Cult.fit कानूनी विवाद गहराया FIR रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट में अपील
ऋषभ तेलंग की कानूनी लड़ाई तेज FIR रद्द
बेंगलुरु: फिटनेस कंपनी Cult.fit के को-फाउंडर ऋषभ तेलंग ने कथित धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े आपराधिक मामले को रद्द कराने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। तेलंग ने अदालत से उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की है। यह मामला कंपनी के शुरुआती दौर के एक पुराने विवाद से जुड़ा है।
मामले की शुरुआत पूर्व को-फाउंडर दीपक पोडुवल की शिकायत से हुई थी। पोडुवल ने आरोप लगाया था कि Cult Fitness Private Limited को बंद करने से जुड़े दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर कथित रूप से फर्जी किए गए और इसी आधार पर कंपनी की प्रक्रिया पूरी की गई। बेंगलुरु के बेलंदूर थाने में इस मामले में FIR दर्ज की गई थी।
FIR में लगाए गए हैं ये आरोप
शिकायतकर्ता दीपक पोडुवल ने आरोप लगाया है कि कंपनी के दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर उन्हें जानकारी दिए बिना कंपनी को बंद किया गया। उन्होंने जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाए हैं।
यह विवाद Cult Fitness Private Limited से जुड़ा है, जिसकी स्थापना 2015 में ऋषभ तेलंग और दीपक पोडुवल ने की थी। बाद में Cult ब्रांड बड़े फिटनेस प्लेटफॉर्म Cult.fit का हिस्सा बना।
ऋषभ तेलंग ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
ऋषभ तेलंग ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि दीपक पोडुवल कंपनी से जुड़े लेनदेन और बाद की प्रक्रियाओं से पूरी तरह अवगत थे। उन्होंने दावा किया कि कंपनी बंद करने की प्रक्रिया में सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं।
तेलंग का कहना है कि यह मामला व्यक्तिगत विवादों से जुड़ा है और आरोपों का जवाब वह कानूनी प्रक्रिया के तहत देंगे।
Cult.fit ने भी दी सफाई
Cult.fit ने कहा है कि FIR में Cult.fit Limited या उसकी सहायक कंपनियों को आरोपी नहीं बनाया गया है। कंपनी के अनुसार, जिस संस्था से विवाद जुड़ा है वह एक अलग कंपनी थी और 2016 में संपत्ति व बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ा लेनदेन तय प्रक्रिया के तहत हुआ था।
IPO से पहले बढ़ी मुश्किलें
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब Cult.fit अपने प्रस्तावित IPO की तैयारी कर रही है। कानूनी विवाद के कारण कंपनी की कॉरपोरेट गवर्नेंस और पुराने लेनदेन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल कर्नाटक हाई कोर्ट में ऋषभ तेलंग की याचिका पर सुनवाई के बाद ही यह साफ होगा कि FIR को रद्द किया जाएगा या जांच आगे जारी रहेगी।