शोधकर्ताओं ने तैयार किया कार्बन डाइऑक्साइड खाने वाला बैक्टीरिया

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क शोधकर्ताओं ने लैब में एक नया बैक्टीरिया तैयार किया है। यह बैक्टीरिया ऊर्जा के लिए कांप्लेक्स आर्गेनिक कंपाउंड की जगह कार्बन डाइऑक्साइड को पचाने में सक्षम है। इसके विकास से आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट की राह खुल सकती है, जिसमें बैक्टीरिया के उपयोग से पर्यावरण के लिए खतरनाक ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को कम किया जा सकता है।

इजरायल के विजमान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं के अनुसार, धरती पर पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों की दो श्रेणियां हैं। एक ऑटोट्रोफ्स है, जो कार्बन डाइऑक्साइड को बॉयोमास में तब्दील करता है। जबकि दूसरा हेटेरोट्रोफ्स आर्गेनिक कंपाउंड का सेवन करता है।

जर्नल सेल में प्रकाशित अध्ययन में उस प्रक्रिया की व्याख्या की गई है, जिसके जरिये शोधकर्ताओं ने एशेरिकिया कोली (ई कोली) नामक बैक्टीरिया को कार्बन डाइऑक्साइड पचाने वाला बना दिया। उन्होंने बताया कि बॉयोमास में ऑटोट्रोफ्स ऑर्गनिज्म का वर्चस्व होता है। इसकी ज्यादातर खाद्य पदार्थों और ईंधन की उत्पत्ति में अहम भूमिका होती है।

बॉयोमास कार्बनिक पदार्थ होता है, जो वनस्पतियों और पशुओं से प्राप्त होता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि सिंथेटिक ऑटोट्रोफ्स बनाना चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने लैब में तैयार ई कोली के मेटाबोलिज्म में बदलाव कर ऑटोट्रोफ्स तैयार किया। हालांकि ऑटोट्रोफ्स के पैमाने पर खरा उतरने के लिए ई कोली के मेटाबोलिज्म में किया गया बदलाव पर्याप्त नहीं पाया गया। इसके लिए अभी और शोध करने की जरूरत बताई गई है।

दावा

इजरायल के विजमान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज के शोधार्थियों का दावा

वातावरण से ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को कम करने की खुल सकती है राह

विजमान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज के शोधकर्ता और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक शमुअल ग्लीजर ने कहा, ‘एक बुनियादी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हम यह देखना चाहते थे कि क्या बैक्टीरिया के आहार में परिवर्तन करने से उनके बायोमास का संश्लेषण संभव है।’उन्होंने कहा कि अध्ययन के दौरान हमें उत्साहजनक परिणाम देखने को मिले। भविष्य में इस बैक्टीरिया में अन्य जरूरी बदलाव कर वायुमंडल से ग्रीन हाउस गैसों को कम करने में मदद मिल सकती है