स्कूली बच्चे भी करने लगे राजनीति |जनता से रिश्ता

> छात्र संगठन स्कूलों में अवयस्क बच्चों को बरगला रहे, बिगड़ रहा माहौल
जसेरि रिपोर्टर
रायपुर।
राजधानी में इन दिनों राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़े कुछ छात्र संगठन स्कूल में पढऩे वाले हाई व् हायर सेकेंडरी क्लास में पढऩे वाले बच्चो को अपने राजनितिक गतिविधियों में शामिल कर रहे है जिससे न केवल सिर्फ स्कूल का माहौल बल्कि सामाजिक स्तर पर भी इन बच्चो पर गलत संदेश जा रहा है। दरअसल, प्रदेश में कुछ राजनितिक पार्टियों के अलग-अलग छात्र संगठन के विंग है जो समय-समय पर अपने स्तर पर विधार्थियो के लिए आवाज उठती है लेकिन अब इस छात्र संगठन में विशवविद्यालय और कॉलेज के स्टूडेंट्स के अलावा स्कूल में पढऩे वाले आठवीं से लेकर बारहवीं तक के बच्चो को भी इसे जोड़ा जा रहा है। किशोरावस्था को शामिल करने से इसका दुष्प्रभाव भी शहर के ही स्टूडेंट्स में देखने को मिला रहा है। स्टूडेंट्स लाइफ में दोस्तों के साथ पढ़ाई और अन्य एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज करने की जगह आपस में गुटबाजी और दुश्मनी जैसे माहौल बन रहे है. वही ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर स्कूल प्रशासन अपने वही पुराने ढर्रे पर काम कर रहा है जो सोचनीय है? स्कूल में पढऩे वाले स्टूडेंट्स कुछ छात्र-संगठन से जुड़ कर भटक रहे है।इतना ही नहीं राजनितिक गतिविधियों में शामिल हो रहे इन बच्चो के रवैये भी घर-बाहर बदले हुए रहते है साथ ही नए-नए शौक भी इनमे बढ़ रहे है।
फोटो विथ राजनितिक लीडर का फितूर : बढ़ते स्मार्टफोन के यूज़ के साथ ही बच्चो में सभी सोशल प्लेटफॉर्म पर अपनी अकाउंट बनाने से लेकर उसपर नयी-नयी तस्वीरें अपलोड करने के लिए होड़ मची हुई है। इतना ही नहीं इन बच्चो के दिल -दिमाग पर सोशल मीडिया पर रोज कुछ हटकर तस्वीरो पर मिलने वाली लाइक और कमेंट मिलने की भी एक अलग से होड़ रहती है। वही स्टूडेंट्स अपनी स्कूल बंक कर अपने पसंदीदा राजनितिक पार्टियों के गतिविधियों में भी अधिक से अधिक शामिल होने का जूनून सवार है इतना ही नहीं अपने साथ अन्य स्टूडेंट्स को भी साथ लेजाने का जिम्मा भी उठा रहे है। सेल्फी या फोटो विथ राजनितिक लीडर के हस्टाग के साथ सोशल अकाउंट में तस्वीरें डालने का फितूर भी इन बच्चो पर हावी होता जा रहा है। इस तरह के तस्वीर से वे अन्य बच्चो के बीच लोकप्रिय बनने की कोशिश कर रहे है। इसके साथ ही गलियों और चौक -चौराहो पर अपनी पोस्टर -बैनर लगाने का भी क्रेज़ चल रहा है।
संगठनो मे जुडऩे -जोडऩे और जुड़वाने का खेल : इन दिनों रायपुर में कॉलेज से ज्यादा स्कूल के बच्चो को संगठन से जोडऩे का टारगेट भी छात्र नेताओ को दिया जा रहा है। कम उम्र में पढ़ाई से मन हटाकर यह बच्चे संगठन से जुडऩे जोडऩे और अधिक से अधिक अपने साथियो को संगठन से जुड़वाने में लगे हुए है। स्कूल संतान के नेता इन बच्चो को संगठन से जुडऩे के लिए पैसे और इन्हे बड़े लीडर से मिलवाने का लालच देकर इन्हे जोड़ रहे है। इतना ही नहीं इन बच्चो से अपने साथियो और संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए पैसे भी देते है जिससे कुछ बच्चे नशे जैसे गलत संगत को पकड़ रहे है।
