बिजनेस : सोना खरीदने वालों के लिए बाजार से एक अहम खबर सामने आई है। सोने की कीमतों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अनिश्चितताओं के बीच अब आयात शुल्क यानी इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की चर्चाओं ने बाजार का रुख बदल दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंपोर्ट ड्यूटी कम होने की उम्मीद के चलते बुलियन बाजार में सोने पर मिलने वाला डिस्काउंट अचानक बढ़ गया है। कारोबारियों का मानना है कि अगर सरकार वास्तव में आयात शुल्क में कटौती करती है तो सोने की कीमतों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में सोने की मांग मुख्य रूप से शादी-ब्याह, त्योहारों और निवेश के लिए रहती है। भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है। ऐसे में सोने पर लगने वाला आयात शुल्क कीमतों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारक होता है।
इंपोर्ट ड्यूटी घटने की चर्चा क्यों बढ़ी
सोने के कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, सरकार की ओर से आयात शुल्क में बदलाव की संभावनाओं को लेकर बाजार में चर्चा शुरू हुई है। इसी वजह से व्यापारियों ने भविष्य की स्थिति को देखते हुए सोने की खरीद-बिक्री में बदलाव करना शुरू कर दिया है।
जब भी बाजार में किसी वस्तु पर टैक्स कम होने की उम्मीद होती है, तो व्यापारी कीमतों में संभावित बदलाव को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बनाते हैं। सोने के मामले में भी ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
डिस्काउंट बढ़ने का क्या मतलब है
आमतौर पर जब बाजार में सोने की मांग कमजोर होती है या कीमतों को लेकर अनिश्चितता होती है तो व्यापारी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए डिस्काउंट देते हैं। इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित कटौती की खबरों के कारण कुछ कारोबारियों ने मौजूदा स्टॉक को बेचने के लिए ज्यादा छूट देना शुरू कर दिया है।
इसका फायदा उन ग्राहकों को मिल सकता है जो सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल डिस्काउंट देखकर खरीदारी करने के बजाय सोने की शुद्धता और बाजार भाव की जांच जरूर करनी चाहिए।
आयात शुल्क कम हुआ तो क्या होगा असर
अगर सरकार सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाती है तो आयात लागत कम हो सकती है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है और ग्राहकों को राहत मिल सकती है।
हालांकि सोने की कीमत केवल इंपोर्ट ड्यूटी से तय नहीं होती। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव, डॉलर की कीमत, ब्याज दरें, वैश्विक आर्थिक स्थिति और मांग जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं।
ज्वेलरी कारोबारियों की नजर सरकार के फैसले पर
सोने के कारोबारी लंबे समय से आयात शुल्क में कमी की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि ज्यादा शुल्क के कारण तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है और कारोबार पर असर पड़ता है।
ज्वेलरी उद्योग का मानना है कि आयात शुल्क कम होने से संगठित बाजार को फायदा मिल सकता है और ग्राहकों को भी बेहतर कीमतें मिल सकती हैं।
ग्राहकों को क्या करना चाहिए
अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं तो जल्दबाजी में फैसला लेने से बचें। बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर रखें और खरीदारी करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें।
* हमेशा हॉलमार्क वाला सोना खरीदें।
* सोने की शुद्धता की जांच करें।
* मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क की जानकारी लें।
* अलग-अलग दुकानों की कीमतों की तुलना करें।
त्योहारों से पहले बढ़ सकती है मांग
भारत में त्योहारों और शादी के सीजन से पहले सोने की मांग अक्सर बढ़ जाती है। ऐसे में अगर कीमतों में राहत मिलती है तो ग्राहकों की खरीदारी बढ़ सकती है।
सोने को भारत में सिर्फ गहने के रूप में नहीं बल्कि निवेश के विकल्प के तौर पर भी देखा जाता है। यही कारण है कि कीमतों में छोटे बदलाव का भी बाजार पर बड़ा असर पड़ता है।
आगे क्या रहेगा रुख
फिलहाल बाजार की नजर सरकार के संभावित फैसले पर है। इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चर्चा के कारण बुलियन बाजार में हलचल जरूर बढ़ गई है।
अगर आयात शुल्क में बदलाव होता है तो इसका असर सोने के भाव, कारोबारियों की रणनीति और ग्राहकों की खरीदारी पर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में सरकार के फैसले और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति से सोने की दिशा तय होगी।
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