नई दिल्ली। खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और लेबल पर किए जाने वाले दावों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। खाद्य नियामक ने अनार के जूस के लेबल पर कथित भ्रामक दावे के मामले में स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ ‘न्यायनिर्णय’ की कार्यवाही को मंजूरी दी है। प्राधिकरण के अनुसार, कंपनी के स्टोरिया जूस (अनार) में चार प्रतिशत अनार का गाढ़ा रस और 12 प्रतिशत सेब का गाढ़ा रस मौजूद है। ऐसे में उत्पाद के नाम और पैकेजिंग पर इस्तेमाल की गई तस्वीर से उपभोक्ताओं को उसकी वास्तविक संरचना के बारे में गलत धारणा हो सकती है।
FSSAI ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से इस मामले की जानकारी दी। यह मामला खाद्य उत्पादों पर सही जानकारी देने और उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय भ्रम से बचाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, कंपनी के खिलाफ न्यायनिर्णय की कार्यवाही को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उस पर अंतिम रूप से दोष साबित हो गया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
क्या है स्टोरिया के अनार जूस से जुड़ा विवाद?
FSSAI की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, स्टोरिया जूस (अनार) में अनार के गाढ़े रस की मात्रा चार प्रतिशत है, जबकि सेब के गाढ़े रस की मात्रा 12 प्रतिशत बताई गई है। नियामक की चिंता उत्पाद के नाम और उसकी तस्वीर से जुड़ी है। उसके अनुसार, पैकेजिंग पर अनार का नाम और तस्वीर देखकर उपभोक्ता उत्पाद की वास्तविक सामग्री को लेकर गलत धारणा बना सकते हैं।
खाद्य उत्पादों के नाम और लेबल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह समझने में मदद करना है कि वे क्या खरीद रहे हैं। यदि किसी पेय के नाम या तस्वीर से उसकी सामग्री के बारे में ऐसी उम्मीद पैदा होती है, जो वास्तविक संरचना से मेल नहीं खाती, तो लेबलिंग की स्पष्टता पर सवाल उठ सकते हैं।
इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए FSSAI ने कंपनी के खिलाफ न्यायनिर्णय की कार्यवाही को मंजूरी दी है। इस प्रक्रिया में मामले से जुड़े तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर आगे विचार किया जाएगा।
क्या होती है न्यायनिर्णय की कार्यवाही?
खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन के मामलों में संबंधित नियामक कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर सकता है। न्यायनिर्णय की कार्यवाही के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित पक्ष के जवाब और लागू प्रावधानों पर विचार किया जाता है। इसके बाद यह तय किया जा सकता है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और कानून के अनुसार आगे क्या कदम उठाया जाना चाहिए।
इसलिए किसी कंपनी के खिलाफ ऐसी कार्यवाही शुरू करने या उसे मंजूरी देने और अंतिम दंडात्मक आदेश जारी होने के बीच अंतर होता है। स्टोरिया फूड्स के मामले में भी अंतिम नतीजा जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में कंपनी के जवाब या मामले के अंतिम फैसले का विवरण शामिल नहीं है। ऐसे में इस कार्रवाई को नियामक की ओर से उठाए गए कदम के रूप में देखना उचित होगा, न कि अंतिम दोषसिद्धि के रूप में।
खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग क्यों है अहम?
आज बाजार में फलों के जूस, फ्रूट ड्रिंक और कई तरह के पैकेज्ड पेय उपलब्ध हैं। इन उत्पादों के नाम और पैकेजिंग पर अक्सर संबंधित फलों की तस्वीरें दिखाई जाती हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों का ध्यान आकर्षित करना और उत्पाद की पहचान बताना होता है। लेकिन किसी फल की तस्वीर देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि पेय में उसी फल का रस सबसे अधिक मात्रा में मौजूद होगा।
उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद की सामग्री सूची और लेबल पर दी गई जानकारी पढ़ना जरूरी है। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि पेय में किस फल का रस या गाढ़ा रस मौजूद है और उत्पाद किस श्रेणी में आता है।
स्टोरिया के मामले में नियामक ने अनार के नाम और तस्वीर के साथ पेय में मौजूद अनार तथा सेब के गाढ़े रस की मात्रा को लेकर चिंता जताई है। यह मामला दिखाता है कि उत्पाद की पैकेजिंग से बनने वाली धारणा और उसकी वास्तविक संरचना के बीच स्पष्टता होना कितना महत्वपूर्ण है।
उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
FSSAI देश में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और निर्धारित मानकों के अनुपालन से जुड़ी प्रमुख नियामक संस्था है। खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और लेबलिंग से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी इसकी जिम्मेदारियों में शामिल है।
उपभोक्ता अक्सर किसी उत्पाद को खरीदने का फैसला उसके नाम, पैकेजिंग, तस्वीर और विज्ञापन में दी गई जानकारी के आधार पर करते हैं। ऐसे में सही और स्पष्ट लेबलिंग से उन्हें सोच-समझकर चुनाव करने में मदद मिलती है। खासकर पेय पदार्थों में फलों के रस और अन्य सामग्री की मात्रा जानना उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जो किसी खास फल का जूस खरीदना चाहते हैं।
नियामक की कार्रवाई का व्यापक महत्व यह है कि खाद्य कंपनियों को अपने उत्पादों की प्रस्तुति करते समय लागू नियमों और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने की जिम्मेदारी का ध्यान रखना होता है।
जूस खरीदते समय इन बातों पर दें ध्यान
पैकेज्ड जूस या फ्रूट ड्रिंक खरीदते समय केवल ब्रांड नाम और पैकेजिंग पर बनी तस्वीर के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए। उपभोक्ता कुछ जरूरी बातों पर ध्यान दे सकते हैं:
सामग्री की सूची पढ़ें: देखें कि उत्पाद में कौन-कौन सी सामग्री शामिल है।
फलों के रस की मात्रा जांचें: लेबल पर दी गई जानकारी से रस या गाढ़े रस की मात्रा समझने की कोशिश करें।
उत्पाद की श्रेणी देखें: जूस, फ्रूट ड्रिंक और अन्य पेय की संरचना अलग हो सकती है।
पोषण संबंधी जानकारी पढ़ें: चीनी और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा पर ध्यान दें।
इन सावधानियों से उपभोक्ता अपनी जरूरत और पसंद के मुताबिक बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
आगे क्या होगा?
स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ न्यायनिर्णय की कार्यवाही को मंजूरी मिलने के बाद अब मामले में आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। संबंधित तथ्यों और कंपनी के पक्ष पर विचार किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियामक की चिंता के संबंध में अंतिम निर्णय क्या रहता है।