सोने की चमक फीकी, कीमतों में क्यों आई गिरावट

Update: 2026-07-17 09:25 GMT

नई दिल्ली। इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाले सोने और चांदी के दामों में अब बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। बुलियन मार्केट में आई इस कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। सोने की कीमतें जहां एक समय लगातार नए रिकॉर्ड बना रही थीं, वहीं अब इसमें भारी करेक्शन देखने को मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाएं प्रमुख कारण हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में दबाव देखने को मिला है। कॉमेक्स बाजार में सोना करीब 3998 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। भारतीय मुद्रा के हिसाब से इसकी कीमत लगभग 1.24 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम बैठती है। वहीं चांदी करीब 55.695 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची, जिसकी भारतीय कीमत लगभग 1.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनती है।

हालांकि घरेलू वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर तस्वीर थोड़ी अलग रही। यहां अगस्त डिलीवरी वाला सोना 302 रुपये की तेजी के साथ करीब 1,40,650 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंचा। वहीं चांदी में हल्की गिरावट दर्ज की गई और कीमत करीब 2,15,885 रुपये प्रति किलोग्राम रही।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट अचानक नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे कई अंतरराष्ट्रीय घटनाएं जिम्मेदार हैं। RMoney की रिसर्च मैनेजर मौमिता सामंत के अनुसार, मौजूदा गिरावट के तीन बड़े कारण हैं।

पहला कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव है। आमतौर पर युद्ध या वैश्विक अस्थिरता के समय सोना सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत होता है, लेकिन इस बार बाजार की प्रतिक्रिया अलग रही है। निवेशकों ने युद्ध की स्थिति के साथ-साथ आर्थिक प्रभावों को ज्यादा महत्व दिया है, जिसके चलते सोने में दबाव देखने को मिला।

दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हुई। महंगाई बढ़ने की स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकते हैं, जिससे सोने जैसे गैर-ब्याज वाले निवेश की मांग प्रभावित होती है।

तीसरा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति है। बाजार में आशंका है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। ऊंची ब्याज दरों से डॉलर मजबूत होता है और इसका असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ता है।

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अंतर को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों बाजारों की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना और चांदी आयात करता है। घरेलू बाजार में कीमत तय होने के दौरान कस्टम ड्यूटी, जीएसटी, ट्रांसपोर्ट खर्च, इंश्योरेंस और बैंकिंग शुल्क भी शामिल होते हैं। इसके अलावा रुपये की कमजोरी का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ता है।

आने वाले समय को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने और चांदी में नकारात्मक रुझान बना रह सकता है। बाजार की नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक पर टिकी हुई हैं। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव को लेकर आने वाले घटनाक्रम भी कीमतों की दिशा तय करेंगे।

ट्रेडिंग के लिहाज से सोने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4000 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर सोना इस स्तर को बनाए रखता है तो इसमें दोबारा तेजी आ सकती है। वहीं इसके नीचे जाने पर कीमतों में और गिरावट की संभावना है। घरेलू बाजार में 1,40,500 रुपये का स्तर अहम माना जा रहा है।

चांदी के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण स्तर बताए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 55 डॉलर का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो चांदी में और गिरावट आ सकती है। वहीं घरेलू बाजार में 2,19,000 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी में लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार की चाल पर नजर रखते हुए सावधानी से फैसला लेना चाहिए। मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक घटनाएं इन कीमती धातुओं की कीमतों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही हैं।

Tags:    

Similar News