छत्तीसगढ़

तेल देखो और तेल की धार देखो, प्रदेश में भाजपा-कांग्रेस की तकरार देखो

Janta se Rishta
11 Sep 2020 6:55 AM GMT
तेल देखो और तेल की धार देखो, प्रदेश में भाजपा-कांग्रेस की तकरार देखो
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घर के जोगी जोगड़ा, आन गांव के संत

जा़किर घुरसेना/कैलाश यादव
रायपुर । छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दो बड़े नेता आपस में बात करते हुए यह कहते हुए भी संकोच नहीं कर रहे थे कि प्रभारी महामंत्री और कांग्रेस पार्टी के सर्वेसर्वा नेता पुनिया को अपने ही प्रदेश में नाको चने चबाने पड़े। यूपी प्रदेश की बड़ी कमेटी में भी जगह पाने के लिए अपने से कई छोटे स्तर के नेताओं के साथ आने के लिए भी कोई गुरेज नहीं दिखी और अपने ही गृहप्रदेश में बड़े नेताओं के साथ बैठने के लिए आतुर पुनिया ने ये भी नहीं देखा कि वे राष्ट्रीय महामंत्री भी है और प्रदेश के प्रभारी भी है। अपने स्तर को नहीं समझते हुए अपने गृहप्रदेश में अपनी पार्टी में अपनी जगह बनाने के लिए हर तरह के जद्दोजहद में शामिल होना पड़ा तब जाकर उनको सफलता हासिल हुई। जबकि छत्तीसगढ़ के नेतागण श्री पुनिया को मान सम्मान और इज्जत से सरआंखों पर बिठाकर उनकी हर बात पर सहमति जताते रहेे। जिसका छत्तीसगढ़ के मूल कांग्रेसी नेता गण भुगतान भुगत रहे।

चिठ्ठी कांड से कांग्रेस में खाई और गहराई

कांग्रेस में चिठ्ठी कांड के बाद बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है, एक के बाद एक, चिठ्ठी निकल कर आ रही है। हाईकमान जी 23 के नेताओं से दूरी लगभग बना ही ली है, ऐसा प्रतीत होता है। जो कांग्रेस पार्टी के लिए ठीक नहीं है। सोनिया गांधी को स्वयं निर्णय लेने का वक्त आ गया है। राहुल बाबा के भरोसे छोड़ देना कांग्रेस की जहाज डूबाने जैसा है। सब को एक कर रखने वाला हो ऐसे मजबूत स्तंभ की जरूरत है, जो समय के अनुकूल निर्णय लेकर संगठन को मजबूती दे सके। ऐसा चिठ्ठी कांड वाले नेता मान रहे हैं। उनका कहना है कि संसद के मानसून सत्र में कोविड 19, भारत-नेपाल-चीन सीमा विवाद के अलावा गिरती अर्थव्यवस्था पर सरकार को घेरने की रणनीति बनानी चाहिए थी। लेकिन आपसी विवादों में घिरे और टूटे मनोबल के नेताओं से इसकी उम्मीद करना रेत से तेल निकलने जैसा है। वहीं कई भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी को उपहास का पात्र बनाकर विभिन्न टाइटल से नवाज रहे हैं। ऐसे खराब दौर में उन्हें ऊर्जावान नेताओं के साथ अनुभवी नेताओं की भी सख्त जरुरत पड़ेगी।

अनुभवी नेताओं की कमी भाजपा में नहीं

छत्तीसगढ़ में ऐसा लगता है भाजपा 2018 के आम चुनाव के अवसाद से अभी तक उबर नहीं पायी है। यहाँ भी गुटबाजी हावी है। जब से सुंदरानी शहर अध्यक्ष बने हैं हलाकान करने वालों की बाढ़ आ गई है। ज्यादा अनुभवी नेता होने से भी खतरा ही खतरा पैदा हो गया है। भाजपा नेताओं की भलाई इसी में है कि सभी एक होकर कांग्रेस के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक की लड़ाई लड़े जिससे आने वाले समय में सत्ता का रास्ता खुल जाए, यही वक्त की मांग है।

