सरकार को किस्त के तौर पर मिली कोल इंडिया से 3,668 करोड़ रुपये डिविडेंड, दूसरे PSU से हुई बंपर कमाई

विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य

Update: 2021-12-25 12:42 GMT
सरकार को कोल इंडिया से 3,668 करोड़ रुपये डिविडेंड किस्त के तौर पर मिली है. इससे वित्त वर्ष 2022 में अब तक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम से मिली कुल डिविडेंड की राशि 33,479 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है. उसे टेलीकॉम्यूनिकेशंस इंडिया लिमिटेड, IRCON, RITES और NIIFL से डिविडेंड की किस्तों के तौर पर 21 करोड़ रुपये, 48 करोड़ रुपये, 69 करोड़ रुपये और 23 करोड़ रुपये की राशि मिली है.
डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सचिव तुहिन कांता पांडे ने शुक्रवार शाम को ट्विटर के पोस्ट में कहा कि सरकार को टेलीकॉम्यूनिकेशंस इंडिया लिमिटेड से डिविडेंड की किस्तों के तौर पर 21 करोड़ रुपये और कोल इंडिया लिमिटेड से 3668 करोड़ रुपये मिले हैं. उन्होंने आगे कहा कि सरकार को IRCON, RITES और NIIFL से डिविडेंड की किस्तों के तौर पर करीब 48 करोड़, 69 करोड़ रुपये और 23 करोड़ रुपये की राशि मिली है.
विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य
सरकार को अब तक विनिवेश और डिविडेंड से कुल 42,809.48 करोड़ रुपये की राशि मिली है. इसमें से केवल 9,329.9 करोड़ रुपये रणनीतिक और गैर-रणनीतिक सेल के विनिवेश से मिले हैं. इसके साथ OFS और NMDC के एंप्लॉय OFS रूट , Hudco और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के विनिवेश से यह राशि मिली है.
सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष 2022 में विनिवेश से मिली राशि से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. उसे उम्मीद है कि पीएसयू जैसे BPCL, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, BEML और पवन हंस के रणनीतिक विनिवेश से ज्यादा राशि मिलेगी.
भारत सरकार ने हाल ही में FSNL (फैरो स्क्रैप निगम लिमिटेड) में विनिवेश की तैयारी में प्रक्रिया तेज कर दी है. बताते चलें कि FSNL में MSTC की 100 फीसदी हिस्सेदारी है. सरकार ने बाकायदा कंपनी की वैल्यू का सही आकलन लगाने के लिए Asset Valuer के नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.
क्या होता है विनिवेश?
निवेश का उलटा विनिवेश होता है. अगर आसान शब्दों में कहें तो निवेश यानी किसी बिजनेस में, किसी संस्था में, किसी परियोजना में रकम लगाना. वहीं, विनिवेश का मतलब होता है कि उस रकम को वापस निकालना.
सरकार ने निवेश कर कई कंपनियों के शेयर खरीदें हुए है. या यूं कहें की कंपनियों को शुरू किया है. सरकार कई कंपनियों की मालिक है.
वहीं, अब विनिवेश प्रक्रिया के जरिए सरकार अपने शेयर किसी दूसरे को बेचकर उससे बाहर निकल रही है. सरकार ऐसा कर जो रकम जुटाती है उसे अन्य योजनाओं पर खर्च करती है.
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