AI हैकिंग से बैंकों में हड़कंप, हजारों ग्राहकों का डेटा लीक
दक्षिण कोरिया के बैंकों पर साइबर अटैक
सियोल: दक्षिण कोरिया के बैंकिंग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किए गए संदिग्ध साइबर हमलों ने चिंता बढ़ा दी है। कई प्रमुख बैंकों के ग्राहकों की निजी जानकारी लीक होने के बाद वित्तीय संस्थान अब साइबर सुरक्षा पर खर्च बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। बैंकों की योजना सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के साथ विशेषज्ञ कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की भी है।
हालिया घटनाओं में शिनहान बैंक, हाना बैंक और केबी कूकमिन बैंक सहित कई वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई है। इन हमलों ने डिजिटल बैंकिंग में डेटा सुरक्षा और एआई आधारित साइबर खतरों से निपटने की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं।
शिनहान बैंक के 25 हजार ग्राहकों का डेटा लीक
जानकारी के अनुसार, शिनहान बैंक ने 1 अक्टूबर 2026 को करीब 25 हजार ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी लीक होने की पुष्टि की थी। प्रभावित डेटा में ग्राहकों के नाम, फोन नंबर, वार्षिक आय और ऋण संबंधी विवरण शामिल थे। इसके अलावा केबी कूकमिन बैंक ने 119 ग्राहकों और हाना बैंक ने 89 ग्राहकों की जानकारी प्रभावित होने की सूचना दी। अन्य वित्तीय संस्थानों में भी डेटा लीक की घटनाएं सामने आई हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ हमलों में एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, सभी घटनाओं में एआई की भूमिका और हमलावरों की पहचान की जांच जारी है।
साइबर सुरक्षा पर 100 अरब वॉन से ज्यादा खर्च करेगा बैंक
इन घटनाओं के बाद केबी कूकमिन बैंक ने वर्ष 2027 में साइबर सुरक्षा बजट बढ़ाकर 100 अरब दक्षिण कोरियाई वॉन से अधिक करने की योजना बनाई है। वर्ष 2026 में बैंक का सुरक्षा बजट लगभग 86.07 अरब वॉन है। शिनहान बैंक भी साइबर सुरक्षा के लिए रिकॉर्ड बजट निर्धारित करने की तैयारी कर रहा है। वहीं हाना बैंक अगले वर्ष सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अरबों वॉन का निवेश करने की योजना बना रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों की भर्ती भी बढ़ेगी
दक्षिण कोरिया के प्रमुख बैंक केवल तकनीकी उपकरणों पर खर्च बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे। वे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की भर्ती बढ़ाने की भी तैयारी कर रहे हैं। वूरी बैंक अपने सुरक्षा बजट में 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी और विशेषज्ञ कर्मचारियों की संख्या कम से कम 10 प्रतिशत बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। एनएच नोंगह्युप बैंक भी सर्वर सुरक्षा, एआई सुरक्षा परीक्षण और सिस्टम की कमजोरियों की पहचान करने वाली तकनीकों में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहा है।
AI की मदद से कैसे किए गए साइबर हमले?
जांच में सामने आया है कि हमलावरों ने कुछ मामलों में बैंकों की मुख्य भुगतान प्रणालियों के बजाय उनसे जुड़े बाहरी पोर्टल, ऋण एजेंटों के सिस्टम और अपेक्षाकृत कमजोर डिजिटल सेवाओं को निशाना बनाया।
साइबर सुरक्षा कंपनी क्राउडस्ट्राइक के अनुसार, संदिग्ध हमलावर ने ARTEX नामक एआई आधारित उपकरण और अन्य एआई मॉडल का इस्तेमाल किया हो सकता है। ऐसे उपकरण सिस्टम की कमजोरियां तलाशने की प्रक्रिया तेज कर सकते हैं। क्राउडस्ट्राइक ने एक संदिग्ध हमलावर की पहचान से जुड़े निष्कर्ष भी साझा किए हैं, लेकिन ये जांच संबंधी आकलन हैं, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
दक्षिण कोरिया सरकार ने दिए सख्त निर्देश
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने हालिया साइबर हमलों को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच और प्रभावी सुरक्षा उपाय अपनाने के निर्देश दिए हैं। वित्तीय नियामकों ने बैंकों से बाहरी नेटवर्क, पहचान सत्यापन प्रणाली और ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा की समीक्षा करने को कहा है। साथ ही संदिग्ध इंटरनेट पते और हमले के तरीकों की जानकारी वित्तीय संस्थानों के बीच साझा करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने डेटा लीक से प्रभावित ग्राहकों की सुरक्षा और संभावित ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने को कहा है।
ग्राहकों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
बैंक खातों से सीधे रकम चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्राहकों की निजी जानकारी लीक होने से दूसरे प्रकार के साइबर अपराधों का जोखिम बढ़ सकता है। नाम, मोबाइल नंबर और वित्तीय जानकारी का इस्तेमाल फर्जी बैंक कॉल, धोखाधड़ी वाले संदेश और पहचान संबंधी ठगी के प्रयासों में किया जा सकता है।
इसलिए ग्राहकों को अनजान लिंक से बचने, बैंकिंग पासवर्ड सुरक्षित रखने और किसी के साथ ओटीपी साझा नहीं करने जैसी सावधानियां अपनाने की सलाह दी जाती है। दक्षिण कोरिया में सामने आई इन घटनाओं ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा पर लगातार निवेश करना भी जरूरी है। आने वाले समय में बैंकों के सुरक्षा बजट, विशेषज्ञों की नियुक्ति और एआई आधारित निगरानी प्रणालियों पर विशेष ध्यान रहेगा।