अब चांद पर जाना चाहती हैं कई कंपनियां, ऐसे में नासा ने जारी किये ये सिद्धांत | जनता से रिश्ता

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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। अंतरिक्ष में अपने नए अभियानों के लिए कई देश तैयार हैं. यहां तक कि अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा मंगल पर इंसान भेजने के साथ ही चंद्रमा पर बेस कैम्प बनाने की तैयारी भी कर रहा है. लेकिन इसके साथ ही चांद और अंतरिक्ष उत्खनन पर कानून बनाने की भी तैयारी चल रही है. नासा ने शुक्रवार को चांद पर अन्वेषण संबंधी इंटरनेशनल पैक्ट यानि अंतरराष्ट्रीय समझौते पर अपना प्रस्ताव जारी कर दिया है. इसे नासा ने आर्टिमिस एकॉर्ड  नाम दिया है.

क्या खास मांग है इस अनुबंध में
इन अनुबंध में इस बात की मांग की गई है कि भविष्य में चांद पर नासा के बेस बनने के बाद उनकी सुरक्षा हो सके. नासा ने यह सुरक्षा अपने बेस के आसपास कामकरने वाले प्रतिद्वंदी देशों या कंपनियों की ओर से होने वाले संभावित ‘नुकसानदायक दखलंदाजी’ से बचने के लिए मांगी है.

क्या होगा इन नियमों से

ये नियम इन देशों और कंपनियों को चंद्रमा के अपने संसाधनों का उपयोग करने की इजाजत देंगे. इससे नासा या उसकी कंपनियां चांद के पानी को रॉकेट के ईंधन के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे और वहां के खनिजों का वहां पर लॉन्च पैड बनाने के लिए उपयोग कर सकेंगे. नासा इस समय अपने आर्टिमिस प्रोग्राम के तरह लंबे समय तक इंसान की चांद पर उपस्थिति की तैयारी कर है. इसके लिए नासा अपने सहयोगियों को अपने साथ रखने के इरादे से ही इन अनुबंधों का प्रस्ताव दे रहा है.

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पहले भी लागू हुआ था इस तरह का नियम
नासा के प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टाइन ने साफ कहा है कि इस आर्टिमिस अकॉर्ड से नासा आउटर स्पेस ट्रीटी लागू कर रहा है. इसके लिए उन्होंने 1967 में इंटरनेशनल पैक्ट का उल्लेख किया जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि अंतरिक्ष का उपयोग सैन्य उपयोग की जगह शांति के लिए किया जाना चाहिए.

अमेरिकी सहयोगियों को होगा फायदा
इन ढांचे से उन देशों को फायदा होगा जो अमेरिका के अंतरिक्ष व्यवहार के मानकों के साथ चलेंगे. ये नियम चंद्रमा के साथ ही पृथ्वी की निचली कक्षा पर भी लागू होंगे. इन अनुबंध के तहत अन्य देशों के लिए यूनाइटेड नेशन्स स्पेस डेबरिज मिटिगेशन गाइडलाइन्स के मानकों को मानना बाध्यकारी होगा. इन मानकों में अंतरिक्ष में कचरा रोकने के लिए प्रावधान बनाए गए हैं. इसे अलावा इन देशों को अंतरिक्ष स्थापित अपनी वस्तुओं के कक्षा विवरण भी देने होंगे.

अमेरिका में तो है कानून लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं है
अमेरिकी कॉन्ग्रेस ने साल 2015 में एक कानून पास किया था जिसके तहत  कंपनियों का उन संसाधनों पर पूरा हक होगा जिनका वे अंतरिक्ष में उत्खनन करेंगे. लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का कोई कानून नहीं है. आर्टिमस अकॉर्ड ट्रम्प प्रशासन की अंतरिक्ष नीतियों के अनुकूल है. यह कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चंद्रमा पर खनिज उत्खनन का रास्ता साफ करेगा. यह अनुबंध अन्य देशों को भी इसी तरह के कानून लागू करने के लिए आग्रह करेगा जिससे उनके निजी क्षेत्र के अंतरिक्ष कार्यक्रम भी इससे बंध सकें.

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क्यों जरूरी है यह कानून
नासा के पूर्व डिप्टी प्रशासक लोरी गार्वर का कहना है कि कोई निजी कंपनी क्यों अंतरिक्ष में जाकर खनिज उत्खनन का जोखिम लेगी यदि हम उन्हें उन संसाधनों के मालिकाना हक से रोक दें. इस तरह के नियम अंतरिक्ष विकास को बढ़ावा ही देंगे.

छिड़ गई है यह बहस
नासा के इस कदम से अब वैश्विक मंच पर बहस छिड़ गई है कि के अंतरिक्ष और अन्य ग्रहों पर इंसान के रहने और काम करने के लिए क्या नियम होने चाहिए, क्या कानून होने चाहिए. देखने वाली बात होगी अन्य देश कैसे इस पर प्रतिक्रिया करते हैं लेकिन कई विशेषज्ञ इस अनुबंध से आशांवित हैं. उनका मानना है कि ये नियम भविष्य को  स्टार ट्रैक की तरह बनाएंगे स्टार वॉर की तरह नहीं.