वक्त की मांग तो कोरोना से लडऩे की है

छत्तीसगढ़ में कोरोना बेकाबू हो गया है,कोरोना संक्रमितों की संख्या बढऩे से एम्स,मेकाहारा व अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सामान्य बीमारी वाले मरीज कहां जाएं। सरकारी और निजी अस्पतालों में जगह नहीं है, निजी अस्पताल वाले लूट मचा रखे हैं। इस बात को संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने ही खुलासा किया हैं। सरकार को उनकी स्वीकारोक्ति को संज्ञान में लेकर ऐसे अस्पतालों के ऊपर कठोर कार्रवाही करनी चाहिए। जनता में खुसुर-फुसुर है कि हमको इसका फायदा मिलेगा की नहीं। आखिर हमें कहां जाना होगा?

आपदा में भी अवसर तलाशने वालों की कमी नहीं

राजधानी में भी कई बड़े-छोटे स्टार होटल वाले है जो आपदा को अवसर में बदल दिया है। और अपने होटल को पेड क्वारेंटाइन सेंटर बना दिया है। हमारे देश में भांति-भांति के जमात लोग पाये जाते है, एक जमात ऐसा भी है जो आपदा में अवसर तलाशने से बाज नहीं आ रहा है। अस्पतालों की बात करें तो ऐसे भी अस्पताल वाले है, जो हाथ में फ्रेक्चर वाले मरीज को कोरोना बता कर लाखों लूट लेते है। देश और दुनिया दु:ख और संकट से गुजर रहा है । केंद्र सरकार के एक मंत्री जी का कहना है कि इस घड़ी में अपना मनोबल ऊँचा कर लोगों की मदद करें। मनोबल सिर्फ जनता ऊंचा रखे या सरकार भी। जनता में खुसुर फुसुर हो रही है कि जनता का ध्यान कोरोना से हट कर सुशांत केस पर है, राजनीति के चलते यह केस और भी जटिल हो गया है । ऐसा लगता है कि इसमें राजनीति प्रमुख हो गई है। बिहार के सीएम नीतिश कुमार को भी चुनाव के पहले अवसर मिल गया है और केंद्र सरकार को उद्धव ठाकरे से बदला लेने का भी अच्छा अवसर मिल गया है। हर कोई इस अवसर को भुनाना चाह रहा है। आपदा को अवसर में बदलना ही राजनीतिक पैंतरेबाजी है।

पुलिस की दांव साख पर

सुशांत के पिता ने पटना में रिया और उसके परिवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज क्या करवाया सुशांत बॉलीवुड स्टार से बिहार का स्टार हो गया और आने वाले दिनों में बिहार में चुनाव भी है। इस केस में पटना पुलिस और मुंबई पुलिस की तनातनी किसी से छुपी नहीं है,उस पर नितीश कुमार का तुक्का उन्हीं की मांग पर केंद्र सरकार ने सीबीआई को सौंपी है। जनता में खुसुर फुसुर हो रही है कि सरकार ने पुलिस और सीबीआई की साख को ही दांव पर लगा दिया है।

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

ऐसा लगता है बॉलीवुड अदाकारा कंगना रानौत को बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है, जिस हिसाब से सुशांत केस में बढ़चढ़ कर बयान दे रही है, उससे लगता है कि जल्द ही वे बिहार चुनाव प्रचार जायेंगी। हालांकि महाराष्ट्र भाजपा ने कंगना बयान से अपने को अलग कर लिया है । दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कंगना को वाई श्रेणी सुरक्षा प्रदान कर दिया है। जनता में खुसुर फुसुर हो रही है कि महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस को बदनाम करने कंगना का सहारा ले रही है। अब कंगना भी उचक उचक कर उखाडऩे पछाडऩे का बयां दे रही है।

कांग्रेसियों के लिए खुशखबरी,उम्मीद में दुनिया कायम है

पिछले दिनों भूपेश बघेल दिल्ली प्रवास पर थे, जहां पर वे सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अहमद पटेल से मिले। सोनिया गांधी ने उन्हें बिहार चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी के साथ जबरदस्त तरीके से कांग्रेस की उपस्थिति दर्ज कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। बातचीत के दौरान भूपेश बघेल निगम मंडल में नियुक्ति के लिए हरी झंडी भी ले लिया और उन्होंने इसके लिए हामी भी भर दी है । कांग्रेस में कई सालों के सूखे के बाद झमाझम बारिश की उम्मीद है। एक दावेदार बोलता है -भाई उम्मीद में दुनिया कायम है।

