क्वालिटी टेस्ट में फेल हुए सैंपल, अब दूध पीना भी हो सकता है जानलेवा

जनता से रिश्ता वेबडेस्क:-खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने एक अध्ययन में कहा कि प्रमुख ब्रांड सहित विभिन्न कंपनियों के कच्चे दूध और प्रसंस्कृत दूध के नमूने निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे।भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकार के मुख्य कार्याधिकारी पवन अग्रवाल ने शुक्रवार को अपने अध्ययन को जारी करते हुए कहा कि मिलावट से ज्यादा दूध का दूषित होना एक गंभीर समस्या है क्योंकि प्रसंस्कृत दूध के नमूनों में एफ्लाटॉक्सिन-एम1, एंटीबायोटिक्स और कीटनाशकों जैसे पदार्थ अधिक पाए गए। अग्रवाल ने कहा कि कहा कि इसे रोकने के लिए, नियामक ने संगठित डेयरी क्षेत्र को गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से अनुपालन करने का निर्देश दिया है और एक जनवरी, 2020 तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में ‘परीक्षण और निरीक्षण’ की व्यवस्था करने को कहा है। एफएसएसएआई अध्ययन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मई और अक्टूबर 2018 के बीच 1,103 शहरों और कस्बों से कुल 6,432 दूध के नमूने एकत्रित किए गये। संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों से दूध के नमूने एकत्र किए गए थे। सीईओ ने कहा कि इस नियामक संस्था ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में त्योहारी मौसम के दौरान मिठाइयों में मिलावट रोकने के लिए खोये और घी जैसे दुग्ध उत्पादों की निगरानी बढ़ा दी है। एफएसएसएआई ने खाद्य व्यापार परिचालकों को दुग्ध उत्पाद और विशेष रूप से मिठाइयां बनाने में साफ सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए पारंपरिक दूध उत्पादों के बारे में एक मार्गदर्शक परिपत्र जारी किया है। अग्रवाल ने दुग्ध सर्वेक्षण जारी करते हुए संवाददाताओं से कहा कि हमने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में त्यौहारी सत्र के दौरान दूध उत्पादों की निगरानी शुरू की है। इसके लिए 44 स्थानों की पहचान की गई है और नमूने एकत्र किए जा रहे हैं जिन्हें गाजियाबाद स्थित हमारी राष्ट्रीय प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य दुग्ध उत्पादों में मिलावट की प्रकृति को जानना है और पता लगाना है किस तरह के मिलावटी तत्व मौजूद हैं। इसमें सूक्ष्म जैविक विश्लेषण भी किया जाएगा।खाद्य व्यापार के परिचालन के लिए जारी किए गए मार्गदर्शन परिपत्र में, एफएसएसएआई ने मिलावट को परखने के लिए उपभोक्ता युक्तियां सुझाने के अलावा, मिठाइयों के स्वजीनन, बनावट और स्वाद को देखकर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के तरीके सुझाए हैं। एफएसएसएआई ने उपभोक्ताओं के लिए घी, कॉटेज पनीर, रबड़ी और मिल्क पाउडर में होने वाली मिलावट का पता लगाने के लिये सरल तरीके भी बताये हैं।