रायपुर : अस्तित्व के लिए जूझते सिनेमाघरों को लॉकडाउन का दोहरा मार

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। रायपुर। कोरोना के दौर में जहाँ हर कारोबार और कारोबारियों को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा हैं, वहीं इस संकट की मार से सिनेमाघर भी अछूता नहीं हैं। आज पूरे देश में कोरोना संक्रमण फ़ैल गया है और अपना एक विस्तृत जाल बना चुका हैं, इस संक्रमण से लड़ने के लिए केंद्र सरकार ने 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया हैं। लॉकडाउन के पहले भी सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर मल्टीप्लेक्स से अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रहे थे। मगर लॉकडाउन के दौरान सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर अब पूरी तरह से डूबने की कगार पर हैं। फ़िल्म ऐसोसिएशन के कारोबारियों ने बताया कि अगर लॉकडाउन ख़त्म नहीं हुए तो सिनेमाघरों में काम करने वाले श्रमिकों पर भी विकट आर्थिक संकट आने वाला हैं। सिनेमाघर एसोसिएशन के लोगो की मांग हैं कि सरकार जो नियम सभी कारोबारियों के लिए लागू की हैं उन्ही नियम और शर्तों से उन्हें भी सिनेमाघरों को खोलने की अनुमति प्रदान करें।

सिनेमाघर बंद, कमाई शून्य, खर्चे पहले जैसे : जनता से रिश्ता के संवाददाता ने श्याम टॉकीज के मालिक लाभांश तिवारी से की ख़ास बातचीत जिसमें उन्होंने बताया कि आज पूरे छत्तीसगढ़ में 57 जगहों पर फ़िल्में लगती हैं। जिस्मने 119 स्क्रीन हैं चाहे वो सिनेमाघरों की बात करें चाहे मल्टीप्लेक्स की सब की इतनी ही सीमा बनी हुई है। 15 मार्च से जो सिनेमाघरों के लिए लॉकडाउन लगाए गए इसकी वज़ह से काफी नुकसान उठाना पड़ा सिनेमाघरों को। लाभांश तिवारी ने बताया कि 15 मार्च पर कई बॉलीवुड और अच्छी कलाकारों की फ़िल्में आई मगर लॉकडाउन लगने की वज़ह से ये फ़िल्में अपना प्रदर्शन नहीं दे पाई। 15 मार्च में बागी 3, अंग्रेजी मीडियम जो की उस वक़्त चल रही थी। और 83 जो भारत के इतिहास की सबसे यादगार पलों की फ़िल्म थी। जिस फ़िल्म में 1983 के वर्ल्ड कप का वो दौर देखने को मिलता लोगों को ये फ़िल्म भी 10 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली थी मगर लॉकडाउन के कारण ये फ़िल्म अपना जलवा लोगो को नहीं दिखा पाई। इसी कड़ी में वरुण धवन की कुली नं 1 आने वाली थी। और अक्षय कुमार की फ़िल्म सूर्यवंशी और हॉरर फ़िल्म लक्ष्मी बॉम और सलमान खान की राधे ये फ़िल्में बॉक्स ऑफिस को हिट देने की हालात बना चुकी थी मगर लॉकडाउन के चलते फिल्मों की तारीख आगे बढ़ गई। जिससे सिनेमाघरों को मोटी रकम का नुकसान हो गया। श्री तिवारी ने पिछले ढ़ाई महीनों में नुकसान के आंकड़ों को साफ़ तौर पर बताया कि पूरे सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स को 8 करोड़ का नुकसान हुआ। और इसकी भरपाई का भी कोई बेहतर साधन नहीं दिख रहा हैं। जिससे सभी सिनेमाघर के कारोबारी इसकी भरपाई कर सकें।

ओ.टी.टी प्लेटफॉर्म लंबी रेस का घोड़ा नहीं : सिनेमाघरों के कारोबारियों का ये मानना हैं कि जो ऑनलाइन आजकल मोबाइल पर फ़िल्में आती हैं, वो ज़्यादा कमाने का जरिया नहीं बना पाते इसलिए ओ.टी.टी प्लेटफॉर्म एक लंबी रेस का घोड़ा नहीं कहा जा सकता। और सिनेमा ऐसोसिशन के कारोबारियों का ये भी मानना हैं कि एक मध्यम वर्ग परिवार अपने परिवार के साथ सिनेमा घर में बैठकर बड़े पर्दे पर फ़िल्म देखना पसंद करते हैं, ना कि मोबाइल के छोटे स्क्रीन में और लोग बड़े पर्दों पर फ़िल्म का सही आनंद उठा पाते हैं ना कि मोबाइल में। 

ओ.टी.टी प्लेटफॉर्म में लगने वाली बॉलीवुड फ़िल्में : फ़िल्म जगत के कारोबारियों ने बताया कि ओ.टी.टी प्लेटफॉर्म में हाल ही में आयुष्मान खुराना की फ़िल्म गुलाबों सिताबों लगने वाली हैं। और विद्याबालन की फ़िल्म शंकुंतला देवी जो ओ.टी.टी प्लेटफॉर्म में लगने जा रहीं हैं।

फ़िल्म ऐसोसिशन की मांग, सिनेमाघर शुरू किये जाए : फ़िल्म ऐसोसिशन के कारोबारियों ने सरकार से मांग की हैं कि सिनेमाघरों को भी बाकि व्यापार की तरह से उद्योग का एक साधन समझकर सिनेमाघर शुरू किए जाये। और सिनेमाघरों के कारोबारियों ने बताया कि उनकी सरकार से 3 विशेष मांगे हैं जिसका सरकार जल्द से जल्द सुध ले। 

सिनेमाघरों की मांग : 1. सिनेमा को उद्योग का दर्जा दिया जाए। 
2. सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर बहुत आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा हैं जिसके लिए राज्य सरकार बिजली बिल का अतिरिक्त शुल्क कम करें। 
3. बाकि व्यापार की तरह सिनेमाघरों को भी दिन में सिर्फ़ दो शो लगाने की अनुमति दें।