पोंगल दक्षिण भारत में नहीं, अन्य देशों में इन नामों से मनाया जाता है ये त्योहार | जनता से रिश्ता

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। मकर संक्रांति पर सूर्य के उत्तरायण होने पर दक्षिण भारत में पोंगल का त्योहार मनाया जाता है। प्रमुख रूप से यह एक तमिल पर्व है। पोंगल का तमिल में अर्थ उफान या विप्लव से है। पारंपरिक रूप से यह त्योहार संपन्नता का प्रतीक माना जाता है जिसमें समृद्धि लाने के लिए वर्षा, धूप तथा खेतिहर मवेशियों की आराधना की जाती है। यह त्योहार मलेशिया तमिलनाडु के अलावा श्रीलंका, मलेशिया, मॉरिशस, अमेरिका एवं कनाडा में भी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 15 जनवरी को होगा, इसलिए पोंगल त्योहार 15 जनवरी से शुरु होगा और जो 18 जनवरी तक मनाया जाएगा। इस दौरान तमिलनाडु राज्य में मेले और उसमें प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन होता है। 

मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में अन्य देशों में मनाया जाता है यह त्योहार 

सूर्य का उत्तरायण में जाना यानी ऋतु परिर्वतन का भी संकेत है। भारत में ही अलग-अलग राज्यों में इसे दूसरे नामों से बनाया जाता है। यही नहीं एशियाई देशों की बात करें तो, नेपाल में  माघे-संक्रांति, सूर्योत्तरायण, थाईलैंड में भी इसे मनाया जाता है। इस पर्व को वहां सॉन्कर्ण के नाम से जाना जाता है। हालांकि यहां की संस्कृति भारतीय संस्कृति से बिल्कुल अलग है। थाइलैंड में हर राजा की अपनी विशेष पतंग होती थी जिसे जाड़े के मौसम में भिक्षु और पुरोहित देश में शांति और खुशहाली की आशा में उड़ाते थे। थाइलैंड के लोग भी अपनी प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुंचाने के लिए वर्षा ऋतु में पतंग उड़ाते थे। म्यांमार में इस दिन को थिनज्ञान के नाम से त्योहार मनाया जाता है, जो बौद्धों से जुड़ा हुआ है। यह त्योहर लगभग 3-4 दिन तक चलता है। यह माना जाता है कि नए साल के आने की खुशी में भी यह पर्व हर्सोल्लास के साथ मनाया जाता है। 

श्रीलंका एवं कंबोडिया में अलग तरीके मनायी जाती है मकर संक्रांति

ऐसे ही श्रीलंका में मकर संक्रांति मनाने का तरीका भारतीय संस्कृति थोड़ा अलग है। यहां इस पर्व को ‘उजाहवर थिरुनल’ के नाम से मनाया जाता है। यहां लोग इसे पोंगल भी कहते हैं, क्योंकि तमिलनाडु के लोग भी यहां रहते हैं। ऐसे ही कंबोडिया में भी मनाया जाता है कंबोडिया में मकर संक्रांति को ‘मोहा संगक्रान’ के नाम से जाना जाता है। यहां पर भी भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। ऐसी मान्यता है कि लोग यहां नए साल के आगमन और पूरे वर्ष खुशहाली भरे माहौल रहने के लिए मनाते हैं।