फ्लिपकार्ट ने शैडोफैक्स में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी शुरू की, 700-750 करोड़ जुटाने का अनुमान
Business बिजनेस: वॉलमार्ट समर्थित ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हिस्सेदारी बिक्री से फ्लिपकार्ट को करीब 700 से 750 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फ्लिपकार्ट की ओर से शैडोफैक्स में अपनी हिस्सेदारी घटाने का दूसरा बड़ा कदम है। कंपनी इस डाइवेस्टमेंट के जरिए अपनी निवेश हिस्सेदारी को आंशिक रूप से भुना रही है और इससे मिलने वाली राशि को अपने वित्तीय प्रबंधन में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।
शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज देश की प्रमुख थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स कंपनियों में शामिल है। यह कंपनी ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए लास्ट-माइल डिलीवरी सेवाएं उपलब्ध कराती है। फ्लिपकार्ट लंबे समय से इस स्टार्टअप में निवेशक रही है और इसके विकास में अहम भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, फ्लिपकार्ट का यह कदम कंपनी की बड़ी मॉनेटाइजेशन रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले भी फ्लिपकार्ट ने अपनी कुछ निवेश कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर अच्छा रिटर्न हासिल किया है। कंपनी ने ब्लैकबक और आदित्य बिड़ला ग्रुप से जुड़ी कंपनियों सहित कई निवेशों से 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हासिल की है।
इस डील को फ्लिपकार्ट की नकदी प्रबंधन रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। कंपनी मौजूदा समय में अपने मासिक कैश बर्न को कम करने पर ध्यान दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ महीने पहले कंपनी का मासिक कैश बर्न करीब 40 मिलियन डॉलर के आसपास था।
फ्लिपकार्ट का लक्ष्य बाहरी फंड जुटाने की जरूरत को कम करना और अपने खर्चों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना है। कंपनी पिछले कुछ समय से लागत में कटौती, ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने और अपने कारोबार को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर रही है।
ई-कॉमर्स सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियां अब केवल तेजी से विस्तार करने के बजाय लाभप्रदता और नकदी प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। फ्लिपकार्ट भी इसी रणनीति के तहत अपने निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा कर रही है और गैर-प्रमुख हिस्सेदारी को भुनाने की कोशिश कर रही है।
इसके अलावा, फ्लिपकार्ट की लंबे समय से प्रस्तावित इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) योजना को भी लेकर बाजार में चर्चा होती रही है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक IPO को लेकर कोई अंतिम समयसीमा घोषित नहीं की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मौजूदा रणनीति के तहत कंपनी फिलहाल बाहरी फंडिंग पर निर्भरता कम करना चाहती है और वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाना चाहती है।
शैडोफैक्स में हिस्सेदारी बिक्री को निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इससे यह पता चलता है कि फ्लिपकार्ट अपने पुराने निवेशों से वैल्यू अनलॉक करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
भारत का लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। ऑनलाइन खरीदारी, क्विक कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण लास्ट-माइल डिलीवरी कंपनियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। शैडोफैक्स जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्टार्टअप और टेक कंपनियां अब अपने निवेश पोर्टफोलियो को अधिक रणनीतिक तरीके से संभाल रही हैं। वे उन कंपनियों में हिस्सेदारी बेच रही हैं जहां उन्हें अच्छा रिटर्न मिल सकता है और साथ ही अपने मुख्य कारोबार के लिए पूंजी उपलब्ध हो सकती है।
फ्लिपकार्ट की ओर से शैडोफैक्स हिस्सेदारी बिक्री का यह कदम कंपनी की वित्तीय रणनीति में बदलाव को दर्शाता है। जहां पहले कंपनियां तेजी से विस्तार और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर देती थीं, वहीं अब स्थिर विकास, नकदी बचत और भविष्य की योजनाओं के लिए पूंजी जुटाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
हालांकि, इस संभावित डील के अंतिम आंकड़े और खरीदार से जुड़ी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। आने वाले समय में इस सौदे से जुड़ी और जानकारी सामने आने की उम्मीद है