सरकार ने इकोनॉमी को गति देने वाले सेक्टर्स को दिए पैसे, मांग बढ़ाने पर है सरकार का जोर | जनता से रिश्ता

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | सरकार की तरफ से दिए गए राहत पैकेज में पैसा उसे दिया गया जो इकोनॉमी को ट्रिगर कर सके। सरकार का मकसद ठप पड़ी अर्थव्यवस्था को शुरू करना है। यही वजह थी कि पैकेज की घोषणा से पहले हर स्तर पर सभी सेक्टर के साथ कई राउंड की विस्तृत बैठक की गई। वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने यह भी बताया कि अभी टूरिज्म जैसे कई सर्विस सेक्टर के बारे में कहा जा रहा है कि उनके लिए कुछ नहीं किया गया, लेकिन ऐसा नहीं है। इस पैकेज से वे भी लाभ ले सकते हैं। उस सेक्टर के उद्यमी भी अपने वर्किग कैपिटल की सीमा को बढ़ा सकते हैं। अपने टर्म लोन को बढ़ा सकते हैं। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार कदम-दर-कदम चलना चाहती है। इकोनॉमी को ट्रिगर कराना पहला मकसद था। इकोनॉमी के ट्रिगर होने पर अन्य सेक्टरों पर ध्यान दिया जाएगा।

नहीं बढ़ेंगी गैर आवश्यक वस्तुओं की जीएसटी दरें

वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक अगले महीने होने वाली वस्तु व सेवा कर (GST) काउंसिल की बैठक में गैर-आवश्यक श्रेणी की वस्तुओं की जीएसटी दरें नहीं बढ़ेंगी। पिछले कुछ दिनों से आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक में कुछ गैर आवश्यक वस्तुओं की जीएसटी दरों में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा था, ताकि सरकार का टैक्स कलेक्शन बढ़ सके। वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक अभी के हालात में किसी भी वस्तु पर दर बढ़ाना वाजिब नहीं है। दर बढ़ने से वह वस्तु महंगी होगी और इससे मांग पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। अभी मांग को बढ़ाने की जरूरत है, उसे कम करने की नहीं। हालांकि सूत्रों की तरफ से यह भी कहा गया कि जीएसटी दरों में बदलाव का फैसला जीएसटी काउंसिल करती है। 

जून के दूसरे सप्ताह में जीएसटी काउंसिल की बैठक होने की संभावना है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कोरोना व लॉकडाउन की वजह से नौकरी खोने वाले श्रमिकों का आंकड़ा श्रम मंत्रालय से मांगा गया है और उनके बारे में भी जानकारी मांगी गई है जिन्हें इस दौरान सैलरी नहीं दी गई। वित्त मंत्रालय का मानना है कि श्रमिकों की कमी से आर्थिक गतिविधियों पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा। चाहे वह कोई भी सेक्टर हो। 

मैन्यूफैक्चरिंग 30-35 फीसद तक शुरू 

सूत्रों के मुताबिक आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू हो रही है। मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत 30-35 फीसद तक हो चुकी है। जहां श्रमिकों की कमी है, वहां स्थानीय श्रमिकों की भर्ती की जा रही है। 

चार लाख करोड़ के मंजूर लोन का अभी भुगतान नहीं

सूत्रों के मुताबिक सरकार लॉकडाउन आरंभ होने के पहले से ही सरकारी बैंकों को कर्ज बढ़ाने के लिए कह रही थी और उसका नतीजा यह हुआ कि बैंकों की तरफ से चार लाख करोड़ के लोन आवंटन की मंजूरी दी गई। लेकिन लोन लेने वाले उद्यमियों ने लॉकडाउन की वजह से भुगतान लेने से फिलहाल मना कर दिया।