शहर बदल गया, फिजां नहीं बदली

छत्तीसगढ़ बने 20 साल हो चुका है, पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय में पटवारी से लेकर कलेक्टर तक कोई किसी का फोन नहीं उठाते थे, कमोबेश यही स्थिति आज भी नजर आता है । कांग्रेस भवन में दो तीन नेता गुफ्तगू में लगे थे, एक नेता कहता है ऐसा ही काम ये अधिकारी रमन सरकार के समय भी करते थे, तभी दूसरा बोलता है इसी कारण भाजपा सरकार भसक गई, तभी तीसरा नेता बोल पड़ता है, अरे रुक न यार एकाधदिन दाऊजी को बोल के इनको ठीक करवाते है, सबके ऊपर राशन पानी लेकर चढ़ जायेंगे।

ये कैसा नारी सम्मान है भाई

कंगना रनौत ने मुंबई की तुलना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से की थी, हाल में ही उन्हें वाय श्रेणी सुरक्षा केंद्र सरकार ने मुहैया करा दी। अब जनता में खुसुर फुसुर है कि किरण राव ने मॉब लिंचिंग को लेकर परेशानी का जिक्र किया तो उन्हें पाकिस्तान जाने की सलाह दी गई थी,भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर से पीडि़त महिला सुरक्षा की मांग करती रही और भाजपा विधायक सेंगर एक-एक करके उसके परिवार वालों को मरवाता रहा। डॉ आदिले से पीडि़त युवती ने भी पुलिस में अपनी जान को खतरा होने की गुहार लगाई है। सुरक्षा की असली हकदार तो ये माँ-बहनें थीं, लेकिन सुरक्षा मिली कंगना को। ये कैसा नारी सम्मान है भाई….

लोगों को दिखता है तो पुलिस को क्यों नहीं

इन दिनों शहर में जुआ,सट्टा और नशे का अवैध कारोबार काफी फल-फूल रहा है। गली मोहल्लों में खुले आम नशे का कारोबार चल रहा है,पुलिस हवा में हाथ पैर मार रही है। जनता में खुसुर फुसुर हो रही है कि ये सब आम जनता को दिख रहा है, लेकिन पुलिस को नजर क्यों नहीं आ रहा है। कहीं वसूली की सवाल तो नहीं है भाई… हालाकि नये एसएसपी आने के बाद कड़ाई जरूर हुई है।

अंत में …

-कंगनारानौत का कहना हैकि बीएमसी ने मेरे कार्यालय को कब्जे में लेकर तोड़ दिया है। लोग खुसुर-फुसुर कर रहे है कि आपने तो कार्यालय पीओके में खोला तो इसमें बीएमसी क्या करेगी।
-वाट्सअप यूनीवर्सिटी ने इलेक्ट्रानिक्स मीडिया के पत्रकारों को ज्ञान दिया है कि देश को रिया की जरूरत नहीं है बल्कि देश के किसानों यू-रिया, और नौजवानों को नौक-रिया की जरूरत है।

खेतान जी पत्रकारों पर भी नजरं इनायत करें

खेतान जी आपने छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में खूब कलेक्टरी की है, कांकेर के आईएएस को कुछ गुरु ज्ञान दीजिए, जब आईएएस ही असम्माननीय भाषा में बात करेगा तो प्रशासन कैसे चलेगा। आईएसएस अफसर कांकेर हमेशा बारहसिंगा के सींग लगाकर घूम रहे है। कोरोना के मामले में जब कांकेर के एक पत्रकार ने सवाल पूछा तो आईएसएस अफसर ने जवाब दिया कि कोरोना पीडि़तों को तेरा बाप खिलाएगा। ऐसे बिगड़े बोल वाले आईएसएस अफसर को आप क्या कहेंगे। कुछ गुरुमंत्र ट्विट कर दीजिए, जिससे उनका ज्ञान चाक्षु खुल जाए, क्योंकि आप आईएसएस अफसरों के गाडफादर हैं।

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