आत्माओं से बात करने के लिए इन उपायों का होता है प्रयोग, ऐसे बाते करती हैं आत्मा । जनता से रिश्ता

जनता से रिश्ता वेबडेस्क।  जीवन और मृत्यु का रहस्य बेहद उलझा हुआ है। हर व्यक्ति जीवन के बाद की स्थिति जानना चाहता है। कुछ लोगों के मन में परलोक गई आत्माओं से बात करने की तीव्र चाहत होती है। इसके लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं। ये तरीके कितने सही और कितने गलत हैं यह पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता है।

विज्ञान तो इन पर यकीन ही नहीं करता है लेकिन लोगों का अपना मन और मत है कि इन तरीकों से वह परलोक गत आत्माओं से संपर्क कर सकते हैं। आइए देखें किन-किन तरीकों से लोग आत्माओं से संपर्क बनाते हैं। वैसे आपको बता दें कि पाश्चात्य जगत में इन उपायों पर लोगों का काफी यकीन रहा है। मृत्यु के पार नामक पुस्तक में स्वामी अभेदानंद ने भी कुछ उपायों का जिक्र किया है।

बात करने का जरिया है ओइजा बोर्ड

भूत-आत्माओं से बात करने के लिए एक सादी कागज की चिट और ओइजा बोर्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल यह एक दिल के आकार का दिखने वाला लकड़ी का टुकड़ा होता है। इसको व्यवस्थित करने के बाद आत्मा का एकाग्रता और शांति से ध्यान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब बुलावे पर आत्मा आ जाती है तो ओइजा बोर्ड में में हरकत होने लगती है।

गुड़िया के शरीर में आ जाती है आत्मा

प्राचीन इंडोनेशिया के लोग जेलंगकुंग विधि के माध्यम से आत्माओं को बुलाने का प्रयास करते थे। आत्माओं से संपर्क करने की इच्छा रखने वाले 3 से 5 लोग एक कमरे में होते हैं। इनमें दो लोग बांस से बने एक पुतले को पकड़ कर बैठते हैं। आत्माओं को बुलाने से पहले धूप अगरबत्ती जलाकर कुछ मंत्र पढ़े जाते हैं। माना जाता है कि मंत्रों के प्रभाव से आस-पास से गुजर रही आत्मा पुतले में चली आती है और पुतले का वजन बढ़ जाता है।इंडोनेशिया के लोगों का मानना है कि इस माध्यम से आत्माओं को बुलाना खतरनाक होता है, यह तरीका वैज्ञानिक नहीं है। आमतौर पर तांत्रिक और जादू टोना करने वाले लोग इस विधि का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए इस तरह की चीजों पर वैज्ञानिक दृष्टि से यकीन करना उचित नहीं है।

टेबल पर आती है आत्मा

इस विधि में एक तीन पैर की टेबल अथवा मेज का प्रयोग करते हैं। यह मेज हल्की और गोल होती है। इसके एक पाए के नीचे लकड़ी का एक गुटका रखते हैं। इसके बाद टेबल के चारों ओर लोग बैठ जाते हैं। फिर जिस व्यक्ति की आत्मा को बुलाना होता है सब लोग उसको मन में याद करते हुए ध्यान करते हैं। माना जाता है कि जब अपने आप टेबल के पाए खटखटाने लगती है तो आत्मा आ चुकी है। इसके बाद उससे बातचीत की जाती है। हालांकि विशेषज्ञ इस विधि को प्रमाणिक नहीं मानते हैं।

जीवित व्यक्ति के अंदर आती है आत्मा

आत्माओं से संपर्क करने के लिए किसी व्यक्ति को माध्यम बनाकर उसमें आत्मा को बुलाया जाता है और फिर उससे सवाल जवाब किए जाते हैं। किसी माध्यम के द्वारा भूतों से संपर्क किया जा सकता है। इस विधि में आत्मा बोलकर या पेंसिल से लिखकर अपने जवाब देती है हालांकि कई बार आत्मा शरीर से निकलना नहीं चाहती है ऐसे में जिस भी व्यक्ति के शरीर में आत्मा आती है उसको हानि पहुंच सकती है। इसलिए बिना किसी पैरानॉमल एक्सपर्ट के साथ के ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।

वशीकरण से भी बातें करती हैं आत्मा

ऐसा भी माना जाता है कि चेतन या होश में आत्माओं से बात करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन किसी को वश में करके यानी हिप्नोटॉइज करके आत्माओं से बात की जा सकती है फिर आत्माओं से संपर्क होने के बाद वह व्यक्ति उनसे अपने प्रश्न पूछ सकता है। ऐसा माना जाता है कि यदि किसी की आत्मा हिप्नोटिजम से आती हैं, तो वह अपनी मर्जी से वापस भी चली जाती हैं। इस तरह से व्यक्ति व्यक्ति खुद भी आत्मा से बात कर सकता है लेकिन किसी विशेषज्ञ की निगरानी में किया जाना चाहिए क्योंकि कई बार व्यक्ति बहुत डर जाता है और उनका मन और दिमाग पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।

रिकॉर्ड होती हैं भूत की आवाजें

आत्मा से संपर्क करने का एक माध्यम यह भी है जिसका यूरोप में काफी इस्तेमाल किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉयस प्रोजेक्शन यानि ईवीपी नाम की एक मशीन में आत्मा की आवाज रिकॉर्ड होने की बात कही गई है। ईवीपी को पूरी दुनिया में आत्मा को खोजने और उनसे बात करने का एक मजबूत जरिया माना जाता है। पुराने समय में एक डॉक्टर ने कई ऐसी रिकॉर्डिंग पेश की थी। इस डॉक्टर का दावा था कि उसने हिटलर, स्टालिन, मुसोलिनी के साथ कई जानी-मानी हस्तियों के साथ बातचीत की है।