अपने ही देश को लुटा इस महिला ने, पढ़िए इनके बारे में सबकुछ यह | जनता से रिश्ता

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जनता से रिश्ता वेबडेसक | लीक हुए दस्तावेज़ों से पता चला है कि अफ़्रीका की सबसे अमीर महिला इज़ाबेल डॉश सेंटोश ने अपने देश का दोहन करके अरबों दौलत बनाई.

अंगोला के 38 साल तक राष्ट्रपति रहे जॉज़े एडवार्डू डॉश सेंटोश की बेटी ने संदिग्ध सौदे किए, उनको देश की कीमती संपत्तियां ख़रीदने की अनुमति थी. हालांकि, इज़ाबेल ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए इसे अंगोला सरकार की बदले की कार्रवाई बताया है.

इज़ाबेल इस समय ब्रिटेन में रह रही हैं और मध्य लंदन में उनके नाम कई कीमती संपत्तियां हैं.

इज़ाबेल के पास दो अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति बताई जाती है. तो आख़िर इतनी संपत्ति उन्होंने कैसे बना ली? इसको समझने के लिए अंगोला को समझना ज़रूरी है.

दक्षिणी अफ़्रीका में बसे अंगोला के पश्चिम में अटलांटिक महासागर है और यहां की राष्ट्रीय भाषा पुर्तगाली है. इसकी वजह इसका पुर्तगाल का उपनिवेश होना है.

वास्तव में अंगोला की सभ्यता 10 से 15 हज़ार साल पुरानी है. किम्बुडू भाषा में अंगोला का अर्थ राजा होता है. वर्तमान का अंगोला राष्ट्र कभी कांगो साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था. अंगोला प्राकृतिक संसाधनों से भरा हुआ है और इसकी ख़बर जब यूरोप पहुंची तो उनकी नज़र इस पर टिक गई.

16वीं सदी में पुर्तगाल ने लुआंडा को अपना उप-निवेश बनाया. लुआंडा इस समय अंगोला की राजधानी है.

अंगोला का स्वतंत्रता आंदोलन बाकी अफ़्रीकी देशों के स्वतंत्रता आंदोलनों से जुड़ा हुआ है. अफ़्रीका में स्वतंत्रता का आंदोलन 60 के शुरुआती दशक में शुरू हुआ. अंगोला, मोज़ाम्बिक, गिनी बिसाऊ जैसे देश पुर्तगाल के क़ब्ज़े में थे, वहां लोगों के दिमाग़ में यह भर दिया गया था कि पुर्तगाल दुनिया में सबसे शक्तिशाली है और कोई उससे टक्कर नहीं ले सकता.

जॉनस साविम्बी
अंगोला की आज़ादी के बाद देश में विद्रोही नेता जॉनस साविम्बी के नेतृत्व में गृह युद्ध चलता रहा

भारत से अंगोला को मिली प्रेरणा

अफ़्रीका के कई देशों में भारतीय राजदूत रहे दीपक वोहरा कहते हैं कि दिलचस्प बात यह है कि जब दिसंबर 1961 में गोवा में लोगों ने पुर्तगालियों के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ा उसकी प्रतिक्रिया यहां पर हुई.

वो कहते हैं, “अंगोला में यह ख़बर फैल गई कि हिंदुस्तानियों ने गोवा में पुर्तगालियों को हरा दिया है और सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया है. मेरी जब आधुनिक अंगोला के राष्ट्रपिता के तौर पर पहचाने जाने वाले ऑगस्टीनो नेटो से बात हुई तो उन्होंने बताया था कि भारतीयों ने जैसा पुर्तगालियों के साथ किया था उससे हमें प्रेरणा मिली थी. उस समय पुर्तगाल में सलाज़ार की सरकार थी जो एक सैन्य तानाशाह सरकार थी, उसने बेरहमी से प्रदर्शनों को कुचल दिया. अंगोला में जब स्वतंत्रता के लिए हिंसक संग्राम होने लगा तो पुर्तगालियों ने उसे छोड़कर भागना बेहतर समझा.”

