बिज़नेस : भारत में हाई-स्पीड रेल तकनीक को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन के रूप में विकसित की जा रही B28 ट्रेन ने बेंगलुरु में सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण 'स्क्वीज टेस्ट' पास कर लिया है। इस ट्रेन की डिजाइन स्पीड 249 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। भारतीय रेलवे मई-जून 2027 में इसके ट्रायल शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस उपलब्धि को भारत में आधुनिक रेल निर्माण, स्वदेशी तकनीक और यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन के निर्माण का उद्देश्य भारत को तेज रफ्तार रेल परिवहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। अभी देश में वंदे भारत जैसी आधुनिक सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें चल रही हैं, जबकि बुलेट ट्रेन परियोजना पर अलग से काम जारी है। ऐसे में B28 ट्रेन का विकास भारतीय रेल तकनीक के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है।
B28 ट्रेन का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीईएमएल (BEML) के बेंगलुरु स्थित संयंत्र में किया जा रहा है। इस परियोजना में चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। बीईएमएल को शुरुआती चरण में दो स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक ट्रेनसेट में आठ कोच होंगे।
स्क्वीज टेस्ट ट्रेन के ढांचे की मजबूती जांचने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें ट्रेन की बॉडी पर निर्धारित तरीके से दबाव डालकर यह देखा जाता है कि उसका ढांचा भारी बल सहन कर सकता है या नहीं। परीक्षण का उद्देश्य यह समझना है कि दबाव पड़ने पर कोच की संरचना में कितना बदलाव होता है और यात्री कक्ष की मजबूती किस हद तक बनी रहती है।
यह परीक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों में संरचनात्मक सुरक्षा की विशेष आवश्यकता होती है। किसी दुर्घटना या टक्कर की स्थिति में मजबूत बॉडी यात्रियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, स्क्वीज टेस्ट वास्तविक टक्कर का परीक्षण नहीं है। इससे ट्रेन की संपूर्ण दुर्घटना-सुरक्षा प्रमाणित नहीं होती। इसके लिए अन्य तकनीकी और परिचालन परीक्षण भी जरूरी होते हैं।
एक नवंबर की रिपोर्टों के अनुसार, बीईएमएल के बेंगलुरु संयंत्र में B28 ट्रेन के बॉडी शेल का स्क्वीज टेस्ट किया गया है। कुछ रिपोर्टों में इसके सफल होने की बात कही गई है, हालांकि विस्तृत आधिकारिक परीक्षण परिणाम सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे में इसे सुरक्षा जांच की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा सकता है, लेकिन सभी सुरक्षा परीक्षण पूरे होने का दावा करना जल्दबाजी होगी।
ट्रेन की रफ्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बीईएमएल के एक तकनीकी दस्तावेज में B28 की परिचालन गति 249 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज है। वहीं, रेल मंत्रालय की पूर्व जानकारी के अनुसार ट्रेन की डिजाइन स्पीड लगभग 280 किलोमीटर प्रति घंटा और शुरुआती परिचालन गति करीब 250 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। इसका मतलब है कि 249 किलोमीटर प्रति घंटा को डिजाइन स्पीड के बजाय नियोजित परिचालन गति के रूप में समझना अधिक सटीक होगा।
रेलवे की योजना के अनुसार, B28 ट्रेन का ट्रैक ट्रायल मई-जून 2027 में शुरू किया जा सकता है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले भी बता चुके हैं कि स्वदेशी बुलेट ट्रेन के शुरुआती ढांचे का निर्माण पूरा होने के बाद उसे सुरक्षा परीक्षण के लिए भेजा गया था। उन्होंने अगले वर्ष ट्रैक पर परीक्षण शुरू करने की योजना का उल्लेख किया था।
ट्रायल के दौरान ट्रेन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, स्थिरता, कंपन, यात्री सुविधाओं और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। हाई-स्पीड ट्रेन को नियमित यात्री सेवा में उतारने से पहले विभिन्न परिस्थितियों में उसकी कार्यक्षमता का आकलन करना आवश्यक होता है।
शुरुआती ट्रायल गुजरात में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सूरत-वापी खंड पर किए जाने की योजना है। यह लगभग 100 किलोमीटर लंबा हिस्सा है। रेलवे इस खंड पर चरणबद्ध तरीके से बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, ट्रायल और व्यावसायिक संचालन की वास्तविक तारीखें निर्माण कार्य, परीक्षण के परिणाम और आवश्यक सुरक्षा मंजूरियों पर निर्भर करेंगी।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत की पहली समर्पित बुलेट ट्रेन परियोजना है। लगभग 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को आधुनिक रेल तकनीक के साथ विकसित किया जा रहा है। पूरी परियोजना के शुरू होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।
इस कॉरिडोर को लगभग 320 किलोमीटर प्रति घंटा की परिचालन गति के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। हालांकि, शुरुआती चरण में इस्तेमाल की जाने वाली स्वदेशी B28 ट्रेन की निर्धारित परिचालन गति इससे कम होगी। रेलवे भविष्य में अधिक गति वाली स्वदेशी ट्रेनों के विकास पर भी काम कर रहा है।
B28 ट्रेन में यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें वातानुकूलित चेयर कार कोच, आरामदायक सीटें, सूचना और मनोरंजन प्रणाली तथा दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं शामिल हैं। आठ कोच वाली ट्रेन को आधुनिक यात्रा अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
इस परियोजना का एक बड़ा उद्देश्य हाई-स्पीड रेल निर्माण के लिए देश के भीतर तकनीकी क्षमता विकसित करना भी है। अभी तक बुलेट ट्रेन तकनीक के लिए भारत को काफी हद तक विदेशी विशेषज्ञता पर निर्भर रहना पड़ा है। स्वदेशी ट्रेनसेट के विकास से भारतीय इंजीनियरों और कंपनियों को आधुनिक रेल निर्माण के क्षेत्र में नया अनुभव मिलेगा।
रेलवे अधिकारियों के लिए यह परियोजना केवल तेज रफ्तार ट्रेन तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसमें ट्रेन की बॉडी, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, ब्रेकिंग तकनीक और अन्य उपकरणों को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करना भी शामिल है। भारत में गर्मी, धूल और अलग-अलग मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तकनीकी समाधान तैयार करना जरूरी है।
फिलहाल B28 ट्रेन के निर्माण और सुरक्षा परीक्षणों की प्रगति को स्वदेशी हाई-स्पीड रेल परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि निर्धारित समय के अनुसार निर्माण और सभी परीक्षण पूरे होते हैं, तो मई-जून 2027 में इसके ट्रायल शुरू हो सकते हैं।
बेंगलुरु में हुए स्क्वीज टेस्ट के बाद अब अगला बड़ा पड़ाव ट्रेनसेट को पूरी तरह तैयार करना और ट्रैक पर उसकी वास्तविक क्षमता जांचना होगा। आने वाले महीनों में परीक्षणों के परिणाम और रेलवे की आधिकारिक घोषणाएं यह स्पष्ट करेंगी कि भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन यात्रियों के लिए कब तक उपलब्ध हो सकेगी।
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