रेल मंत्री ने दिए संकेत, कहा- मालगाड़ी में भी लागू होगा हर्जाने का फॉर्मूला | जनता से रिश्ता

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जनता से रिश्ता वेबडेसक | वक्त पर ट्रेनें चलाने में जुटा रेलवे जिम्मेदारी तय करने के लिहाज से आने वाले दिनों में यह कदम उठा सकता है. इस बात के संकेत रेल मंत्री पीयूष गोयल ने दिए हैं. डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के 14 में स्थापना दिवस समारोह पर बोलते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेलवे की दशा और दिशा को बदलने वाला है. इसका बड़ा असर रेलवे पर होगा. इसके तैयार होने के बाद तेजस ट्रेन की तरह गुड्स ट्रेनों को भी वक्त पर चलाए जाना चाहिए और यदि व्यापारियों का सामान गुड्स ट्रेन के जरिए तय वक्त से देरी से पहुंचता है तो उनको भी मुआवजा दिया जाना चाहिए इससे जिम्मेदारी तय होगी और रेलवे की न सिर्फ छवि साफ होगी बल्कि और भरोसा बढ़ेगा और आमदनी बढ़ेगी.

दरअसल रेलवे देशभर में माल गाड़ियों की आवाजाही के लिए नया ट्रैक बिछा रहा है और इस काम को  डीएफसीसीएल अंजाम दे रहा है. पहले फेज में ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं दोनों ही कॉरिडोर में 600 किलोमीटर से ज्यादा की रेल लाइन तैयार हो चुकी है ईस्टर्न कॉरीडोर अमृतसर से लेकर कोलकाता तक बनाया जा रहा है जबकि वेस्टर्न कॉरिडोर दादरी से लेकर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक तैयार किया जा रहा है.

यह दोनों कॉरिडोर तैयार होते ही इस रूट पर चलने वाली वाले सभी माल गाड़ियां डीएफसी कॉरिडोर पर शिफ्ट हो जाएगी लिहाजा रेलवे की वर्तमान पटरियो पर और ज्यादा यात्री ट्रेनों को चलाया जा सकेगा और वर्तमान में जो पैसेंजर ट्रेन दौड़ रही हैं उनको भी तय वक्त पर पहुंचाने में रेलवे को मदद मिलेगी.

डीएफसी कॉरिडोर को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने डीएफसी के सीएमडी एके सचान की भी तारीफ की और बेहतर प्रदर्शन करने वाले इंजीनियरों को स्थापना दिवस के दिन सम्मानित भी किया. डीएससी के जनरल मैनेजर ऑपरेशन वेद प्रकाश के मुताबिक इस साल के मार्च तक 900 किलोमीटर से ज्यादा का रेल ट्रैक बिछा लिया जाएगा जबकि अगले साल 2021 के अंत तक दोनों कॉरिडोर पूरे कर लिए जाएंगे.

दोनों ही कॉरिडोर पर दुनिया की सबसे आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि जो मशीन ट्रैक बिछाने का काम कर रही हैं उनकी एक मशीन की कीमत ही 500 करोड़ से ज्यादा है. ट्रैक बिछाने का काम पूरी तरह से ऑटोमेटिक तरीके से यह मशीन नहीं करती हैं मैनुअल इसमें कुछ भी नहीं है यही वजह है कि डीएफसी कॉरिडोर का निर्माण बड़ी तेजी से संभव हो पा रहा है.