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घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की तैयारी... ऑटो इंडस्ट्री के सीनियर प्रतिनिधियों ने ली थी बैठक...

Janta se Rishta
22 Aug 2020 3:19 PM GMT
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की तैयारी... ऑटो इंडस्ट्री के सीनियर प्रतिनिधियों ने ली थी बैठक...
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। नई दिल्ली। ऑटो सेक्टर में आयात पर लगाम लगाने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की तैयारी में है। सरकार ने ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स से पूरी वैल्यू चेन के बारे में निवेश, आयात और लोकेलाइजेशन के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। चीन भारत में ऑटो पार्ट्स का सबसे बड़ा सप्लायर है। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में घरेलू भागीदारी को बढ़ावा देने के मुद्दे पर 13 अगस्त को ऑटो इंडस्ट्री के सीनियर प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। शुक्रवार को इसकी एक समीक्षा बैठक हुई। बैठक में स्टील, टायर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रिक वीकल्स के पार्ट्स के आयात में कमी लाने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। इंडस्ट्री का कहना है कि ऑटोमेटिव मिशन प्लान के मुताबिक 2026 तक सालाना 6.5 करोड़ वाहनों की बिक्री का लक्ष्य है। इंडस्ट्री इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए घरेलू विनिर्माण की जरूरतों के बारे में सरकार को जानकारी देगी।

चीन से सबसे अधिक आयात : वित्त वर्ष 2020 में देश में 15.4 अरब डॉलर के ऑटो कंपोनेंट्स का आयात किया गया था। इसमें चीन की हिस्सेदारी 25 फीसदी से अधिक थी। दक्षिण कोरिया से 14 फीसदी, जर्मनी से 11 फीसदी और जापान से 9 फीसदी कलपुर्जों का आयात किया गया था। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने ऑटो इंडस्ट्री को निवेश, लोकेलाइजेशन लेवल, निर्यात, आयात और रॉयल्टी पेमेंट के बारे में कंपनी स्पेसिफिक जानकारी साझा करने को कहा है। ऑटो इंडस्ट्री की संस्था सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स को डेटा इकट्ठा करने और शेयर करने को कहा गया है।

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