1975 में अंगोला को पुर्तगाल से स्वतंत्रता मिल गई जिसमें ऑगस्टीनो नेटो के ‘पॉप्युलर मूवमेंट फ़ॉर द लिबरेशन ऑफ़ अंगोला’ यानी पीएमएलए की बड़ी भूमिका रही. आज़ादी के बाद पीएमएलए के नेता ऑगस्टीनो देश के राष्ट्रपति बन गए. उनका समाजवाद और मार्क्सवाद की ओर झुकाव था.

दीपक वोहरा कहते हैं, “इस झुकाव की वजह से कई पश्चिमी देशों को अचंभा हुआ कि इतने प्राकृतिक संसाधन वाले देश में वो घुस नहीं पाएंगे. इसके बाद इसमें कई बड़ी ताक़तें आ गईं. संयुक्त राष्ट्र, दक्षिण अफ़्रीका और कई यूरोपीय देशों ने ऑगस्टीनो का विरोध किया. देश के मुख्य शहरों के बाहर विद्रोहियों का क़ब्ज़ा चल रहा था. नेटो को सोवियत संघ का समर्थन था और वहां क्यूबा भी सक्रिय था. इस वजह से शीत युद्ध में अंगोला एक जंग का मैदान बन चुका था.”

80 के दशक में कई बड़ी घटनाएं हुईं जिसने अंगोला पर बहुत बड़ा असर डाला. अंगोला का सबसे क़रीबी सोवियत संघ टूट गया. इसके अलावा ऑगस्टीनो नेटो की मॉस्को में कैंसर से मौत हो गई.

नेटो की मौत के बाद जोज़े एडवार्डू सेंटोश राष्ट्रपति बने क्योंकि वो पार्टी में नंबर दो स्थान पर थे और वो बहुत प्रसिद्ध गुरिल्ला कमांडर थे. वो 38 साल तक देश के राष्ट्रपति रहे. हालांकि, देश में विद्रोहियों के साथ गृह युद्ध जारी रहा. 2002 में विद्रोही नेता जोनस साविंबी की मौत के बाद युद्ध विराम लागू हो पाया.

अंगोला के गृह युद्ध
अंगोला के गृह युद्ध में क्यूबा और दक्षिण अफ़्रीका के सुरक्षाबल भी शामिल रहे थे

कैसी है देश की अर्थव्यवस्था

2 फ़ीसदी अंगोला के लोग उस विलासिता में रहते हैं जिसमें कोई बड़ा सा बड़ा अमरीकी या यूरोपीय देश का व्यक्ति भी नहीं रहता होगा. वहीं, 98 फ़ीसदी लोगों के पास कुछ नहीं है.

2.9 करोड़ की आबादी वाले देश में 30 फ़ीसदी जनता ग़रीबी रेखा से नीचे है और ये लोग दिन में 2 डॉलर से भी कम कमाते हैं.

अंगोला अफ़्रीका का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. इसके साथ-साथ उसके पास हीरे का भंडार है. विद्रोही हीरे के पैसों के ज़रिए ही अपना आंदोलन चला रहे थे. हीरे के ज़रिए ही कांगो, रवांडा जैसे कई अफ़्रीकी देशों में विद्रोही आंदोलन देखा जा चुका है जो इसके ज़रिए हथियार ख़रीदते रहे हैं. सात लाख लीक दस्तावेज़ों से पता चला है कि इज़ाबेल ने तेल और हीरे के कारोबार के ज़रिए अरबों डॉलर का अपना व्यवसाय खड़ा किया. इज़ाबेल के बारे में यह खोजबीन इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ़ इन्वेस्टिगेटिव जनर्लिस्ट्स (आईसीआईजे) ने की है.