पासआऊट नेताओ का स्कूलों में अनाधिकृत प्रवेश
राजधानी के कॉलेजो में पढऩे वाले स्टूडेंट्स की मदद करने और उनके मसीहा बनने वाले पासआउट छात्र नेता अब स्कूलों में भी अपनी टीम को लेकर पहुँचते है और वहां के बच्चो को टारगेट बना रहे है। इतना ही नहीं स्कूल में यदि कोई टीचर बच्चे के अनुशासन में रहने के लिए उन्हें बाहर कर देते है क्लास से तब यह पासआउट छात्र-संगठन के नेता वहां पहुँच टीचर को धमकी-चमकी लगाते है जिसे देख बच्चो का टीचर के साथ बदतमीज़ी करने का साहस बढ़ रहा है। और यह पासआउट नेता इन बच्चो के रोल मॉडल बन रहे है।
पालक है परेशान
कोटा निवासी शोभा खोब्रागडे ने बताया उनका एक ही लड़का है जिसे वे बड़े स्कूल में पढ़ा रहे है लेकिन बच्चा इन दिनों हुए पार्षद चुनाव के प्रचार -प्रसार में लगा हुआ था जिससे उसके मिड टर्म के परीक्षा में बहुत ही कम मार्क्स आये है। इतना ही नहीं यदि वे अपने बच्चे को कुछ बोलते है तो वह आक्रामक होकर घर से निकल जाता है और देर रात घर में आता है। सूंदर नगर निवासी आस्था खूंटे ने बताया की ,उनके 2 जुड़वाँ लड़के है जो अभी कॉलेज में फर्स्ट ईयर में पढ़ाई कर रहे है। कॉलेज मैनेजमेंट की तरफ से शिकायत मिली की यह कॉलेज में कम अटेंडेंस है तब पता चला ये कॉलेज पढऩे के बजाय कुछ छात्र नेताओ के साथ घूमने जाते है और उनके जैसा राजनिति के क्षेत्र में लीडर बनना चाहते है । फाफाडीह निवासी गुरमीत नारंग ने बताया कि ,कॉलेज में छात्र संगठन का काम या वहाँ बच्चे उनसे जुड़ते तो बात अलग है क्योंकि वे परिक्व रहते है ।लेकिन अब स्कूल के लिए अध्यक्ष बनाये गए है जो इन्हें अपने साथ जोड़े ।
प्रशासन नही बरत रहा सख्ती
स्कूलो में बे -रोक-टोक राजनीतिक दलों के छात्र संगठन बच्चो के बीच पार्टी का प्रचार-प्रसार करने से लेकर मासूमो को अपने संगठन में जोडऩे के लिए हर संभव कोशिश करते है । हाई स्कूल और हायर सेकंडरी क्लास में पढऩे वाले स्टूडेंटस के परीक्षा में इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है ऐसे में स्कूल प्रशासन को इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों पर सख्ती से कार्यवाई करनी चाहिए लेकिन शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी इस पर मौन साधे हुए है जो एक चिंता का विषय है।
संज्ञान में आया है, जांच करेंगे
इस विषय में मुझे जानकारी मिली है अब संज्ञान में आया है और स्थिति-परिस्थिति देखते हुए जल्द ही इस पर स्कूलों में जांच के निर्देश दिया जायेगा और जानकारी सही पाए जाने पर सख्ती भी बरता जायेगा।

  • जी.आर चंद्राकर, जिला शिक्षा अधिकारी