Business,व्यापार : भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज और अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी ने हाल ही में एक ऐसे गीत का ज़िक्र किया, जो हर भारतीय के दिल के बेहद करीब है — “किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार...”। लेकिन अडाणी ने इसे केवल एक पुराना गाना नहीं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा और जीवन-दर्शन (फिलॉसफी) बताया है।
एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, "यह गीत हमें सिखाता है कि असली सफलता क्या होती है — दूसरों के जीवन में खुशियाँ लाने की क्षमता।" गौतम अडाणी के इस विचार ने सोशल मीडिया से लेकर कॉर्पोरेट जगत तक में नई सोच को जन्म दिया है।
क्या कहा गौतम अडाणी ने?
गौतम अडाणी ने कहा कि वर्तमान समय में जब युवा सिर्फ सफलता, पैसा और सोशल मीडिया फॉलोअर्स को ही तरक्की का पैमाना मानने लगे हैं, तब ऐसे गीत और विचार उन्हें सही दिशा दे सकते हैं।
उन्होंने कहा:
"‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार’... ये पंक्तियाँ बताती हैं कि जीवन में असली संतोष तब मिलता है जब हम दूसरों के लिए कुछ करते हैं।"
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे करियर और पैसा कमाने के साथ-साथ समाज के लिए योगदान देना न भूलें।
गीत से जुड़ी प्रेरणा
यह गीत 1959 में आई फिल्म अनाड़ी का है, जिसे गाया था मुकेश ने और संगीत दिया था शंकर-जयकिशन ने। गीत के बोल शैलेन्द्र द्वारा लिखे गए थे। यह गाना दशकों से भारतीयों को सादगी, सेवा और संवेदना का संदेश देता आ रहा है।
गौतम अडाणी ने इस गीत का उल्लेख कर यह साबित किया कि पुराने मूल्यों में आज भी बहुत ताकत है। उन्होंने कहा कि ये पंक्तियाँ सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन की गहराई को समझाने का एक माध्यम हैं।
युवाओं को मिला नया दृष्टिकोण
गौतम अडाणी के इस विचार को सोशल मीडिया पर काफी सराहना मिल रही है। कई युवाओं ने ट्वीट कर लिखा कि यह सोच उन्हें जीवन के बारे में एक नया नजरिया देती है। एक यूजर ने लिखा, "गौतम अडाणी जैसे व्यक्ति जब भावना और सेवा की बात करते हैं, तो समझ आता है कि असली लीडरशिप क्या होती है।"
कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स से लेकर स्टार्टअप फाउंडर्स तक, कई लोग इस विचार से जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।
सफलता की नई परिभाषा
अडाणी ने इस अवसर पर यह भी बताया कि अब सफलता सिर्फ नेट वर्थ या पद से नहीं, बल्कि समाज को देने की भावना से तय होगी। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि युवा पीढ़ी में सहानुभूति, नैतिकता और सेवा की भावना भी उतनी ही मजबूत हो जितनी करियर बनाने की इच्छा।
क्यों जरूरी है यह संदेश?
आज के समय में, जब मानसिक स्वास्थ्य, प्रतिस्पर्धा और असुरक्षा जैसे मुद्दे युवाओं को घेरे हुए हैं, अडाणी का यह संदेश एक सकारात्मक हवा की तरह है। "किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार..." जैसी भावनाएं यह सिखाती हैं कि जीवन सिर्फ स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए जीने का नाम है।
गौतम अडाणी द्वारा 'किसी की मुस्कुराहटों...' को एक जीवन-दर्शन बताना दिखाता है कि भारत के सबसे सफल उद्योगपतियों में से एक, केवल व्यापार की भाषा ही नहीं, बल्कि संवेदना और इंसानियत की भाषा भी जानते हैं।
यह संदेश आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है — कि जीवन की असली सफलता दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाने में है।
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