्टल या ईमेल के माध्यम से दी जाती है।
हालांकि कई करदाताओं को रिटर्न प्रोसेस होने के 24 घंटे के भीतर ही रिफंड मिल जाता है, लेकिन सभी मामलों में ऐसा नहीं होता। सामान्यतः रिटर्न प्रोसेस होने के बाद रिफंड खाते में आने में चार से पांच सप्ताह तक का समय लग सकता है। यदि इस अवधि के बाद भी रिफंड प्राप्त नहीं होता है, तो करदाता को आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर रिफंड की स्थिति जांचनी चाहिए। साथ ही विभाग की ओर से भेजे गए ईमेल और एसएमएस संदेशों पर भी नजर रखनी चाहिए।
रिफंड प्राप्त करने के लिए कुछ आवश्यक शर्तों का पूरा होना भी अनिवार्य है। करदाता का पैन आधार से लिंक होना चाहिए, ई-फाइलिंग पोर्टल पर पंजीकरण सक्रिय होना चाहिए और रिटर्न सही तरीके से दाखिल किया गया होना चाहिए। इसके अलावा जिस बैंक खाते में रिफंड प्राप्त करना है, उसका पूर्व-सत्यापन भी आवश्यक है।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आयकर विभाग की ओर से कोई नोटिस या सूचना प्राप्त होती है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार रिटर्न में किसी विसंगति के कारण विभाग स्पष्टीकरण मांगता है। समय पर जवाब नहीं देने पर रिफंड में और देरी हो सकती है या राशि समायोजित भी की जा सकती है। इसलिए ई-फाइलिंग पोर्टल और पंजीकृत ईमेल की नियमित जांच करना बेहद जरूरी है।
साथ ही करदाताओं को साइबर ठगी से भी सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। रिफंड या टैक्स नोटिस के नाम पर आने वाले संदिग्ध ईमेल, एसएमएस या लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए। आयकर विभाग की सभी आधिकारिक सूचनाएं केवल अधिकृत माध्यमों से ही स्वीकार करनी चाहिए। सही जानकारी, दस्तावेजों का मिलान और समय पर आवश्यक कार्रवाई करने से आयकर रिफंड बिना किसी परेशानी के प्राप्त किया जा सकता है।