सरकार पीएलआई का आठ और क्षेत्रों में जल्द करेगी विस्तार

Update: 2022-10-14 13:24 GMT

दिल्ली: उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना () की सफलता को देखते हुए सरकार सात से आठ और क्षेत्रों में इसका विस्तार करने की तैयारी कर रही है। इसमें खिलानौ और फर्नीचर समेत कई नई श्रेणी को शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए यह मददगार साबित हो सकती है।

500 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार: इससे पहले सरकार पीएलआई के तहत 14 ऐसी योजनाओं का ऐलान कर चुकी है, जिनको उद्योग से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। इससे अनुमान है कि पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार होगा। सरकार ने मार्च 2020 में पहले दौर में मोबाइल और निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक घटकों, दवा और चिकित्सा उपकरणों के लिए तीन पीएलआई योजनाओं को मंजूरी दी थी। इन तीन कार्यक्रमों के लिए कुल प्रारंभिक परिव्यय पांच वर्षों में 51,311 करोड़ रुपये था। दूसरे दौर में, नवंबर 2020 में कैबिनेट द्वारा 11 अन्य योजनाओं को मंजूरी दी गई, जिसमें पांच साल की अवधि में कुल प्रारंभिक आवंटन 1.46 लाख करोड़ रुपये था। इसमें इलेक्ट्रॉनिक / प्रौद्योगिकी उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पाद, खाद्य उत्पाद, सफेद सामान, सौर मॉड्यूल, ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक, उन्नत रसायन सेल बैटरी, कपड़ा, विशेषता स्टील और ड्रोन शामिल थे। हालांकि, बाद में पुनर्मूल्यांकन प्राथमिकताओं के आधार पर क्षेत्रवार आवंटन में बदलाव किया गया, जिससे कुछ बचत हुई। वाहन क्षेत्र के लिए परिव्यय को ₹57,042 करोड़ से घटाकर ₹25,938 करोड़ कर दिया गया। तकनीकी और मानव निर्मित फाइबर-आधारित वस्त्रों के लिए, संशोधित परिव्यय ₹6,013 करोड़ था, जो पहले ₹10,683 करोड़ था; इसने इस श्रम प्रधान क्षेत्र के लिए एक और पीएलआई योजना के लिए गुंजाइश पैदा की।

इन क्षेत्रों पर होगा जोर: सूत्रों ने कहा कि नई पीएलआई योजनाओं में कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फर्नीचर, खिलौने और चमड़े सहित अन्य खंड शामिल होंगे। सरकार इसमें 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रोत्साहन दे सकती है। मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि सरकार पहले की पीएलआई योजनाओं से बचत का उपयोग करने के अलावा, नई योजनाओं के लिए नए बजटीय आवंटन करने की योजना भी बना रही है।

रोजगार और वृद्धि पर ध्यान: विनिर्माण क्षेत्र में सीधे तौर पर सबसे अधिक रोजगार मिला हुआ है। जबकि देश की जीडीपी में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी अभी 17 फीसदी के करीब है। सरकार का लक्ष्य जीडीपी में इस क्षेत्र का योगदान बढ़ाकर 25 फीसदी ले जाने का है। सरकार का मानना है कि पीएलआई स्कीम का दायरा बढ़ाने रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ आर्थिक वृद्धि को भी रफ्तार मिलेगी।

महंगाई के दौर में जोखिम उठाएगी सरकार: योजनाएं ऐसे समय में शुरू की जाएंगी जब भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बाहरी बाधाओं का सामना कर रही है जिसमें मुख्य रूप से यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक मंदी है। इसके अलावा बढ़ती महंगाई भी चुनौती बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक सरकार का मानना है कि महंगाई से सरकार के बजट पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि पीएलआई योजनाएं मांग-पक्ष प्रोत्साहन उपाय नहीं हैं, इसलिए जब मुद्रास्फीति पहले से ही बढ़ जाती है, तो कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना कम हो जाती है।

Tags:    

Similar News

-->