World Sleep Day 2020: भागदौड़ भरे जीवन में सोने के समय पर दें, खास ध्यान । जनता से रिश्ता

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। नई दिल्ली। धरती पर पैदा होने वाले हर मनुष्य और जीव जंतु को सोने के लिए घंटे निर्धारित है, यदि वो निर्धारित समय से कम नींद लेता है तो उसको तमाम तरह की स्वस्थ संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। चाहे मनुष्य हो या कोई जीव, सभी के लिए प्रकृति की ओर से नींद के घंटे निर्धारित हैं, कई बार हम उस हिसाब से नींद नहीं ले पाते हैं तो तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

नींद पूरी न होने पर होगी समस्याएं

यदि आपकी नींद पूरी नहीं होगी तो सिर दर्द, पेट खराब जैसी तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लोगों को नींद के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ही वर्ल्ड स्लीप डे कमेटी ऑफ द वर्ल्ड स्लीप सोसाइटी की ओर से हर साल वर्ल्ड स्लीप-डे मनाया जाता है। इसके आयोजन के लिए हर साल 13 मार्च का दिन निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को नींद की समस्याओं के बोझ से छुटकारा दिलाना और नींद की गड़बड़ियों को लेकर लोगों को जागरूक करना होता है।

सोसायटी की ओर से हर साल इस मौके पर इसका एक विषय तय किया जाता है उसी विषय के हिसाब से इसको मनाया जाता है। इसमें लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा भी लेते हैं। वैसे तो कम ही लोगों ने वर्ल्ड स्लीप-डे के बारे में सुना होगा मगर इससे जुड़ी हुई कई चीजें हैं जिसके बारे में लोगों को जानना चाहिए।

नींद न आना भी है खतरनाक

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तमाम तरह की समस्याएं रहती हैं। कई बार इसकी वजह से भी लोगों को नींद नहीं आती है, इसके अलावा जीवन में कई तरह की अन्य समस्याएं भी हैं जो नींद न आने का बड़ा कारण होती है। इसी नींद न आने की समस्या को इन्सोमनिया कहते हैं। यह आमतौर पर लाइफ स्टाइल में बदलाव होने की वजह से होता है। यह दो तरह का होता है-ट्रान्जिएंट और क्रॉनिक। इसका मुख्य कारण टेंशन, वातावरण में बदलाव, हॉर्मोंन्स में बदलाव है।

अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं पर्याप्त नींद

जिस तरह से शरीर के लिए तमाम तरह के विटामिनों की जरूरत होती है ठीक उसी तरह से शरीर के लिए नींद भी जरूरी है। एक शरीर ठीक से काम करे इसके लिए कम से कम 6-8 घंटे की नींद जरूरी है। जो लोग कम सोते हैं उनके शरीर में लेप्टिन (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ) का स्तर कम होने की संभावना अधिक होती है, जिससे भूख बढ़ जाती है। डॉक्टर भी हर किसी को बेहतर नींद लेने के लिए कहते हैं क्योंकि यदि आप पूरी नींद नहीं लेंगे तो आपको अन्य तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ जाएगा। फिर आपको डॉक्टर नींद की गोली लेने की सलाह देंगे।

सोने के तरीके से भी वजन पर पड़ता है असर

आम लोगों के बीच एक सोच घर कर गई है कि यदि रात को वो खाना न खाएं तो उनका वजन कम हो जाएगा जबकि सच्चाई ऐसी नहीं है। इस वजह से डॉक्टर हमेशा यही सलाह देते हैं कि आप कभी खाली पेट न सोएं। खाली पेट सोने की वजह से आपको नींद नहीं आएगी और नींद की कमी से आपका मोटापा बढ़ सकता है। इसके अलावा अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। 

खाने के बाद तुरंत सोने के लिए न जाएं

डॉक्टरों की एक सलाह ये भी है कि आप रात के समय जब भी खाना खाएं तो उसके तुरंत बाद ही सोने के लिए बिस्तर न चले जाएं। खाना खाने के बाद कुछ देर कुछ कदम चलें। खाने और सोने के वक्त में कुछ अंतर रखें। खाना खाकर तुरंत सोने से ब्लड शुगर और इंसुलिन बढ़ता है, इसकी वजह से वजन बढ़ सकता है। रोजाना रात को एक कप हर्बल चाय पीने से तोंद को कम करने में मदद मिलेगी।

संतुलित आहार

स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित और स्वस्थ आहार खाना चाहिए। शराब का सेवन कम से कम करें, विशेष रूप से शाम को। आपका बेडरूम साफ, शांत, अंधेरा और एलर्जी और गंध से मुक्त होना चाहिए। कोशिश करें कि बहुत अधिक मोटे बिस्तर पर सोने की आदत न पड़े। सोने से पहले, हल्की स्ट्रेचिंग कर सकते हैं।