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शुक्र ग्रह पर हालात बहुत ही ज्यादा खतरनाक फिर भी क्यों जीवन के संकेत खोज रहे हैं वैज्ञानिक

Janta se Rishta
13 Sep 2020 4:59 PM GMT
शुक्र ग्रह पर हालात बहुत ही ज्यादा खतरनाक फिर भी क्यों जीवन के संकेत खोज रहे हैं वैज्ञानिक
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क| लंबे समय से वैज्ञानिक इस बात पर एकमत हैं कि शुक्रग्रह (Venus) पर जीवन के अनुकूल (Habitable) नहीं बल्कि बहुत ज्यादा विपरीत परिस्थितियां हैं. शुक्र को एक बहुत ही जरहीला, अत्याधिक गर्म ग्रह (Planet) पाया गया है और इस बात के बहुत पुष्ट प्रमाण बार मिलते ही जा रहे हैं. वहां के नर्क जैसे हालात में किसी भी तरह का प्राणी (organism) जीवित नहीं रह सकता है. फिर भी हाल का शोध यह सुझा रहा है कि शुक्र ग्रह पर एक जगह सूक्ष्म जीवन (Microbial Life) हो सकता है.

कहां है सूक्ष्म जीवन की उम्मीद
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं को लगता है कि शुक्र ग्रह के तपते और जहरीले वायुमंडल में कहीं सूक्ष्म जीवन हो सकता है. शुक्र ग्रह की सतह के बारे में माना जाता है कि वहां का तापमान 800 डिग्री फेहरनाइट तक चला जाता है, लेकिन फिर भी शोधकर्ताओं का मानना है कि शुक्र के वायुमंडल में कुछ सतहें ऐसी हैं जो ठीकठाक हो सकती हैं.

और नासा का यह प्रस्ताव
नासा ने एक भी एक प्रस्ताव किया था जिसके तहत एक तरह का बादलों का शहर शुक्र ग्रह पर बनाया जा सके. इसके वहां एक ऐसा उपकरण भेजा जाए जिसे 30 मील की ऊंचाई तक लटकाया जा सकता है. शुक्र की सतह के हालात पृथ्वी के जैसे ही माने जाते हैं. इसके अलावा यह भी माना जाता है कि पृथ्वी के बाद शुक्र ही सौरमंडल मे ऐसा ग्रह है जहां जीवन के अनुकूल हारात हो सकते हैं.

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शुक्रग्रह (Venus) को पृथ्वी (Earth) के बाद सौरमंडल (Solar System) के ऐसा ग्रह माना जाता है जहां जीवन होने की संभावना सबसे ज्यादा हो सकती है.

ऐसा क्यों कहा जाता है शुक्र के बारे में
शुक्र ग्रह की तरह अन्य ग्रहों पर भी हालात बहुत ही ज्यादा खराब हैं. अगर हमारे सौरमंडल की बात की जाए तो केवल पृथ्वी, मंगल और शुक्र ग्रह ही पथरीले ग्रह हैं और सूर्य से इतनी दूर है कि वहां जीवन मुमकिन हो सकता है. दूसरी ओर शुक्र पर वायुमंडल है जहां दबाव और अधिक तापमान की मौजूदगी है.

तो मंगल में क्या है कमी
मंगल ग्रह में वायुमंडल नहीं के बराबर है. वहां का तापमान बहुत कम है. यही वजह है कि अगर मंगल पर कहीं पानी भी होगा तो बर्फ के रूप में ही होगा. मंगल पर जो पानी के बहने के निशान दिखाई देते हैं वे वास्तव में ग्लेशियर यानि हिमनदों से बने हैं ऐसा एक शोध ने पता लगाया है.

कई समस्याएं भी हैं शुक्र के साथ
लेकिन तमाम अनुकूल बातों के साथ ही कुछ गंभीर समस्याएं भी हैं. शुक्र ग्रह पर केवल सांस लेने योग्य हवा ही नहीं है बल्कि वहां के वातावरण में सल्फ्यूरिक ऐसिड के वाष्प हैं. ऐसे में अगर वहां जीवन पहुंचा भी दिया जाए तो समस्या हो जाएगी. इसके अलावा शुक्र ग्रह की सतह पर वायुमंडलीय दाब बहुत ही ज्यादा है ऐसा लगेगा की हम पानी के कई किलोमीटर नीचे दबे हैं.

यह भी कहा गया कि
कई साल पहले साल 1967 में कार्ल सीगन ने शुक्र ग्रहों पर बादलों के जीवन की कल्पना की थी. फिर कुछ साल पहले शोधकर्ताओं ने सुझाया था कि जब शुक्र ग्रह को देखा जाता है तब अजीब से पैटर्न दिखाई देते हैं. ऐसा लगता है कि वहां के वायुमंडल में एल्गी या बैक्टीरिया हैं. लेकिन इस बात की पुष्टि कभी भी नहीं हो सकी है. ना ही इनके समर्थन के कोई संकेत.

तो कहां हो सकता है शुक्र पर सूक्ष्मजीवन
हाल ही में प्रकाशित इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता और खगोलविद सारा सीगर ने शुक्र पर जीवन चक्र का अनुमान लगाया है. सीगर और उनके साथियों का कहना है कि सूक्ष्मजीवी शुक्रग्रह के वायुमंडल मे तरल बूंदों में पाए जा सकते हैं. लेकिन ये बूंदें ज्यादा समय तक स्थिर नहीं रह पातीं क्योंकि इतनी बड़ी हो जाती हैं कि शुक्र के गुरुत्व से नीचे गिर जाती हैं.

तार्किक रूप से यह कितना ही संभव क्यों न हो. इसकी पुष्टि आवश्यक है इसके अलावा नासा वैराइटिस नाम का अभियान शुक्र और उसके बादलों के अध्ययन के लिए भेजने की तैयारी कर रहा है. तब इस शोध की पुष्टि शायद हो सकती है.

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