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पाकिस्तान: कराची में भड़का शिया विरोधी आंदोलन, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब,दंगा होने की आशंका

Janta se Rishta
12 Sep 2020 12:00 PM GMT
पाकिस्तान: कराची में भड़का शिया विरोधी आंदोलन, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब,दंगा होने की आशंका
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पाकिस्तान के कराची में शुक्रवार को शिया विरोधी प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हुए जिससे पाकिस्तान में सांप्रदायिक दंगा भड़कने की आशंका पैदा हो गई।

शिया विरोधी प्रदर्शन की चर्चा सोशल मीडिया पर पहले से ही तेज है, ऐसे में शुक्रवार को उमड़े जनसैलाब की तस्वीरों ने इसे हवा देने का काम किया। लोग पोस्ट, फोटो और वीडियो शेयर करने लगे और देखते ही देखते यह ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा। पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर हैशटैग शिया जनसंहार (#ShieGenocide) ट्रेंड करने लगा।

इस दौरान 'शिया काफिर हैं' के नारे बुलंद किए जा रहे थे और आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा पाकिस्तान के बैनर लहराए जा रहे थे। यह संगठन शियाओं की हत्या के लिए कुख्यात है।

https://twitter.com/ani_digital/status/1304636877736235009

पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर लिखे गए पोस्ट, प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियोज सांप्रदायिक दंगे को भड़काने की संभावना को प्रबल कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले माह मुहर्रम पर आशूरा जुलूस के प्रसारण के दौरान पाकिस्तान में कुछ मुख्य शिया नेताओं ने इस्लाम विरोधी अपमानजनक बयान दिए थे, जिसके बाद कराची में यह प्रदर्शन हुआ।

आफरीन नाम की एक्टिविस्ट ने बताया कि अनेकों शिया मुस्लिमों पर धार्मिक आलेखों को पढ़ने और आशूरा जुलूस में हिस्सा लेने के लिए हमला किया गया। आफरीन ने आगे कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान शिया मुस्लिमों के खिलाफ नफरत का समर्थन करने के लिए जिम्मेदार हैं।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा है कि 'हिंसा को कवर करने वाले पत्रकार बिलाल फारूकी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि फारूकी सांप्रदायिक हिंसा / संगठन को कवर करने वाले दुर्लभ पत्रकारों में से एक हैं। यह शियाओं के नरसंहार की ओर बढ़ाया गया कदम नहीं है तो यह क्या है?'

आफरीन ने आरोप लगाया है कि कुछ साल पहले शियाओं को मारने के लिए अंजान नंबर से मैसेज किए जा रहे थे। कभी उन पर ग्रेनेड भी फेंके जाते हैं। पाकिस्तान में ईशनिंदा एक संवेदनशील मुद्दा है और लोगों को इसका दोषी पाए जाने पर मौत की सजा होती है।बता दें कि इराक में स्थित करबला में 680 ईस्वी में हुए जंग के दौरान मोहम्मद की शहादत की याद में अभी भी आशुरा जुलूस निकाली जाती है।

https://jantaserishta.com/news/who-chief-praised-this-country-fiercely-set-example-in-front-of-whole-world-in-battle-with-corona/

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