इज़ाबेल ने अंगोला की सरकारी तेल कंपनी सोनांगोल के ज़रिए भी पैसा बनाया. उनके पिता ने 2016 में इस तेल कंपनी की कमान उन्हें दे दी थी.

इस पर दीपक वोहरा कहते हैं, “अफ़्रीका में ऐसा होता है जब प्राइवेट कॉर्पोरेशन सरकारी संगठनों को अपने क़ब्ज़े में ले लेते हैं, यही अफ़्रीका का दुर्भाग्य है. यही इज़ाबेल सेंटोश ने किया है. वो शानदार व्यक्तित्व की धनी हैं, वो और उनके पति इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं. दोनों ने मिलकर लूटपाट की है.”

अंगोला में 30 फ़ीसदी लोग ग़रीबी रेखा के नीचे ज़िंदगी गुज़र करते हैं
अंगोला में 30 फ़ीसदी लोग ग़रीबी रेखा के नीचे ज़िंदगी गुज़र करते हैं

देश में एक पार्टी प्रणाली

अंगोला में एक पार्टी प्रणाली है. स्वतंत्रता के बाद पीएमएलए ही सत्ता में है जिसका झुकाव वामपंथ की ओर है और इसकी वजह से रूस और चीन उसके क़रीबी रहे हैं. पीएमएलए का विरोध करने वाली पार्टियां बाद में उनके साथ ही जुड़ती चली गईं. दीपक वोहरा इसे ‘लुटेरों का गठबंधन’ कहते हैं.

वो कहते हैं, “पीएमएलए सत्ताधारी पार्टी है और वही एक ऐसी पार्टी का गठन करते हैं जिससे लगे कि उनके सामने विपक्ष है. इस देश में संसद ज़रूर है लेकिन सारी शक्तियां राष्ट्रपति के पास है.”

सितंबर 2017 में जॉज़े एडवार्डू डॉश सेंटोश अपने पद से हट गए जिसके बाद जोआओ लॉरेंकसू नए राष्ट्रपति बने. नई सरकार ने इज़ाबेल के ख़िलाफ़ जांच का वादा किया है और अंगोला की उनकी संपत्ति को ज़ब्त कर लिया है.

तेल और हीरे के अलावा कृषि भी अंगोला की अर्थव्यवस्था में शामिल है. अंगोला की ज़मीन उपजाऊ है और साथ ही उनके पास पानी की कोई कमी नहीं है लेकिन कृषि उद्योग बेहतर नहीं है.

अंगोला का तीन बार दौरा करने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय में अफ़्रीकन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर सुरेश कुमार कहते हैं कि वहां चीन का बहुत अधिक प्रभाव है तेल, हीरे और इन्फ़्रास्ट्रक्चर की कंपनियों में चीन की अधिक कंपनियां हैं.

वो कहते हैं, “मैंने वहां चीन के मज़दूर तक देखे हैं. अंगोला में बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार बहुत अधिक है इसके अलावा वहां पर न ही सार्वजनिक सुविधाएं है और न ही सामाजिक सुरक्षा है. नए राष्ट्रपति लॉरेंकसू ने कहा है कि वो बाहरी लोकतंत्र और बहुदलीय प्रणाली में विश्वास रखते हैं. उन्होंने कहा है कि अंगोला की अर्थव्यवस्था खुले और बाहर के लोग यहां आएं इसके लिए वो काम करेंगे.”

दीपक वोहरा कहते हैं कि इस देश में ग़रीबी बहुत है और ग़रीबी की वजह भ्रष्टाचार है क्योंकि पैसे का निवेश नहीं किया गया बल्कि पैसों को देश के बाहर ले जाया गया.

