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COVID-19

वैज्ञानिकों ने ढूंढा कोरोनो वायरस का बेस्ट 'टेस्टिंग मेथड', एक बार में 48 से ज्यादा लोगों का होगा परीक्षण

Janta se Rishta
22 Aug 2020 2:55 PM GMT
वैज्ञानिकों ने ढूंढा कोरोनो वायरस का बेस्ट टेस्टिंग मेथड, एक बार में 48 से ज्यादा लोगों का होगा परीक्षण
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। यरूशलेम. एक मां के सवाल से प्रेरित होकर पूरे इज़रायल में एक नए मेथड को लागू किया जाएगा. यह विधि इस साल सर्दियों से पहले अपनाई जाएगी, जब फ्लू का मौसम आने ही वाला होगा. यह विधि जल्द ही अमेरिका को भी भेजी जाएगी. दरअसल तीन इजरायली वैज्ञानिकों की एक टीम (Three Israel Scientist) ने कोरोनो वायरस टेस्टिंग (Coronavirus testing) प्रक्रिया की दिशा में एक नई खोज की है. उनके अनुसार, उनकी टेस्टिंग प्रक्रिया अभी तक की सभी टेस्टिंग प्रक्रियाओं में सबसे तेज और सबसे सक्षम है. यह टेस्टिंग प्रक्रिया एक बार में 48 से अधिक लोगों के नमूनों (More than Fourty eight People tested) का परीक्षण कर सकती है.

देश की 12 प्रयोगशालाओं में लागू करने की है योजना

इजरायल की सरकार ने अक्टूबर तक देश भर की 12 प्रयोगशालाओं में नए मेथड को लागू करने की योजना बनाई है. यह आशंका जताई जा रही है कि कोरोना वायरस की अगली लहर और इन्फ्लूएंजा का मौसम एक साथ आ सकता है, जिसके घातक परिणाम होंगे.

इंजीनियर रोनेन कर रहे हैं इस पायलट प्रोजेक्ट की देखरेख
रक्षा मंत्रालय के एक इंजीनियर रोनेन वालफिस्क इस मेथड की क्षमता और प्रभाव को जांचने से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट की देखरेख कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम कोरोना से लड़ने को तैयार रहने के लिए जो कुछ कर सकते हैं, सब कर रहे हैं और हमने यह सफलतापूर्वक पास कर लिया है.

पूल्ड -टेस्टिंग मेथड

हाइफ़ा में रामबाम हेल्थ केयर कैंपस में वायरोलॉजी लैब चलाने वाले मोरान ज़्वैकवॉर्ट कोहेन ने कहा कि मंगलवार को इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा क्लीनिकल इस्तेमाल के लिए औपचारिक रूप से अनुमोदित यह नया पूल्ड -टेस्टिंग मेथड अब तक की तुलना में कहीं अधिक तेजी से स्कूलों, स्कूलों, कॉलेज परिसरों, व्यवसायों और एयरलाइंस में जल्दी और बड़ी संख्या में टेस्टिंग कर भीड़ को कम कर सकता है.

इस टेस्टिंग का ध्यान अमेरिका ने खींचा

बड़ी संख्या में की जाने वाली इस टेस्टिंग ने अमेरिका का ध्यान भी अपनी तरफ आकर्षित किया है क्योंकि वहां लैब आदि में टेस्टिंग के लिए सैंपलकी बाढ़ आई हुई है और वहां लोग इन समस्याओं से जूझ रहे हैं. अन्य जगहों पर हो रहे अधिकांश सामूहिक टेस्टिंग के प्रयास उस सरलीकृत दृष्टिकोण पर निर्भर हैं, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध में जवानों पर सिफलिस के टेस्ट किये जाते थे. वह मेथड एक अर्थशास्त्री डोरफ़मैन के नाम पर रखा गया था जिसमें एक ही बार में बहुत से लोगों के नमूने लिए जाते थे और अगर सामूहिक टेस्ट का रिजल्ट नेगेटिव आया तो सभी को नेगेटिव मान लिया जाता था और अगर सामूहिक टेस्ट का रिसल्ट पॉजिटिव आया तो सभी से दुबारा नमूना लिया जाता था, जिससे यह जांचा जा सके कि कौन कौन पॉजिटिव है.

इसके उलट इजरायल मेथड में टेस्टिंग के केवल एक दौर की आवश्यकता के अनुसार डिज़ाइन किया गया है जिससे समय, प्रयोगशाला से जुड़े काम और आपूर्ति में एक महत्वपूर्ण बचत होगी. शुक्रवार को साइंस एडवांस में प्रकाशित एक अध्ययन में डॉ नेओम शैंटल (ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ़ इजरायल) और उनके सहयोगियों, टोमर हर्ट्ज और एंजेल पोर्गडोर(बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव) ने बताया कि उनकी विधि- पी-बेस्ट (P-Best) जिसे पूलिंग-आधारित कुशल सार्स के लिए पी-बेस्ट कहा जाता है- जो पूलन आधारित सक्षम SARS-CoV-2 टेस्टिंग है, ने CoV-2 परीक्षण - 48 नमूनों के बीच में से कोरोना पॉजिटिव का पता लगाया. इस अध्ययन में पाया गया कि इस विधि के द्वारा सिर्फ 144 परीक्षणों में 1,115 स्वास्थ्य कर्मचारियों की जांच हुई और सटीक रिसल्ट प्राप्त हुई.

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