Bhagalpur के सिल्क कारोबार में संकट की स्थिति

Update: 2026-07-02 11:49 GMT
Bhagalpur | भागलपुर : बिहार का भागलपुर शहर अपने सिल्क कपड़ों के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी जाना जाता है। यही वजह है कि इसे “सिल्क सिटी” के नाम से भी पहचाना जाता है। यहां तैयार होने वाले भागलपुरी सिल्क की अलग-अलग डिजाइन और गुणवत्ता की वजह से इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। लेकिन अब इस पारंपरिक उद्योग से जुड़े बुनकरों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
स्थानीय बुनकरों का कहना है कि सिल्क उद्योग की असली समस्या कच्चे माल यानी धागे की समय पर उपलब्धता और
उचित दाम न मिलना
है। इसके चलते उत्पादन प्रभावित हो रहा है और आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। बुनकरों का कहना है कि कई बार योजनाओं और सहायता की बातें तो की जाती हैं, लेकिन उनका लाभ जमीन पर दिखाई नहीं देता।
ब्रांडिंग योजना भी अधूरी
जिला प्रशासन की ओर से भागलपुरी सिल्क की ब्रांडिंग और उसे बढ़ावा देने की बात कही गई थी। साथ ही बुनकरों के लिए स्टॉल और बाजार उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन बुनकरों का कहना है कि यह योजनाएं अभी तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई हैं।
बुनकर आलोक कुमार ने बताया कि प्रशासन की ओर से कई घोषणाएं तो की गईं, लेकिन वास्तविक लाभ बुनकरों तक नहीं पहुंच पाया। उनका कहना है कि 5,000 बुनकरों में से सिर्फ कुछ लोगों को स्टॉल देने से पूरे उद्योग का विकास संभव नहीं है।
जानकारी और पहुंच की कमी
बुनकरों की एक बड़ी समस्या यह भी है कि उन्हें सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। कई बुनकरों को यह तक पता नहीं है कि उनके लिए कौन-कौन सी सुविधाएं या योजनाएं चल रही हैं। इससे वे योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं।
स्थानीय कारीगरों का कहना है कि अगर सही जानकारी और व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, तो यह उद्योग फिर से अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकता है।
सुनियोजित ढांचे की मांग
बुनकरों का मानना है कि सिल्क उद्योग के विकास के लिए केवल छोटे-छोटे कदम पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए एक मजबूत और सुनियोजित ढांचे की जरूरत है, जिसमें कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार से जुड़ाव, मार्केटिंग और सरकारी सहयोग शामिल हो।

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