बिजनेस : भारत तेजी से दुनिया के प्रमुख डिजिटल हब के रूप में उभर रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र (APAC) में चीन के बाद भारत सबसे बड़ा डेटा सेंटर मार्केट बन गया है। पिछले छह वर्षों में देश की लाइव आईटी क्षमता में करीब चार गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑनलाइन कारोबार और डेटा की बढ़ती खपत ने भारत में डेटा सेंटर उद्योग को तेज गति दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास हुआ है। वर्ष 2020 के बाद से देश में डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की जरूरत लगातार बढ़ी है। सरकारी डिजिटल योजनाओं, इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या और कंपनियों के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरण ने डेटा सेंटर की मांग को कई गुना बढ़ा दिया है।
डेटा सेंटर किसी भी डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इनमें बड़ी मात्रा में डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है और क्लाउड सेवाओं, वेबसाइट, मोबाइल एप्लीकेशन, बैंकिंग सिस्टम और अन्य ऑनलाइन सेवाओं को संचालित करने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराई जाती है। भारत में डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म और एआई आधारित सेवाओं के विस्तार के कारण डेटा सेंटर की जरूरत तेजी से बढ़ी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की लाइव आईटी क्षमता में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। छह साल पहले जहां देश में डेटा सेंटर क्षमता सीमित थी, वहीं अब इसमें कई गुना विस्तार हो चुका है। मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहर डेटा सेंटर हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं।
मुंबई भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर बाजार माना जाता है। समुद्री केबल नेटवर्क से जुड़ाव और बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से यहां बड़ी संख्या में डेटा सेंटर कंपनियां निवेश कर रही हैं। इसके अलावा दक्षिण भारत के शहरों में भी डेटा सेंटर परियोजनाओं को तेजी मिल रही है।
भारत में डेटा सेंटर उद्योग को बढ़ावा देने में विदेशी और घरेलू निवेशकों की अहम भूमिका रही है। कई वैश्विक कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थापित कर रही हैं, क्योंकि देश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या बहुत अधिक है और डिजिटल सेवाओं का बाजार लगातार विस्तार कर रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल ने भी डेटा सेंटर की मांग बढ़ाई है। एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने और संचालित करने के लिए बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत में हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और एआई डेटा सेंटर की मांग और बढ़ने की संभावना है।
सरकार भी डेटा सेंटर क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। डेटा लोकलाइजेशन, डिजिटल इंडिया मिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियों से इस सेक्टर को मजबूती मिली है। कंपनियां भारत को एक बड़े डिजिटल बाजार के साथ-साथ डेटा प्रोसेसिंग के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, इस क्षेत्र के सामने बिजली की उपलब्धता, ऊर्जा खपत, जमीन की लागत और पर्यावरणीय चुनौतियां भी मौजूद हैं। डेटा सेंटर को लगातार बिजली और ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है।
इसके बावजूद भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रफ्तार को देखते हुए डेटा सेंटर बाजार के और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। चीन के बाद एपीएसी क्षेत्र में भारत का मजबूत स्थान इस बात का संकेत है कि देश वैश्विक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के नक्शे पर तेजी से अपनी जगह बना रहा है।
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