EaseMyTrip को Q4 FY26 में 15.4 करोड़ का घाटा, बढ़ती लागत से मुनाफा प्रभावित
Business बिजनेस: ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर EaseMyTrip ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में कमजोर वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी ने इस अवधि में 15.4 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस बताया है, जो पिछले साल इसी तिमाही में दर्ज 13.9 करोड़ रुपये के मुनाफे के मुकाबले पूरी तरह विपरीत स्थिति को दर्शाता है। इसके अलावा पिछली तिमाही में कंपनी ने 3.4 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जिससे यह साफ होता है कि जनवरी से मार्च की अवधि में कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में तेज गिरावट आई है।
कंपनी के वित्तीय नतीजों के अनुसार, बढ़ती परिचालन लागत ने राजस्व वृद्धि के प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया, जिसके कारण मुनाफा नुकसान में बदल गया। इस तिमाही में लागत का दबाव कंपनी के प्रदर्शन पर प्रमुख रूप से हावी रहा।
हालांकि घाटे के बावजूद EaseMyTrip ने अपने ऑपरेशंस से रेवेन्यू में साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की है। कंपनी का रेवेन्यू 8.9 प्रतिशत बढ़कर 151.9 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 139.5 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि दर्शाती है कि बुकिंग और ट्रैवल डिमांड में स्थिरता बनी हुई है।
सीक्वेंशियल आधार पर भी कंपनी का रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा। दिसंबर तिमाही में दर्ज 151.6 करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें केवल 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई, जो बताता है कि पिछली तिमाही से तुलना करने पर राजस्व में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
विश्लेषकों के अनुसार, कंपनी के नतीजे यह संकेत देते हैं कि ट्रैवल सेक्टर में मांग भले ही स्थिर बनी हुई है, लेकिन परिचालन लागत, मार्केटिंग खर्च और प्रतिस्पर्धा के दबाव ने मार्जिन पर असर डाला है। खासकर ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों को लाभ बनाए रखने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
EaseMyTrip के लिए यह तिमाही परिणाम एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखे जा रहे हैं, जिसमें यह स्पष्ट हुआ है कि केवल राजस्व वृद्धि पर्याप्त नहीं है, बल्कि लागत नियंत्रण भी उतना ही आवश्यक है। कंपनी को भविष्य में लाभप्रदता सुधारने के लिए अपने खर्च ढांचे और परिचालन दक्षता पर अधिक ध्यान देना होगा।
फिलहाल कंपनी के तिमाही परिणाम निवेशकों के लिए मिश्रित संकेत लेकर आए हैं, जहां एक ओर रेवेन्यू ग्रोथ सकारात्मक है, वहीं दूसरी ओर बढ़ती लागत ने मुनाफे को नुकसान में बदल दिया है।