मुस्तैदी की जरुरत | जनता से रिश्ता

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | पूर्णबंदी से कोरोना संक्रमण का चक्र तोड़ने का संकल्प कामयाब साबित नहीं हुआ है। संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब इसके दूर-दराज के इलाकों, गांवों में भी अपने पांव पसारने की आशंका बढ़ गई है। इससे निस्संदेह राज्य सरकारों की चुनौती बढ़ गई है। अर्थव्यवस्था पर पड़ती बुरी मार को देखते हुए बंदी के चौथे चरण में व्यावसायिक गतिविधियों को इजाजत दे दी गई। परिवहन सेवाएं भी धीरे-धीरे शुरू हो गईं। इस तरह लोगों की आवाजाही का सिलसिला बढ़ गया है। माना जा रहा था कि कल-कारखाने, दुकानें, व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होंगी, तो लोगों को काम मिलना शुरू हो जाएगा और प्रवासी मजदूरों का अपने घरों की तरफ लौटने का सिलसिला रुकेगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। चौथे चरण में सबसे अधिक घरवापसी हो रही है। बड़ी संख्या में मजदूर पैदल ही शहर छोड़ चले। बहुत सारे ट्रकों, टेंपो आदि में छिप कर गए। हालांकि राज्य सरकारों ने विशेष रेलें और बसें चलाईं, पर उनमें लोग अंट नहीं पा रहे। अभी तक वापस लौटने वालों के जत्थे जगह-जगह जमा देखे जा रहे हैं। हालांकि इन लोगों की जांच वगैरह करने के बाद ही भेजा जा रहा है और जहां पहुंच रहे हैं, वहां भी जांच के इंतजाम हैं। मगर गांव लौटे लोगों में जिस तरह संक्रमण का खतरा बना हुआ है, उससे सरकारों को नई रणनीति बनाने की जरूरत रेखांकित होती है।

देश में संक्रमितों की संख्या सवा लाख के करीब पहुंचने को है। यह कुछ सुकूनदेह है कि ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है, पर चिंता की बात है कि मृतकों का आंकड़ा भी निरंतर ऊपर की ओर है। बड़े शहरों में संक्रमितों की पहचान और इलाज के इंतजाम हैं, वहां योग्य चिकित्सकों के दल भी हैं, पर गांवों में इसके लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए हैं। हालांकि कुछ ग्राम पंचायतें बाहर से आए लोगों के लिए एकांतवास आदि का इंतजाम कर रही हैं, पर ज्यादातर गांवों में ऐसा कोई सख्त और पुख्ता उपाय नहीं किया गया है। इसलिए शहरों से लौटे संक्रमितों से दूसरे लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।

चूंकि कोरोना की रोकथाम के लिए अभी तक कोई कारगर दवा नहीं मिल पाई है, इसलिए इस विषाणु का खतरा लंबे समय तक बना रहेगा। इससे बचाव के लिए सामाजिक दूरी और सफाई जैसे उपायों पर अमल जरूरी है। पर गांवों में पहुंच रहे कई लोग इस मामले में लापरवाही बरत सकते हैं। कई साधन के अभाव और जागरूकता की कमी के चलते एहतियाती उपायों पर अमल नहीं कर पाते। इस तरह अगर संक्रमण की रफ्तार बढ़ी तो उससे पार पाना मुश्किल होगा। इसलिए राज्य सरकारों को ग्राम पंचायतों के साथ तालमेल करके बाहर से आने वालों की पहचान, उनके एकांतवास जैसे मामलों में मुस्तैदी दिखाने की जरूरत है। अस्पतालों में मरीजों के लिए जगह बढ़ाने। अब भी जांच की रफ्तार संतोषजनक नहीं है, इसलिए इलाज उपलब्ध कराने में भी तेजी नहीं आ पा रही। इस दिशा में भी गति लाने की जरूरत है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अब कोरोना सदा हमारे साथ रहेगा, इसलिए इसके साथ जीना सीखना होगा। मगर इसका यह अर्थ नहीं कि इससे बचाव के उपायों पर अमल में शिथिलता बरती जाए।

सोर्स – जनसत्ता