Business। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सितंबर 2026 के औद्योगिक आंकड़े उत्साह बढ़ाने वाले रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों यानी कोर सेक्टर की वृद्धि दर सितंबर में बढ़कर 7.9 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह पिछले 30 महीनों का उच्चतम स्तर है। अगस्त 2026 में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 5.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जबकि पिछले साल सितंबर में यह आंकड़ा 3.1 प्रतिशत था। इस बार कोयला, बिजली, रिफाइनरी उत्पाद और लौह अयस्क जैसे क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने औद्योगिक गतिविधियों को गति दी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में छह प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा, जबकि तीन क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, यह आंकड़ा औद्योगिक गतिविधियों में सुधार का संकेत देता है, लेकिन सभी क्षेत्रों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के उत्पादन में कमजोरी बनी हुई है।
30 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची वृद्धि दर
कोर सेक्टर की वृद्धि दर में सितंबर के दौरान उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। अगस्त में यह दर अंतिम संशोधित आंकड़ों के अनुसार 5.9 प्रतिशत थी। सितंबर 2025 में प्रमुख उद्योगों की वृद्धि दर केवल 3.1 प्रतिशत रही थी। ऐसे में एक साल के भीतर वृद्धि दर में सुधार औद्योगिक उत्पादन की बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
हालांकि, वृद्धि दर बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि हर क्षेत्र में उत्पादन पिछले महीने की तुलना में बढ़ा है। कोर सेक्टर की वृद्धि दर की गणना पिछले साल के समान महीने से तुलना करके की जाती है। सितंबर में सालाना आधार पर प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन महीने-दर-महीने आधार पर समग्र सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई। इसलिए आंकड़ों को समझते समय दोनों पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।
लौह अयस्क और कोयले का दमदार प्रदर्शन
सितंबर में लौह अयस्क उत्पादन में 18.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह नौ प्रमुख क्षेत्रों में सबसे अधिक वृद्धि दर रही। अगस्त में लौह अयस्क क्षेत्र की वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत थी। इस तरह सितंबर में इस क्षेत्र का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा।
कोयला उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ। अगस्त में कोयला उत्पादन में 3.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन सितंबर में इसमें 10.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कोयला बिजली उत्पादन और कई औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसलिए इसके उत्पादन में सुधार कोर सेक्टर की समग्र वृद्धि को सहारा देता है।
रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, बिजली उत्पादन में 11.4 प्रतिशत और सीमेंट उत्पादन में 9.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस्पात उत्पादन भी 4.9 प्रतिशत बढ़ा। इन क्षेत्रों का निर्माण, परिवहन, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से सीधा संबंध है।
तीन क्षेत्रों में अब भी गिरावट
जहां छह क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की गई, वहीं तीन प्रमुख उद्योगों का प्रदर्शन कमजोर रहा। सितंबर में उर्वरक उत्पादन में 11.7 प्रतिशत की गिरावट आई। यह लगातार सातवां महीना था, जब इस क्षेत्र में संकुचन दर्ज किया गया।
प्राकृतिक गैस उत्पादन में भी 4.6 प्रतिशत की गिरावट हुई। इस क्षेत्र में गिरावट का सिलसिला लगातार 27 महीनों तक जारी रहा। वहीं, कच्चे तेल के उत्पादन में 1.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, अगस्त की 3.6 प्रतिशत गिरावट के मुकाबले सितंबर में कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट की रफ्तार कम हुई।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि औद्योगिक सुधार के बावजूद ऊर्जा और उर्वरक से जुड़े कुछ क्षेत्रों में चुनौतियां बनी हुई हैं। इन क्षेत्रों के उत्पादन में स्थायी सुधार लाने के लिए आगे के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।
अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है कोर सेक्टर?
कोर सेक्टर में देश के नौ प्रमुख उद्योग शामिल हैं। इनमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क आते हैं। इन उद्योगों का देश की औद्योगिक गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।
ये क्षेत्र सड़क, रेलवे, आवास, बिजली आपूर्ति, निर्माण और विनिर्माण जैसी गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, सीमेंट और इस्पात का उत्पादन बढ़ने से निर्माण गतिविधियों को सहारा मिल सकता है। बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी औद्योगिक इकाइयों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है।
कोर सेक्टर का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में लगभग 40 प्रतिशत भार है। इस वजह से प्रमुख उद्योगों के प्रदर्शन का असर देश के औद्योगिक उत्पादन के व्यापक आंकड़ों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, केवल कोर सेक्टर की वृद्धि के आधार पर पूरी अर्थव्यवस्था की स्थिति का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
अप्रैल से सितंबर तक भी सुधार
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान कोर सेक्टर की संचयी वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत रही। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह दर 2.5 प्रतिशत थी। इससे पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्रमुख उद्योगों का समग्र प्रदर्शन पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहा।
फिर भी, आगे की तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले महीनों में उत्पादन की रफ्तार बनी रहती है या नहीं। खास तौर पर उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल जैसे क्षेत्रों के प्रदर्शन पर नजर रखना जरूरी होगा।
आगे के आंकड़ों पर रहेगी नजर
सितंबर में 7.9 प्रतिशत की वृद्धि दर औद्योगिक क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। कोयला, लौह अयस्क, बिजली और रिफाइनरी उत्पादों के बेहतर प्रदर्शन ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में लगातार गिरावट यह बताती है कि सुधार अभी सभी उद्योगों तक समान रूप से नहीं पहुंचा है।
सितंबर के आंकड़े फिलहाल अनंतिम हैं और इनमें आगे संशोधन हो सकता है। आने वाले महीनों के आंकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि औद्योगिक गतिविधियों में आई तेजी कितनी टिकाऊ है और इसका व्यापक अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ता है।
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