वो कहते हैं, “कहा जाता था कि इज़ाबेल के पास 4 अरब डॉलर की निजी संपत्ति है और इतने पैसों को शैल और विदेशी कंपनियों के ज़रिए ही देश से बाहर ले जाया गया है. इसके बारे में अंगोला में सब जानते हैं और जो ज़्यादा शोर मचाता था उसे सज़ा दी जाती थी. मैंने भुखमरी देखी है, कुपोषित बच्चे देखे हैं, अस्पतालों में दवाई नहीं हैं लेकिन उनके बिल हैं. इज़ाबेल और उनके भाई के क़िस्से आम हैं वो सीधा बड़े अफ़सरों और मंत्रियों को ख़ुद आदेश दिया करती थीं वरना उन लोगों को जेल में डाल दिया जाता था.”

दीपक वोहरा कहते हैं कि अफ़्रीका में एक चलन है कि हर कोई इंतज़ार करता है कि वो सत्ता में आए और उसके बाद वो पैसा बनाएगा, जॉज़े एडवार्डू डॉश सेंटोश का ही आदमी अब राष्ट्रपति बना है और कहा जाता है कि वो भी उसी तरह से काम करेंगे.

अंगोला की स्थिति कैसे सुधरेगी

अंगोला में तेल और हीरा होने के बावजूद भी वो बेहद पिछड़ा है. उसमें सुधार कैसे हो पाएगा?

प्रोफ़ेसर सुरेश कुमार कहते हैं कि अंगोला जब तक बंद अर्थव्यवस्था बनकर रहेगा तब तक उसका विकास होना मुश्किल है इसीलिए उन्हें फ़्री ट्रेड ज़ोन बनाने पड़ेंगे जिससे वहां के कुशल युवक को रोज़गार के अवसर मिले.

वहीं, दीपक वोहरा कहते हैं कि अंगोला में बहुत क्षमताएं हैं वहां कई प्राकृतिक संसाधन हैं लेकिन सिर्फ़ कुशासन की वजह से सब बर्बाद है.

वो कहते हैं, “अफ़्रीका की समस्या बुरा शासन, बुरा नेतृत्व और बहुत सारे प्राकृतिक संसाधानों का होना है. अगर यह नेता यह सोचते कि उनके बाद दूसरे नेता देश चलाएंगे तो सब अफ़्रीकी राष्ट्र तरक़्क़ी कर रहे होते लेकिन किसी भी नेता ने चुपचाप सत्ता नहीं छोड़ी.”

प्रोफ़ेसर सुरेश कुमार कहते हैं, “उनका कृषि क्षेत्र बहुत पिछड़ा हुआ है. वहां कि सरकार और कंपनियों का ध्यान तेल और हीरे की अर्थव्यवस्था पर है. कृषि क्षेत्र में सुधार से अंगोला जो खाने की चीज़ें आयात कर रहा है, उसमें कमी आएगी, एक उद्योग खड़ा होगा इसके कारण एक बैलेंस्ड अर्थव्यवस्था बनेगी.”

“अंगोला एक प्रतिभाशाली देश है. आर्थिक विकास के कई आयाम हैं. इस देश को चाहिए कि वो राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में तब्दीलियां लाए. बहुदलीय राजनीतिक प्रणाली के साथ-साथ अपनी अर्थव्यवस्थाओं को दूसरे देशों के लिए खोले. राजनीतिक अर्थव्यवस्था को दुनिया के साथ मिलाकर चलेगा तो उससे उसे लाभ होगा.”

अंगोला में इतने सुधार कैसे हो पाएंगे यह तो नए राष्ट्रपति की इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है लेकिन इससे पहले अफ़्रीका की सबसे अमीर महिला के ख़िलाफ़ अंगोला सख़्त होता दिख रहा है.

देश के प्रोसिक्यूटर जनरल ने वादा किया है कि इज़ाबेल को वापस स्वदेश लाने की सभी कोशिशें की जाएंगी.

वहीं, पुर्तगाली बैंक यूरोबिक ने इज़ाबेल से सभी व्यापारी रिश्ते तोड़ने की घोषणा की है. इस बैंक में अप्रत्यक्ष रूप से इज़ाबेल की 42.5 फ़ीसदी हिस्सेदारी थी.