Business बिजनेस : देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल डाबर इंडिया (Dabur India) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने शीर्ष अधिकारियों को मिलने वाले परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी प्रदर्शन आधारित बोनस में करीब 50 प्रतिशत की कटौती कर दी है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर कंपनी के ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा पर पड़ा है, जिनका बोनस पिछले साल की तुलना में आधा कर दिया गया है।
हालांकि कंपनी ने अधिकारियों की फिक्स्ड सैलरी और अन्य भत्तों में बढ़ोतरी की है, लेकिन बोनस में भारी कटौती के कारण कुल सालाना वेतन में गिरावट दर्ज की गई है। इस फैसले के बाद निवेशकों और कर्मचारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर कंपनी ने अपने शीर्ष अधिकारियों के प्रदर्शन आधारित भुगतान में इतनी बड़ी कमी क्यों की।
डाबर इंडिया की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा को वित्त वर्ष 2024-25 में परफॉर्मेंस बोनस के रूप में 3.25 करोड़ रुपये मिले थे। लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 में यह राशि घटाकर 1.63 करोड़ रुपये कर दी गई। यानी उनके बोनस में सीधे 50 प्रतिशत की कमी की गई है।
हालांकि इसी अवधि में उनकी फिक्स्ड सैलरी और अन्य भत्तों में बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी फिक्स्ड सैलरी और अन्य लाभ बढ़कर 12.92 करोड़ रुपये हो गए, जबकि पिछले साल यह राशि 11.82 करोड़ रुपये थी। इसके बावजूद बोनस में कटौती के कारण उनका कुल सालाना वेतन 15.84 करोड़ रुपये से घटकर 15.35 करोड़ रुपये रह गया। यानी कुल वेतन में करीब 3.1 प्रतिशत की कमी आई है।
डाबर इंडिया के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी और होल-टाइम डायरेक्टर पी. डी. नारंग के मामले में भी इसी तरह की कटौती देखने को मिली है। उनका परफॉर्मेंस इंसेंटिव वित्त वर्ष 2024-25 में 3.54 करोड़ रुपये था, जिसे वित्त वर्ष 2025-26 में घटाकर 1.77 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसमें भी लगभग 50 प्रतिशत की कमी हुई है।
हालांकि पी. डी. नारंग की फिक्स्ड सैलरी में बढ़ोतरी के कारण उनके कुल वेतन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। उनका कुल सालाना वेतन 17.46 करोड़ रुपये से घटकर 17.09 करोड़ रुपये रह गया। यानी इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई है।
कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में बोनस कम करने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। हालांकि डाबर की रिम्यूनरेशन पॉलिसी के अनुसार, कंपनी के कार्यकारी निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन व बोनस का फैसला उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
कंपनी की नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमिटी हर साल अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है और उसी आधार पर वेतन, इंसेंटिव और बोनस को लेकर बोर्ड को सुझाव देती है। इसका मतलब है कि परफॉर्मेंस लिंक्ड बोनस पूरी तरह से कंपनी के प्रदर्शन और अधिकारियों के व्यक्तिगत योगदान से जुड़ा होता है।
एफएमसीजी सेक्टर में कंपनियां आमतौर पर अपने शीर्ष अधिकारियों के वेतन ढांचे में फिक्स्ड सैलरी और प्रदर्शन आधारित भुगतान का संतुलन बनाए रखती हैं। ऐसे में बोनस में इतनी बड़ी कटौती को कंपनी के प्रदर्शन मूल्यांकन से जोड़कर देखा जा रहा है।
डाबर इंडिया देश की जानी-मानी एफएमसीजी कंपनियों में शामिल है, जो आयुर्वेदिक उत्पादों, हेल्थकेयर, पर्सनल केयर और फूड कैटेगरी में कारोबार करती है। कंपनी के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता मांग में बदलाव और लागत से जुड़ी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।
हालांकि कंपनी ने बोनस कटौती को लेकर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन यह कदम दिखाता है कि कंपनियां अब वरिष्ठ अधिकारियों के भुगतान को प्रदर्शन और कारोबारी नतीजों से ज्यादा मजबूती से जोड़ रही हैं।