महाराष्ट्र में फिर एक बार भीड़ हुई बेकाबू…स्टेशन के बाहर लगा मजदूरों का जमावड़ा…केंद्र और राज्य सरकार आमने सामने…जुबानी जंग जारी

महाराष्ट्र में फिर एक बार उड़ी लॉक डाउन की धज्जियां

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | कोरोना वायरस के संक्रमितों के मामले में महाराष्ट्र नंबर एक पर है. इसकी राजधानी मुंबई में लगातार मामले बढ़ रहे हैं फिर भी मुंबई में रेलवे स्टेशनों पर लोगों की भीड़ का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. कुर्ला टर्मिनस के बाहर मंगलवार शाम को बड़ी संख्या में लोगों भी देखने को मिली. ये भीड़ पहले की भीड़ तरह नहीं थी. पहले की भीड़ तो बिना किसी के नेतृत्व में इकट्ठा होकर पहुंच रही थी. इसमें प्रवासी मजदूर और कामगार शामिल थे. लेकिन कुर्ला टर्मिनस पर इकट्ठा हुई भीड़ संयोजित तरीके से सरकार ने पहुंचाई है.

कुर्ला टर्मिनस पर इकट्ठा हुए लोग मुंबई बेस्ट की बसों में धारावी और शहर के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचाए गए. ऐसा करने का आदेश सरकार था. यहां लोग 10 से 15 घंटे और इससे भी ज्यादा वक्त से स्टेशन के बाहर बैठें हैं और अपनी बारी और श्रमिक स्पेशल ट्रेन आने का इंतजार कर रहे हैं. महाराष्ट्र सरकार और केंद्र की रेलवे जिस तरीके से एक दूसरे से भिड़ रहे हैं, उसका खामियाजा अब आम लोग भुगत रहे हैं.

Kurla station - harbour line (Mumbai Local) - YouTube
लॉकडाउन में ट्रेनों को मिली है हरी झंडी

प्रवासी मजदूरों को जल्द निकालना चाहती है सरकार

मुंबई के धारावी सहित अलग-अलग हिस्सों से जिस तरह से बसें भरकर लोगों को स्टेशन पहुंचाया जा रहा है, ऐसा लग रहा है कि मुंबई का प्रशासन अब कैसे भी मुंबई की भीड़ कम करने में लगा है. अब तक फॉर्म भर कर वेटिंग के बाद लोगों को मुंबई से निकाला जा रहा था, पर अब तो स्थिति ऐसी हो गई है कि सरकार कैसे भी लोगों को शहर से निकालने के तैयार बैठी है.

स्टेशन के बाहर लगा मजदूरों का जमावड़ा

कुर्ला रेलवे स्टेशन पर फंसे लोगों का कहना है कि दिन में धारावी में ऐलान किया गया था कि जो भी व्यक्ति फॉर्म नहीं भर पाया है और जो यहां से जाना जाता है, वह जा सकता है. इस ऐलान के कुछ मिनटों बाद लोगों की भीड़ बसों में चढ़ने लगी. जो भी शख्स जितना सामान अपने पा रख सकता था, वह लेकर आया और अपने परिवार के साथ बस में बैठना शुरू हो गए. तेज धूप में लोग इंतजार करने के बाद शाम को रेलवे स्टेशन पहुंचे और यहां भी ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं. स्टेशन के बाहर फर्श पर छोटे-छोटे बच्चे सो रहे हैं. कुछ लोगों को खाने के लिए कुछ मिल गया है, तो कई लोग भूखे-प्यासे बैठे हुए हैं.