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World Bank: विश्व बैंक लेने जा रहा इस साल का सबसे बड़ा फैसला, भारत पर भी होगा असर

Janta se Rishta
28 Aug 2020 3:05 PM GMT
World Bank: विश्व बैंक लेने जा रहा इस साल का सबसे बड़ा फैसला, भारत पर भी होगा असर
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क | नई दिल्ली. भारत में कारोबारी सुगमता के माहौल पर असर पड़ सकता है. दरअसल, विश्व बैंक ने कारोबारी सुगमता रैंकिंग रिपोर्ट रिव्यू करने का फैसला लिया है. बैंक पिछले 5 साल की रिपोर्ट का रिव्यू करेगा. बता दें कि बीते 5 सालों के दौरान ही भारत इस रैंकिंग में 67 अंकों की छलांग लगाकार 63वें पायदान पर पहुंचा है. गुरुवार को विश्व बैंक ने इस संबंध में एक बयान जारी कर कहा कि अक्टूबर में जारी होने वाले कारोबारी सुगमता रैंकिंग रिपोर्ट को रोक दिया गया है और पिछले 5 साल के आंकड़ों का रिव्यू किया जाएगा. विश्व बैंक को इस रिपोर्ट को तैयार करने की प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताओं का पता चला है.

बयान में कहा गया, 'रिव्यू के बाद सामने आए नतीजे के आधार पर हम कोई फैसला लेंगे. इन अनियमितता की वजह से जिन देशों के आंकड़ों पर कोई असर पड़ने की बात सामने आती है तो हम पूर्वव्यापी रूप से उसे ठीक करेंगे.'

पिछले कुछ सालों में विवादों में घिरी विश्व बैंक की यह रिपोर्ट
विश्व बैंक की सबसे चर्चित इस रिपोर्ट को हाल के दिनों में कई तरह के विवादों में फंसना पड़ा है. जनवरी 2018 में इस बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री पॉल रोमर (Paul Romer) ने इस्तीफा देते दावा किया था कि आंकड़े जुटाने की विधिवत कार्यप्रणाली में बदलाव की वजह से इस रिपोर्ट में चिली की रैंकिंग कम हुई थी. रोमर पिछले 4 साल की रिपोर्ट की रिव्यू करने के बाद सभी रैंकिंग को नए सिरे से पेश करना चाहते थे. लेकिन, इस बीच उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

भारत की रैंकिंग पर पड़ सकता है असर
ये दोनों विवाद अब इशारा करते हैं कि भारत की रैंकिंग पर भी नए रिव्यू का असर पड़ सकता है. ने अपनी एक रिपोर लाइवमिंट 2012 से 2016 के बीच विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री रह चुके कौशिक बासु (Kaushik Basu) के हवाले से लिखा है कि भारत को आंकड़ों के विधिवत कार्यप्रणाली में बदलाव से लाभ मिला है. याद दिला दें कि साल 2016 और 2017 में भारत की रैंकिंग 130 से बढ़कर 100वें पायदान पर पहुंची थी. इन दोनों साल में चिली की रैंकिंग में गिरावट आई थी.

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फरवरी 2018 को प्रोजेक्ट सिंडिकेट के एक आर्टिकल में बासु ने लिखा, 'उदाहरण के तौर पर देखें तो 2014 और 2015 में जब भारत 142वें पायदान से 130वें पर आया था, तब डूइंग बिजनेस टीम और मैंने पाया कि 12 में से केवल 4 पायदान ही भारत में हुए बदलावों के बारे में बताते थे. यह आंकड़ों की नए कार्यप्रणाली की वजह से हुआ था.

रैंकिंग सुधारने पर केंद्र सरकार का विशेष फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के कार्यकाल में भारत की रैंकिंग 2014 में 142 से बेहतर होकर 2019 में 63वें पायदान पर पहुंच गई है. केंद्र सरकार लगातार कारोबारी सुगमता की रैंकिंग बेहतर करने के लिए कई कदम उठा रही है. नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत (Amitabh Kant) ने हाल ही में कहा था कि भारत को अगले साल तक इस रैंकिंग में टॉप 50 में शामिल करना है.

मीडिया रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि केंद्र सरकार किसी भी प्रतिक्रिया से पहले विश्व बैंक की इस इंटरनल रिव्यू का इंतजार करेगी. उन्होंने बताया है कि सरकार ने सभी जानकारी पारदर्शी रूप से दिया है जोकि जमीनी बदलावों के आधार पर है. केंद्र सरकार को इस रिव्यू से कोई परेशानी नहीं है.

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