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विज्ञान

अंतरिक्ष में हुआ जोरदार धमाका...दिखी सूरज से 5 अरब गुना ज्यादा चमक,जाने क्या है वजह

Kunti
3 Oct 2020 3:34 PM GMT
अंतरिक्ष में हुआ जोरदार धमाका...दिखी सूरज से 5 अरब गुना ज्यादा चमक,जाने क्या है वजह
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष में एक जोरदार धमाके को रिकॉर्ड किया है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | वॉशिंगटन: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष में एक जोरदार धमाके को रिकॉर्ड किया है। यह धमाका धरती से लगभग 7 करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित SN 2018gv सुपरनोवा में रिकॉर्ड किया गया है। यह सुपरनोवा NGC 2525 गैलेक्सी में स्थित है। सुपरनोवा किसी तारे में हुए भयंकर विस्फोट को कहते हैं। इससे उस तारे का जीवन खत्म हो जाता है। ऐसी घटनाओं को दुर्लभ माना जाता है।

जापानी वैज्ञनिक ने की थी इस सुपरनोवा की खोज

सुपरनोवा SN 2018gv की खोज पहली बार 2018 में जापान के एक शौकिया खगोल विज्ञानी कोइची इतागाकी ने की थी। इतागाकी ने अपने इस खोज के बारे में नासा को बताया था, जिसके बाद इस अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने हब्बल टेलिस्कोप की मदद से इस सुपरनोवा पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। हाल में ही नासा ने इस सुपरनोवा पर एक साल तक नजर रखने का वीडियो जारी किया है। जिसमें इस तारे में विस्फोट होता दिखाई दे रहा है।

ब्राह्मांड को समझने में मिलेगी सहायता

नासा ने बताया कि सुपरनोवा का अवलोकन करने से रिचर्सस को ब्राह्मांड के फैलाव की दर को मापने में मदद मिलती है। यह ब्राह्मांड के भौतिक आधारों को समझने के लिए भी जरूरी तत्व है। सुपरनोवा का उपयोग आकाशगंगाओं की दूरियों को मापने के लिए एक मानक के रूप में किया जा सकता है। इससे यह भी पता लगता है कि एक आकाशगंगा दूसरी आकाशगंगा से कितनी तेजी से दूर जा रही है।

दिखी सूरज से 5 अरब गुना ज्यादा चमक

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि इस विस्फोट में सूरज से 5 अरब गुना ज्यादा चमक देखी गई है। कहा जाता है कि ये विस्फोट इतने शक्तिशाली होते हैं कि आकाशगंगाओं को कई प्रकाश वर्ष तक फैला सकते हैं। वहीं, इनसे निकलने वाला प्रकाश इतना तीव्र होता है कि पृथ्वी से आधे ब्राह्मांड तक को देखा जा सकता है।

क्या होता है सुपरनोवा

जब अंतरिक्ष में किसी तारे के टूटने से जो ऊर्जा पैदा होती है उसे सुपरनोवा कहा जाता है। यह किसी तारे का अंतिम समय होता है। हमारी आकाशगंगा में सुपरनोवा को देखना मुश्किल है क्योंकि वे अक्सर धूल से छिप जाते हैं। इस सुपरनोवा को नासा इसलिए देख पाई है क्योंकि पिछले साल से इसपर उनकी नजर बनी हुई थी। इन सुपरनोवा से निकली ऊर्जा इतनी ज्यादा होती है जिसके आगे सूरज की रोशनी भी फीकी पड़ जाती है।

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